thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 📍 राज्य 📰 लाइफ स्टाइल 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 📰 जालोर 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 📰 मनचाही ▶️ YouTube
बहते शब्द

कविता नीलू शेखावत: ओल्ड लैंग साइन

नीलू शेखावत

पेशे से शिक्षिका! राजस्थान विश्वविद्यालय में रिसर्च कर रही हैं और लिखती हैं जन की बात मन की भाषा में। फेसबुक पर बौद्धिक चेतना के शिखर वाले वर्ग में नीलू खूब पढ़ी जाती हैं। जड़ों से जुड़े विषयों पर मौलिक लेखन जो सीधा पाठक का जुड़ाव कराता है।

+Follow us
thinQ360 को गूगल पर फेवरेट बनाएँ

HIGHLIGHTS

  • कोविड के हालात पर नीलू शेखावत की एक कविता
  • किस तरह से यह बीमारी हमारे जीवन का अंग बन गई
  • कोविड पर कविता
poem on covid by neelu shekhawat
sign language

▪️ओल्ड लैंग साइन▪️

खूंटियों पर लटकते मास्क
सहसा दिला देते हैं
विगत की स्मृति

बार बार साबुन से धुले खुरदरे 
ठंड में ठिठुरते हाथों को
नर्म और गर्म हथेलियों का संपुट
जिनकी यादें रच गई हो रेखाओं में

ये शब्द उन एक जोड़ी आंखों के लिए
जो देखती है डूबकर सुकून में
एकटक तुम्हारी ओर

सेनेटाइजर की शीशी के अलावा भी
कोई था जिसने इंतजार किया
तुम्हारा घर में कदम रखने का

ये शब्द उस शह के लिए
जिसने नहीं होने दिया दिल को दूर
दो गज की दूरी के बावजूद

यह प्यार उस कप के नाम
साल की आखिरी शाम
जो ख़त्म किया गया था

कि वक्त थम जाए
ओल्ड लैंग साइन को 
ऐसे ही गाया होगा किसी ने

पहली बार 
उंगलियां उलझाकर 
दिसंबर के अंतिम छोर पर

- नीलू शेखावत

शेयर करें: