जयपुर में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, निकाय चुनावों का शंखनाद: राजस्थान: जयपुर में कांग्रेस का पंचायती राज सशक्तिकरण सम्मेलन, आगामी स्थानीय चुनावों के लिए कसी कमर

राजस्थान: जयपुर में कांग्रेस का पंचायती राज सशक्तिकरण सम्मेलन, आगामी स्थानीय चुनावों के लिए कसी कमर
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Highlights

  • बिरला ऑडिटोरियम में कांग्रेस का बड़ा सम्मेलन
  • आगामी पंचायत और निकाय चुनावों पर फोकस
  • मनरेगा संघर्ष को चुनावी मुद्दा बनाएगी पार्टी
  • शीर्ष नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं को दिया जीत का मंत्र।

JAIPUR | राजस्थान की राजनीति में आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। राजधानी जयपुर के बिरला ऑडिटोरियम में कांग्रेस पार्टी द्वारा 'पंचायती राज सशक्तिकरण सम्मेलन' का आयोजन किया जा रहा है। दोपहर 12 बजे से शुरू हुए इस सम्मेलन को आगामी पंचायत और निकाय चुनावों में जीत के शंखनाद के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी के इस बड़े आयोजन में प्रदेश भर से हजारों कार्यकर्ता और नेता जुटे हैं।

इस सम्मेलन का प्राथमिक उद्देश्य जमीनी स्तर पर पार्टी संगठन को अभेद्य और सुदृढ़ करना है। कांग्रेस इस बार 'माइक्रो-लेवल मैनेजमेंट' पर विशेष ध्यान दे रही है। सम्मेलन के दौरान इस रणनीति पर विस्तृत मंथन किया जा रहा है कि किस प्रकार प्रत्येक बूथ और वार्ड स्तर पर पार्टी की पकड़ को मजबूत बनाया जाए। संगठन के पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे जनता के बीच जाकर सरकारी विफलताओं को उजागर करें।

कांग्रेस की इस नई रणनीति के केंद्र में 'मनरेगा संघर्ष' को रखा गया है। पार्टी की योजना है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के माध्यम से आम जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़ी जाए और इसे आगामी स्थानीय चुनावों के मुख्य मुद्दे के रूप में पेश किया जाए। पार्टी का मानना है कि यह रणनीति न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल प्रदान करेगी, बल्कि मतदाताओं के बीच कांग्रेस की साख को भी नया विस्तार देगी।

सम्मेलन में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित कई दिग्गज नेता मंच साझा कर रहे हैं। ये नेता कार्यकर्ताओं को संबोधित कर चुनावी बिसात बिछाने का मंत्र दे रहे हैं। सम्मेलन में आए पंचायती राज जनप्रतिनिधियों और संभावित प्रत्याशियों में भारी जोश देखा जा रहा है, जो भविष्य की चुनावी चुनौतियों के लिए तैयार हैं। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि सत्ता की असली ताकत पंचायतों और निकायों से होकर गुजरती है, इसलिए कांग्रेस इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।

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