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- खेजड़ी की अवैध कटाई होगी गैर-जमानती अपराध; 70 वर्षों का इंतज़ार हुआ खत्म; एक पेड़ के बदले लगाने होंगे 10 पौधे; सोलर प्रोजेक्ट्स और पर्यावरण में बनेगा संतुलन।
जयपुर | राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान और मरुस्थल की जीवनरेखा माने जाने वाले 'खेजड़ी' वृक्ष को अब कानूनी कवच मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्थान विधानसभा में एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए स्पष्ट किया है कि प्रदेश में खेजड़ी की कटाई को रोकने और इसके सर्वांगीण संरक्षण के लिए राज्य सरकार एक विशेष 'खेजड़ी संरक्षण कानून' (Khejri Conservation Law) लेकर आएगी। इस निर्णय से पर्यावरण प्रेमियों और विशेषकर बिश्नोई समाज में हर्ष व्याप्त है।
70 वर्षों का लंबा इंतज़ार हुआ समाप्त
मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित एक विशेष अभिनंदन समारोह में विभिन्न पीठों के संतों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। मुकाम पीठाधीश्वर श्री रामानन्द जी महाराज ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आजादी के बाद यह पहला अवसर है जब किसी सरकार ने खेजड़ी की रक्षा के लिए इतना ठोस कदम उठाया है। उन्होंने बताया कि समाज पिछले 70 वर्षों से इस तरह के सुरक्षात्मक कानून की मांग कर रहा था। मुख्यमंत्री ने अगस्त 2025 में किए गए अपने वादे को 5 फरवरी 2026 को विधानसभा में आधिकारिक घोषणा के साथ पूरा कर अपनी प्रतिबद्धता सिद्ध की है।
जम्भेश्वर जी और अमृता देवी के आदर्शों पर सरकार
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि उनकी सरकार भगवान जम्भेश्वर जी के 29 नियमों और माँ अमृता देवी के महान बलिदान से प्रेरणा लेती है। उन्होंने 'जीव दया पालनी, रुख लीलौ नहीं घावै' के मंत्र को अपनी नीति का आधार बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के तहत राजस्थान अगले 5 वर्षों में 50 करोड़ पौधे लगाने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि नए कानून का मसौदा संतों और पर्यावरण विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया जा रहा है।
प्रस्तावित कानून के कड़े प्रावधान
सूत्रों के अनुसार, आगामी खेजड़ी संरक्षण कानून में निम्नलिखित सख्त प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं:
- गैर-जमानती अपराध: खेजड़ी की अवैध कटाई को गंभीर श्रेणी में रखते हुए इसे गैर-जमानती अपराध बनाया जा सकता है।
- भारी जुर्माना: वर्तमान में लागू जुर्माने की राशि को 10 गुना तक बढ़ाने का प्रस्ताव है।
- अनिवार्य प्रतिपूरक वृक्षारोपण: यदि किसी सरकारी या आवश्यक परियोजना के लिए पेड़ काटना अनिवार्य हो, तो संबंधित एजेंसी को एक पेड़ के बदले 10 नए खेजड़ी के पौधे लगाने होंगे और उनके जीवित रहने की जिम्मेदारी भी लेनी होगी।
विकास और विरासत के बीच संतुलन
हाल के समय में ओसियां और बीकानेर जैसे क्षेत्रों में सोलर प्लांट परियोजनाओं के कारण खेजड़ी की कटाई का मुद्दा गरमाया था, जिसके विरोध में 'खेजड़ी बचाओ आंदोलन' चलाया गया। मुख्यमंत्री की इस घोषणा को विकास (सौर ऊर्जा) और विरासत (पर्यावरण) के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
इस अवसर पर उद्योग मंत्री के.के. विश्नोई और जीव जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष जसवंत बिश्नोई सहित बालोतरा, बाड़मेर, नागौर और जोधपुर के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने इस कानून को राजस्थान के पारिस्थितिक तंत्र के लिए 'संजीवनी' करार दिया है।
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