पाकिस्तान की घबराहट: ऑपरेशन सिंदूर से सहमा पाकिस्तान अमेरिका में गिड़गिड़ाया, लॉबिंग के लिए खर्च किए 45 करोड़ रुपये

ऑपरेशन सिंदूर से सहमा पाकिस्तान अमेरिका में गिड़गिड़ाया, लॉबिंग के लिए खर्च किए 45 करोड़ रुपये
ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान की घबराहट
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Highlights

  • ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने युद्ध रोकने के लिए अमेरिका में 60 से अधिक बार संपर्क किया।
  • पाकिस्तान ने अमेरिकी प्रशासन को प्रभावित करने के लिए 6 लॉबिंग फर्मों पर करीब 45 करोड़ रुपये खर्च किए।
  • भारतीय दूतावास ने भी व्यापार और कूटनीतिक संचार के लिए अमेरिकी फर्म एसएचडब्ल्यू पार्टनर्स की सेवाएं लीं।
  • भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि लॉबिंग फर्मों का उपयोग 1950 के दशक से चली आ रही एक कानूनी प्रक्रिया है।

वॉशिंगटन | अमेरिका के फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट के सार्वजनिक हुए दस्तावेजों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा खुलासा किया है। इन दस्तावेजों के अनुसार पिछले साल अप्रैल में भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान बुरी तरह घबरा गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान ने भारत के साथ संभावित युद्ध को रोकने के लिए अमेरिका में अपने राजनयिकों के माध्यम से भारी लॉबिंग की थी। पाकिस्तानी अधिकारियों ने अमेरिका के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों सांसदों और पेंटागन के अफसरों के साथ करीब 60 बार संपर्क साधा था।

फाया के तहत अमेरिकी न्याय विभाग में दाखिल दस्तावेजों से पता चलता है कि पाकिस्तानी राजनयिकों ने ईमेल और फोन कॉल का सहारा लिया। उन्होंने चार दिनों तक चले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और उसके बाद भी संघर्ष विराम के लिए कई अहम बैठकें जारी रखी थीं।

पाकिस्तान किसी भी तरह से भारत पर अमेरिका का दबाव बनाकर सैन्य टकराव को रुकवाना चाहता था। उसने ट्रम्प प्रशासन तक तेजी से पहुंच बनाने और कूटनीतिक फैसलों को प्रभावित करने के लिए 6 लॉबिंग फर्मों पर करीब 45 करोड़ रुपये खर्च किए थे।

भारतीय दूतावास की रणनीति और लॉबिंग

अमेरिकी लॉबिंग फर्म एसएचडब्ल्यू पार्टनर्स एलएलसी ने भी अपनी रिपोर्ट में भारतीय दूतावास के साथ अपने काम का उल्लेख किया है। भारतीय दूतावास ने अमेरिकी सरकार और उसके अधिकारियों से संपर्क बढ़ाने के लिए इस पेशेवर फर्म की सेवाएं ली थीं।

फर्म के मुताबिक अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच भारतीय दूतावास के लिए कई अहम रणनीतिक मुद्दों पर बातचीत में मदद की गई। इस दौरान भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास किए गए थे।

फाया में दी गई जानकारी के अनुसार 10 मई को इस फर्म ने भारतीय दूतावास की ओर से व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क कराया। इसमें व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स और अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर जैसे नाम शामिल थे।

इस विशेष बैठक के दौरान भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते और ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी मीडिया कवरेज पर चर्चा हुई थी। 10 मई को ही भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक चला सैन्य टकराव आधिकारिक रूप से समाप्त हुआ था।

राजनयिक प्रयासों का विस्तार

लॉबिंग फर्म की मुख्य भूमिका बैठकों की व्यवस्था करना और फोन कॉल के जरिए दोनों देशों के अधिकारियों को जोड़ना था। इसके अलावा भारतीय दूतावास ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ भी बैठक के लिए मदद मांगी थी।

कई आधिकारिक प्रविष्टियों में भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत बातचीत का जिक्र है। इसी तरह एक अन्य फर्म सिडेन लॉ एलएलपी ने पाकिस्तान को अमेरिका के साथ आर्थिक साझेदारी बढ़ाने में मदद की थी।

भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने इस पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है। अमेरिका में विभिन्न दूतावास और व्यावसायिक संगठन लॉबिंग फर्मों और सलाहकारों का सहारा अपनी बात रखने के लिए लेते हैं।

भारतीय दूतावास भी 1950 के दशक के बाद से ही आवश्यकता के अनुसार ऐसी अंतरराष्ट्रीय फर्मों के साथ अनुबंध करता रहा है। अमेरिका में फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत विदेशी सरकारों के साथ लॉबिंग करना पूरी तरह कानूनी और स्थापित प्रथा है।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी जस्टिस विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर इसका पूरा पारदर्शी रिकॉर्ड उपलब्ध है। इसे किसी प्रकार की बाहरी मध्यस्थता के तौर पर देखना एकदम गलत है क्योंकि यह राजनयिक संचार का हिस्सा है।

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