Highlights
- राजस्थान के सात प्रमुख शहरों में रात का तापमान पांच डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया है।
- मौसम विभाग ने आगामी बहत्तर घंटों के लिए शीतलहर और घने कोहरे का ट्रिपल अलर्ट जारी किया है।
- सीकर और झुंझुनूं में कड़ाके की ठंड के कारण पाला जमने जैसी स्थिति देखी गई है।
- माउंट आबू में लगातार तीसरे दिन भयंकर सर्दी रही और तापमान में भारी गिरावट आई है।
जयपुर | राजस्थान में कड़ाके की ठंड ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया है और पूरा प्रदेश इस समय भीषण शीतलहर की चपेट में है। मौसम विभाग ने आगामी तीन दिनों के लिए राज्य के कई जिलों में ट्रिपल अलर्ट जारी किया है।
राज्य के सात प्रमुख शहरों में न्यूनतम तापमान पांच डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया है जिससे ठिठुरन काफी बढ़ गई है। माउंट आबू में लगातार तीसरे दिन तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है जिससे वहां जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ है।
सीकर और झुंझुनूं जैसे जिलों में पाला जमने के हालात पैदा हो गए हैं और सुबह के समय खेतों में बर्फ देखी जा रही है। खुले मैदानों और गाड़ियों की छतों पर बर्फ की सफेद चादर बिछी हुई नजर आ रही है।
तापमान और मौसम का हाल
मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पिछले चौबीस घंटों में न्यूनतम तापमान में पांच डिग्री तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। राज्य के कई हिस्सों में घने कोहरे के कारण दृश्यता बहुत कम हो गई है जिससे यातायात प्रभावित हुआ है।
सड़कों पर वाहनों की रफ्तार थम गई है और लोग सुबह के समय हेडलाइट जलाकर चलने को मजबूर हैं। प्रशासन ने बढ़ती ठंड को देखते हुए कई जिलों में स्कूली बच्चों की छुट्टी के आदेश भी जारी कर दिए हैं।
ग्रामीण इलाकों में सुबह के समय विजिबिलिटी शून्य के करीब पहुंच गई थी जिससे जनजीवन थम सा गया है। वाहन चालकों को सुबह दस बजे तक बहुत ही धीमी गति में सफर करना पड़ रहा है।
तापमान में भारी गिरावट
मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को राज्य में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहा लेकिन शीतलहर ने लोगों को बेहाल कर दिया। अधिकांश स्थानों पर अधिकतम तापमान सामान्य से दो से आठ डिग्री नीचे दर्ज किया गया है।
राज्य में सबसे कम अधिकतम तापमान कोटा में मात्र तेरह दशमलव तीन डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। यह तापमान सामान्य से आठ दशमलव आठ डिग्री नीचे है जो कड़ाके की ठंड को दर्शाता है।
वहीं राज्य में सर्वाधिक अधिकतम तापमान बाड़मेर में छब्बीस दशमलव चार डिग्री सेल्सियस रहा है। न्यूनतम तापमान की बात करें तो वनस्थली में यह चार दशमलव एक डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है।
मौसम विभाग का ट्रिपल अलर्ट
मौसम विभाग ने छह दिसंबर को अलवर और बारां सहित बीस जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। इसमें भरतपुर और बूंदी के साथ धौलपुर और झालावाड़ जैसे जिले भी शामिल किए गए हैं।
सात दिसंबर को भी प्रदेश के उन्नीस जिलों में शीतलहर और शीतदिन की स्थिति बनी रहने की संभावना जताई गई है। झुंझुनूं और सीकर जैसे क्षेत्रों में ठंड का असर सबसे अधिक रहने की उम्मीद है।
आठ दिसंबर को भी विभाग ने बीकानेर और हनुमानगढ़ सहित अठारह जिलों के लिए चेतावनी जारी की है। इन क्षेत्रों में सुबह के समय घना कोहरा छाए रहने की प्रबल संभावना है।
जनजीवन पर ठंड का प्रभाव
कड़ाके की ठंड के कारण ग्रामीण इलाकों में लोग सुबह और शाम को अलाव जलाकर बैठने को मजबूर हैं। पशुपालकों को भी अपने मवेशियों को ठंड से बचाने के लिए विशेष प्रबंध करने पड़ रहे हैं।
शहरी इलाकों में भी सुबह के समय बाजारों में सन्नाटा पसरा रहता है और लोग घरों में ही रहना पसंद कर रहे हैं। ठंड की वजह से ट्रेन और बस सेवाओं पर भी बुरा असर पड़ा है।
कई लंबी दूरी की ट्रेनें अपने निर्धारित समय से काफी देरी से चल रही हैं जिससे यात्रियों को परेशानी हो रही है। हवाई सेवाओं पर भी कोहरे का असर देखा जा रहा है।
कृषि और स्वास्थ्य पर असर
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को फसलों को पाले से बचाने के लिए हल्की सिंचाई करने की सलाह दी है। विशेषकर सरसों और चने की फसल को इस मौसम में नुकसान होने की संभावना रहती है।
चिकित्सकों ने इस कड़ाके की ठंड में बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की अपील की है। हृदय रोगियों के लिए यह मौसम काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
लोगों को सलाह दी गई है कि वे पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें और अपने शरीर को पूरी तरह ढक कर रखें। सुबह के समय सैर पर जाने वाले लोगों को भी सावधानी बरतने को कहा गया है।
आगामी दिनों का पूर्वानुमान
मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार आने वाले एक सप्ताह तक ठंड से राहत मिलने की उम्मीद बहुत कम है। उत्तर भारत से आ रही ठंडी हवाओं ने राजस्थान के मैदानी इलाकों में ठिठुरन बढ़ा दी है।
तापमान में एक से दो डिग्री की और गिरावट होने की संभावना मौसम विभाग द्वारा जताई गई है। ऐसे में शीतलहर का प्रकोप अभी और बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं।
राज्य सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों को स्थिति पर नजर रखने और रैन बसेरों में उचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग भी इस स्थिति को लेकर पूरी तरह सक्रिय है।
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