मुंद्रा पोर्ट की ऐतिहासिक उपलब्धि: मुंद्रा पोर्ट ने रचा इतिहास: सीधे जेटी पर आया देश का पहला पूरी तरह लदा हुआ विशाल क्रूड टैंकर

मुंद्रा पोर्ट ने रचा इतिहास: सीधे जेटी पर आया देश का पहला पूरी तरह लदा हुआ विशाल क्रूड टैंकर
Mundra Port
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Highlights

  • मुंद्रा पोर्ट सीधे जेटी पर पूरी तरह लदे वीएलसीसी को संभालने वाला देश का पहला बंदरगाह बना।
  • एमटी न्यू रिनाउन नामक विशाल टैंकर करीब 3.3 लाख क्यूबिक मीटर कच्चा तेल लेकर मुंद्रा पहुंचा।
  • यह जेटी 489 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए राजस्थान की बाड़मेर रिफाइनरी से सीधे जुड़ी है।
  • मुंद्रा पोर्ट ने वित्त वर्ष 2024-25 में 200 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक कार्गो हैंडल करने का रिकॉर्ड बनाया।

मुंद्रा | भारत के समुद्री और ऊर्जा बुनियादी ढांचे ने इस साल की शुरुआत में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया है। मुंद्रा पोर्ट पर देश का पहला पूरी तरह से लदा हुआ वेरी लार्ज क्रूड कैरियर सीधे जेटी पर सफलतापूर्वक पहुंचा है।

एमटी न्यू रिनाउन नाम का यह विशाल टैंकर लगभग 3.3 लाख क्यूबिक मीटर कच्चा तेल लेकर मुंद्रा पोर्ट की जेटी पर पहुंचा। इस सफल ऑपरेशन के साथ ही भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है जिनके पास ऐसी क्षमता है।

ऐतिहासिक उपलब्धि का विवरण

अब भारत के पास ऐसे बंदरगाह मौजूद हैं जो पूरी तरह से लोड किए गए वीएलसीसी को सीधे अपनी जेटी पर संभालने की क्षमता रखते हैं। यह उपलब्धि भारत के समुद्री व्यापार और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव का संकेत देती है।

इससे पहले भारत में इतने बड़े कच्चे तेल के जहाजों को संभालने के लिए ऑफशोर सिंगल पॉइंट मूरिंग पर निर्भर रहना पड़ता था। बड़े जहाजों से तेल उतारने के लिए अक्सर लाइटरिंग ऑपरेशन का सहारा लिया जाता था जो काफी जटिल प्रक्रिया थी।

पुरानी प्रणालियों से बड़ी छलांग

मुंद्रा पोर्ट की इस नई और उन्नत क्षमता से अब बाहरी प्रणालियों पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी। अब कच्चे तेल की हैंडलिंग पहले के मुकाबले कहीं अधिक सुरक्षित और तेज गति से पूरी की जा सकेगी।

पूरी तरह से लदे हुए वीएलसीसी को अधिकतम डिस्प्लेसमेंट पर सीधे जेटी पर बर्थ करना एक संरचनात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। एमटी न्यू रिनाउन की बर्थिंग का कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण समुद्री और मौसमी परिस्थितियों में पूरा किया गया।

तकनीकी दक्षता और परिचालन उत्कृष्टता

तेज हवाओं और समुद्र की मजबूत धाराओं के बीच इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देना एक बड़ी तकनीकी जीत है। इसने एपीएसईजेड की मरीन टीम और पोर्ट मैनेजमेंट की सटीक योजना और परिचालन उत्कृष्टता को दुनिया के सामने साबित किया है।

मुंद्रा का यह वीएलसीसी जेटी अब दुनिया के उन चुनिंदा बंदरगाहों में शामिल है जहां इतनी अधिक गहराई और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध है। यहां 21.6 मीटर ड्राफ्ट और 3,60,000 मीट्रिक टन तक के अधिकतम डिस्प्लेसमेंट वाले जहाजों को सीधे लगाया जा सकता है।

विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा

इस जेटी की लंबाई 400 मीटर है और इसकी बर्थ पॉकेट की गहराई 25 मीटर तक सुनिश्चित की गई है। यह बुनियादी ढांचा 333 मीटर की लंबाई वाले विशाल जहाजों को आसानी से संभालने में पूरी तरह सक्षम है।

यहां लगाए गए दो 20-इंच के क्रूड ऑयल लोडिंग आर्म प्रति घंटे 10,000 से 12,000 क्यूबिक मीटर तक कच्चे तेल का डिस्चार्ज कर सकते हैं। यह उन्नत प्रणाली तेल उतारने की प्रक्रिया को बहुत अधिक कुशल और समय बचाने वाली बनाती है।

आधुनिक सुविधाएं और सुरक्षा

जेटी पर उन्नत फेंडर सिस्टम और चार ब्रेस्टिंग डॉल्फिन के साथ छह मूरिंग डॉल्फिन भी स्थापित किए गए हैं। इनमें 150 टन की क्षमता वाले विशेष हुक्स लगे हैं जो अल्ट्रा-लार्ज जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।

रणनीतिक दृष्टिकोण से यह उपलब्धि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। मुंद्रा की यह वीएलसीसी जेटी सीधे तौर पर राजस्थान स्थित एचपीसीएल की बाड़मेर रिफाइनरी से जुड़ी हुई है।

ऊर्जा सुरक्षा के लिए रणनीतिक महत्व

लगभग 489 किलोमीटर लंबी कच्चे तेल की पाइपलाइन के जरिए यह कनेक्टिविटी स्थापित की गई है। बाड़मेर रिफाइनरी को देश की सबसे महत्वपूर्ण रिफाइनिंग परिसंपत्तियों में से एक माना जाता है।

इस सीधी कनेक्टिविटी की मदद से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल के आयात में दक्षता और पारदर्शिता बढ़ेगी। इससे पूरी सप्लाई चेन अधिक मजबूत होगी और तेल की आपूर्ति में आने वाली बाधाएं दूर होंगी।

आर्थिक गतिविधियों में तेजी

गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में इस विकास के कारण आर्थिक गतिविधियों में काफी तेजी आने की उम्मीद है। यह बुनियादी ढांचा औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में सहायक सिद्ध होगा।

अदाणी का मुंद्रा पोर्ट वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा कमर्शियल पोर्ट बना हुआ है। कच्छ की खाड़ी में स्थित यह डीप-वॉटर और ऑल-वेदर पोर्ट उत्तर भारत के लिए एक प्रमुख द्वार है।

अदाणी मुंद्रा पोर्ट का वर्चस्व

यहां 27 ऑपरेशनल बर्थ और दो सिंगल पॉइंट मूरिंग की सुविधा उपलब्ध है। यह पोर्ट ड्राई बल्क, ब्रेक-बल्क, लिक्विड्स, कंटेनर और ऑटोमोबाइल जैसे विविध कार्गो को संभालने की क्षमता रखता है।

वित्त वर्ष 2024-25 में मुंद्रा पोर्ट ने एक ही साल में 200 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक कार्गो हैंडल करने का रिकॉर्ड बनाया। यह उपलब्धि हासिल करने वाला यह भारत का पहला और एकमात्र बंदरगाह बन गया है।

वैश्विक पहचान और रिकॉर्ड

वर्ल्ड बैंक के कंटेनर पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स में भी मुंद्रा पोर्ट को विशेष मान्यता प्राप्त हुई है। साल 2024 और 2025 की रैंकिंग ने इसकी वैश्विक साख और परिचालन क्षमता को और अधिक मजबूत किया है।

मुंद्रा पोर्ट अब केवल भारत का ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर एडवांस क्रूड हैंडलिंग क्षमताओं वाला बंदरगाह बनकर उभरा है। यह सफलता भविष्य में बड़े जहाजों के आवागमन और व्यापार के नए रास्ते खोलेगी।

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