Highlights
- कोटा कंज्यूमर कोर्ट ने सलमान खान को 20 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।
- अदालत ने सलमान खान के हस्ताक्षरों की फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी से जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
- याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि वकालतनामे पर किए गए हस्ताक्षर सलमान खान के असली हस्ताक्षर नहीं हैं।
- यह मामला राजश्री पान मसाला के भ्रामक विज्ञापन और स्वास्थ्य पर इसके प्रतिकूल प्रभावों से जुड़ा है।
कोटा | बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। राजस्थान के कोटा जिले की कंज्यूमर कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में सलमान खान को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का कड़ा आदेश जारी किया है। यह मामला राजश्री पान मसाला के विज्ञापन से जुड़ा है जिसमें भ्रामक जानकारी देने का आरोप लगाया गया है। अब कोर्ट ने इस मामले में सलमान खान के हस्ताक्षरों की फोरेंसिक जांच कराने का भी फैसला लिया है जिससे कानूनी पेचिदागियां और बढ़ गई हैं।
हस्ताक्षर पर विवाद और फोरेंसिक जांच
कोटा कंज्यूमर कोर्ट में चल रही इस सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और भाजपा नेता एडवोकेट इंद्रमोहन सिंह हनी ने एक गंभीर आपत्ति दर्ज कराई थी। उन्होंने अदालत को बताया कि सलमान खान की ओर से पेश किए गए वकालतनामे और अन्य दस्तावेजों पर जो हस्ताक्षर किए गए हैं वे संदिग्ध प्रतीत होते हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार यह हस्ताक्षर सलमान खान के उन हस्ताक्षरों से मेल नहीं खाते हैं जो उन्होंने पूर्व में जोधपुर जेल या वहां की अन्य अदालतों में दस्तावेजों पर किए थे।
इस आपत्ति को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की प्रासंगिक धाराओं और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 73 के तहत जांच के आदेश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इन हस्ताक्षरों की जांच राज्य की अधिकृत एजेंसी या फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी द्वारा की जाएगी। इसके लिए सलमान खान को 20 जनवरी को अपने मूल दस्तावेजों के साथ कोर्ट में उपस्थित रहना होगा ताकि हस्ताक्षरों का मिलान विशेषज्ञों की उपस्थिति में किया जा सके।
कोर्ट का सख्त रुख और एडवोकेट को भी समन
केवल सलमान खान ही नहीं बल्कि कोर्ट ने उस एडवोकेट को भी तलब किया है जिन्होंने इन दस्तावेजों पर नोटरी की थी। एडवोकेट आरसी चौबे को भी सलमान खान के साथ 20 जनवरी को अदालत में पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट यह सुनिश्चित करना चाहता है कि कानूनी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या गलत जानकारी का सहारा न लिया गया हो। यदि हस्ताक्षरों में विसंगति पाई जाती है तो यह कोर्ट की अवमानना और धोखाधड़ी का गंभीर मामला बन सकता है।
याचिकाकर्ता इंद्रमोहन सिंह हनी ने कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सलमान खान की ओर से पेश किए गए जवाब और वकालतनामे में जो हस्ताक्षर हैं वे पूरी तरह से अलग दिखते हैं। हमने इसी आधार पर आपत्ति जताई थी और मांग की थी कि निष्पक्ष जांच के लिए सलमान खान को खुद कोर्ट में आकर अपनी पहचान और हस्ताक्षरों की पुष्टि करनी चाहिए। कानून सबके लिए बराबर है और किसी भी सेलिब्रिटी को इससे छूट नहीं मिलनी चाहिए।
भ्रामक विज्ञापन का मुख्य विवाद
यह पूरा विवाद पिछले साल 3 नवंबर को शुरू हुआ था जब कोटा कंज्यूमर कोर्ट ने सलमान खान और राजश्री पान मसाला कंपनी को एक नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। एडवोकेट इंद्रमोहन सिंह हनी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि कंपनी केसर युक्त इलायची के नाम पर जनता को गुमराह कर रही है। याचिका में कहा गया है कि मात्र 5 रुपये के पाउच में असली केसर देना संभव नहीं है और यह केवल एक भ्रामक प्रचार है जो युवाओं को गलत दिशा में ले जा रहा है।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि इस तरह के विज्ञापनों से युवा पीढ़ी पान मसाला और तंबाकू जैसे हानिकारक उत्पादों की ओर आकर्षित हो रही है। इससे कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने मांग की है कि ऐसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों के प्रचार पर पूरी तरह से रोक लगाई जानी चाहिए। इसके साथ ही याचिका में सलमान खान को मिले राष्ट्रीय पुरस्कारों को भी वापस लेने की मांग की गई है क्योंकि वे समाज में एक गलत उदाहरण पेश कर रहे हैं।
सलमान खान के कानूनी दल की दलीलें
दूसरी ओर सलमान खान के कानूनी दल ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कोर्ट में पेश किए गए जवाब में सलमान के वकील ने तर्क दिया था कि यह शिकायत खारिज करने योग्य है। उनके अनुसार उपभोक्ता संरक्षण मामलों में कार्रवाई करने का अधिकार केवल सीसीपीए के पास है और स्थानीय स्तर पर इस तरह की याचिकाएं सुनवाई के योग्य नहीं हैं। उन्होंने इसे केवल पब्लिसिटी स्टंट करार दिया है।
सलमान खान की टीम ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे जिस उत्पाद का विज्ञापन कर रहे हैं वह केसर युक्त पान मसाला नहीं बल्कि सिल्वर कोटेड इलायची है। उन्होंने दावा किया कि शिकायतकर्ता गलत तथ्यों के आधार पर कोर्ट को गुमराह कर रहा है। 9 दिसंबर को पेश किए गए एक अन्य जवाब में सलमान खान के वकील ने कहा था कि वकालतनामे पर सलमान के ही हस्ताक्षर हैं और वे उनके पैन कार्ड और पासपोर्ट पर मौजूद हस्ताक्षरों के समान हैं। अब फोरेंसिक रिपोर्ट ही इस सच्चाई का फैसला करेगी।
कानूनी प्रक्रिया और सेलिब्रिटी जिम्मेदारी
अदालत ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 38 का उल्लेख किया है जो कोर्ट को साक्ष्य की जांच और विशेषज्ञों की राय लेने का अधिकार देती है। यह कानूनी प्रावधान सुनिश्चित करते हैं कि अदालत के सामने पेश किया गया हर दस्तावेज प्रामाणिक हो। कोटा की इस अदालत का फैसला आने वाले समय में सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट और विज्ञापनों की सत्यता के लिए एक मिसाल बन सकता है। सेलिब्रिटीज पर यह भारी जिम्मेदारी होती है कि वे जिस उत्पाद का प्रचार कर रहे हैं उसके बारे में सही जानकारी जनता तक पहुंचाएं।
20 जनवरी को होने वाली व्यक्तिगत पेशी के दौरान सलमान खान को कोर्ट के कई कड़े सवालों का सामना करना पड़ सकता है। यदि फोरेंसिक जांच में हस्ताक्षरों में विसंगति पाई जाती है तो यह मामला एक नया मोड़ ले सकता है। फिलहाल कोटा की जनता और सलमान खान के प्रशंसकों की नजरें इस महत्वपूर्ण सुनवाई पर टिकी हुई हैं। यह मामला बॉलीवुड और विज्ञापन जगत में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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