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एमआरपी प्रणाली में सुधार की मांग: राज्यसभा सांसद नीरज डाँगी ने एमआरपी प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए सदन में उठाई आवाज

गणपत सिंह मांडोली

नीरज डाँगी ने राज्यसभा में एमआरपी प्रणाली की खामियों और भारी छूट के नाम पर उपभोक्ताओं के साथ होने वाले धोखे को सुधारने की मांग की।

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नीरज डाँगी

नई दिल्ली | राज्यसभा सांसद नीरज डाँगी ने संसद में विशेष उल्लेख के माध्यम से देश में वस्तुओं एवं उपभोक्ता उत्पादों पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) प्रणाली की विसंगतियों पर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने इस व्यवस्था को अव्यवस्थित और उपभोक्ता-विरोधी करार दिया।

सदन को संबोधित करते हुए श्री डाँगी ने कहा कि वर्तमान में कई कंपनियाँ उत्पादों पर वास्तविक लागत से कहीं अधिक एमआरपी अंकित करती हैं। इसके बाद भारी छूट का दिखावा कर बिक्री की जाती है, जिससे उपभोक्ता भ्रमित होता है। यह प्रवृत्ति न केवल उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ है, बल्कि निष्पक्ष व्यापार की भावना को भी ठेस पहुँचाती है। उन्होंने बताया कि 40 से 50 प्रतिशत तक की कृत्रिम छूट देकर ग्राहकों को लुभाना बाजार की एक गंभीर खामी बन चुकी है।

सांसद ने ऑनलाइन और ऑफलाइन कीमतों में बढ़ते असंतुलन और उत्पाद की लागत व मुनाफे की जानकारी के अभाव पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एमआरपी प्रणाली को युक्तिसंगत बनाना करोड़ों उपभोक्ताओं के हित में अनिवार्य है ताकि मूल्य पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। श्री डाँगी ने सरकार से एमआरपी निर्धारण के लिए सख्त नियम बनाने की मांग की। उनके प्रमुख सुझावों में आवश्यक वस्तुओं के लिए मुनाफे की एक अधिकतम सीमा तय करना और पैकेजिंग पर इफेक्टिव प्राइस रेंज अंकित करना अनिवार्य बनाना शामिल है।

उन्होंने यह भी मांग की कि उपभोक्ता मामलों का विभाग इस प्रणाली की नियमित समीक्षा करे और नियमों के उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करे। उन्होंने अंत में जोर दिया कि इन सुधारों से न केवल उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत होगा, बल्कि बाजार में स्वस्थ और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा मिलेगा।

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