Jaipur/Rajasthan
आलाकमान से सुलह का रास्ता: गुलाब चंद्र कटारिया से राजे की मुलाकात, क्या दिला पाएगी अपनों को टिकट
The 2023 Rajasthan election season has witnessed significant developments as rumors circulate about a potential reconciliation between the BJP high command and the prominent political figure, Vasundhara Raje.
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राजस्थान विधानसभा चुनावों की तारीख का ऐलान होने के साथ ही अब राजनीतिक दलों में टिकट की दावेदारी को लेकर कवायद शुरु हो गई है। बीजेपी ने राजस्थान में 41 नामों वाली अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है इसी के साथ कई बड़ी जगहों पर पार्टी के अंदर ही घमासान शुरु हो गया है।
वहीं पहली लिस्ट से वसुंधरा राजे का नाम किनारे करने के बाद से ही वसुंधरा खेमे में विरोध के सुर बढ़ रहे थे, लेकिन अब खबर है कि वसुंधरा राजे सिंधिया और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने समझौतों की राह पर आगे बढ़ना शुरू कर दिया है।
असम के राज्यपाल गुलाब चंद्र कटारिया से दो दिन पूर्व हुई वसुंधरा की मुलाकात के बाद ही इस बात की अटकलें लगाई जा रही थीं कि उन्होंने कटारिया के माध्यम से अपनी चिंताओं को केंद्र तक पहुंचा दिया है। केंद्र ने भी उनकी चिंताओं का उचित समाधान करने का आश्वासन दिया है।
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इसके बाद अब कहा जा सकता है कि भाजपा की एक बड़ी परेशानी टलती दिखाई पड़ रही है। हालांकि, कहा यह भी जा रहा है कि इसके बावजूद वसुंधरा के कुछ करीबियों को टिकट के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। इसकी वजह है कि भाजपा अभी भी कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं है। राजस्थान में 25 नवंबर को मतदान होगा।
आपको बतादें, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा बुधवार को राजस्थान के कोटा पहुंचे। यहां उनका स्वागत करने के लिए पार्टी के राजस्थान के सभी शीर्ष नेता उपस्थित थे। लेकिन इस टीम में वसुंधरा राजे सिंधिया का चेहरा शामिल नहीं था, लेकिन झालावाड़ से सांसद उनके बेटे दुष्यंत सिंह नड्डा का स्वागत करने वालों में शामिल थे।
जब से भाजपा ने यात्राओं के जरिए राजस्थान में अपनी हवा बनाने की मुहिम शुरू की है, तब से यह क्रम लगातार बना हुआ है। यहां भी वही क्रम देखा गया। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पार्टी अध्यक्ष ने यहां पार्टी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा की।
भाजपा सूत्रों के अनुसार, इस बार पार्टी चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है। इसलिए टिकट बांटते समय केवल जीत के फैक्टर पर ध्यान दिया जा रहा है।
इसके लिए बीजेपी के आंतरिक सर्वे और आरएसएस से मिले फीडबैक को भी आधार बनाया गया है। चुनाव क्षेत्र का जातीय अंकगणित भी उम्मीदवारों का नाम तय करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
मालूम हो, मुख्यमंत्री पद पर वसुंधरा राजे अपना दावा ठोंक रही थीं, लेकिन पार्टी ने इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर चुनाव में जाने का निर्णय किया। लेकिन इसके बाद से ही राजे नाराज बताई जा रही हैं। हालांकि बीजेपी की दूसरी लिस्ट आनी अभी बाकि है इसके बाद ही पता चलेगा राजे स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेंगी या पार्टी में उन्हें कोई अहम जिम्मेवारी मिलती है।
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