अजमेर/सरवाड़. मंगलवार को सरवाड़ में वीर दुर्गादास राठौड़ (Veer Durgadas Rathore) जयंती समारोह (Jayanti Samaroh) आयोजित हुआ. शक्ति सिंह बांदीकुई (Shakti Singh Bandikui) ने साहस और त्याग का संदेश दिया.
सरवाड़ में दुर्गादास जयंती: वीर दुर्गादास जयंती समारोह, वीरता और त्याग का संदेश
अजमेर/सरवाड़. मंगलवार को सरवाड़ में वीर दुर्गादास राठौड़ (Veer Durgadas Rathore) जयंती समारोह (Jayanti Samaroh) आयोजित हुआ. शक्ति सिंह बांदीकुई (Shakti Singh Ba
HIGHLIGHTS
- सरवाड़ में वीर दुर्गादास राठौड़ जयंती समारोह आयोजित हुआ.
- शक्ति सिंह बांदीकुई ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया.
- उन्होंने साहस, कर्तव्यनिष्ठा और त्याग का संदेश दिया.
- कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां और समुदाय के लोग उपस्थित रहे.
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नेतृत्व की सच्ची परिभाषा
शक्ति सिंह बांदीकुई ने नेतृत्व को एक बड़ी जिम्मेदारी बताया.यह किसी पद से कहीं बढ़कर है. इसमें गहन कर्तव्यनिष्ठा शामिल होती है.
सम्मान और सत्य की महत्ता
उन्होंने सम्मान और सत्य की रक्षा पर जोर दिया. इसे हर कीमत पर बनाए रखना चाहिए.
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समाज के लिए त्याग ही सच्चा पराक्रम है. यह सच्ची कर्तव्यपरायणता दर्शाता है.
दुर्गादास का जीवन इसका उत्कृष्ट उदाहरण है. हमें उनके आदर्शों का पालन करना चाहिए.

इतिहास, एकता और अधिकारों का संकल्प
सरवाड़ की पावन भूमि से एक महत्वपूर्ण संकल्प लिया गया. यह इतिहास की रक्षा के लिए था.
समाज की एकता बनाए रखने पर विशेष बल दिया गया. समान अधिकारों के लिए आवाज उठाने को कहा गया.
यह संदेश सभी उपस्थित लोगों को प्रेरित करेगा. इससे एक मजबूत समाज का निर्माण होगा.
समारोह में गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
अजमेर जिलाप्रमुख सुशील कंवर पलाड़ा कार्यक्रम में थीं. विधायक शत्रुघ्न गौतम भी शामिल हुए.
केकड़ी प्रधान होनहार सिंह ने भी शिरकत की. अजमेर राजपूत सभा अध्यक्ष महेंद्र सिंह भी आए.
कर्नल रघुबीर सिंह ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. भंवर सिंह खिरिया भी वहां उपस्थित थे.
इन प्रमुख हस्तियों ने आयोजन की शोभा बढ़ाई. उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को गरिमा दी.
सैकड़ों क्षत्राणियां और सिरदार भी पधारे थे. सभी ने मिलकर समारोह को सफल बनाया.
युवा पीढ़ी को प्रेरणा और मार्गदर्शन
समारोह में मारवाड़ की वीर परंपरा पर चर्चा हुई. समाज की एकता पर भी विचार-विमर्श हुआ.
स्थानीय समुदाय ने इस आयोजन की सराहना की. इसे युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा बताया.
वीर दुर्गादास राठौड़ के अद्वितीय योगदान को याद किया गया. उनके जीवन से सीख लेने को कहा गया.
यह समारोह एक महत्वपूर्ण अवसर था. इसने नई ऊर्जा का संचार किया.
युवाओं को अपने इतिहास पर गर्व करना सिखाया गया. उन्हें भविष्य के लिए तैयार किया गया.
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