चांदी और सोने की कीमतों में ऐतिहासिक महाक्रैश: ₹1.10 लाख गिरकर ₹2.91 लाख पर आई: सोना 20 हजार रुपए सस्ता, जानें बाजार में मचे हड़कंप की बड़ी वजहें

₹1.10 लाख गिरकर ₹2.91 लाख पर आई: सोना 20 हजार रुपए सस्ता, जानें बाजार में मचे हड़कंप की बड़ी वजहें
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Highlights

Silver down 27 percent on MCX, Gold down 12 percent, CME increased margin money on precious metals, Massive profit booking triggered the crash.

नई दिल्ली | भारतीय कमोडिटी बाजार के इतिहास में 30 जनवरी का दिन एक बड़े ब्लैक फ्राइडे के रूप में दर्ज किया गया, जब सोने और चांदी की कीमतों में अप्रत्याशित और ऐतिहासिक क्रैश देखा गया। पिछले कई हफ्तों से लगातार बढ़ रही कीमतों पर अचानक ब्रेक लगा और मुनाफावसूली के भारी दबाव के चलते मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमत में 1.10 लाख रुपए यानी लगभग 27% की भारी गिरावट आई। सोने की कीमतों में भी करीब 20 हजार रुपए की कमी दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के अरबों रुपए स्वाहा हो गए। बाजार में आई इस सुनामी ने न केवल बड़े ट्रेडर्स बल्कि आम निवेशकों को भी सोच में डाल दिया है।

चांदी और सोने की कीमतों में भारी उथल-पुथल


एमसीएक्स पर चांदी की कीमतें जो पिछले कारोबारी सत्र में 4.01 लाख रुपए प्रति किलो के सर्वकालिक उच्च स्तर के करीब थीं, वह शुक्रवार को औंधे मुंह गिरकर 2.91 लाख रुपए पर आ गईं। एक ही दिन में 1.10 लाख रुपए की यह गिरावट बाजार की अस्थिरता को दर्शाती है। इसी तरह, 10 ग्राम सोने का भाव जो 29 जनवरी को 1.69 लाख रुपए पर था, वह 12% गिरकर 1.49 लाख रुपए के स्तर पर आ गया। सोने और चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) में भी निवेशकों ने भारी बिकवाली की, जिससे इनमें 23% तक की गिरावट दर्ज की गई।

बाजार क्रैश होने के प्रमुख तकनीकी कारण


बाजार के जानकारों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई जटिल कारण हैं। सबसे प्रमुख वजह 'प्रॉफिट बुकिंग' रही। जब कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचीं, तो बड़े फंड हाउस और संस्थागत निवेशकों ने बिकवाली शुरू कर दी। दूसरा महत्वपूर्ण कारण वैश्विक स्तर पर 'मार्जिन मनी' में की गई वृद्धि है। शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज (CME) ने हाल ही में चांदी पर मार्जिन मनी को 11% से बढ़ाकर 15% और सोने पर 6% से बढ़ाकर 8% कर दिया है। कमोडिटी ट्रेडिंग में मार्जिन वह राशि होती है जो ट्रेडर्स को सिक्योरिटी के तौर पर जमा करनी पड़ती है। मार्जिन बढ़ने का सीधा मतलब है कि ट्रेडर्स को अब अपनी पोजीशन बनाए रखने के लिए अधिक नकदी की आवश्यकता होगी। जिन ट्रेडर्स के पास अतिरिक्त फंड नहीं था, उन्हें मजबूरी में अपनी होल्डिंग बेचनी पड़ी, जिससे बाजार में 'पैनिक सेलिंग' की स्थिति बन गई।

फिजिकल मार्केट बनाम वायदा बाजार


इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सर्राफा बाजार में भी कीमतें गिरी हैं, लेकिन वायदा बाजार की तुलना में यहां गिरावट थोड़ी धीमी रही। सर्राफा बाजार में चांदी 40,638 रुपए प्रति किलो सस्ती हुई, जबकि 24 कैरेट सोना 9,545 रुपए प्रति 10 ग्राम सस्ता हुआ। इसका मुख्य कारण यह है कि सर्राफा बाजार शाम 5 बजे बंद हो जाता है, जबकि एमसीएक्स रात 12 बजे तक चालू रहता है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में होने वाली हर हलचल का सीधा असर वायदा बाजार पर पड़ता है, जहां शेयर बाजार की तरह हर सेकंड बोलियां लगती हैं, जिससे दाम लगातार ऊपर-नीचे होते रहते हैं। फिजिकल डिमांड में कमी ने भी कीमतों को नीचे धकेलने का काम किया है।

खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण सावधानियां


कीमतों में आई इस भारी गिरावट के बाद ज्वेलरी मार्केट में ग्राहकों की भीड़ बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, विशेषज्ञों ने खरीदारों को दो प्रमुख सलाह दी हैं। पहली, हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। यह सोने की शुद्धता की गारंटी देता है और भविष्य में इसे बेचने पर सही मूल्य सुनिश्चित करता है। दूसरी, खरीदारी से पहले कीमतों को कई विश्वसनीय स्रोतों से क्रॉस-चेक जरूर करें, क्योंकि 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के भाव अलग-अलग होते हैं।

असली चांदी की पहचान कैसे करें?


नकली चांदी से बचने के लिए ग्राहक कुछ सरल टेस्ट कर सकते हैं। 'मैग्नेट टेस्ट' के जरिए यह देखा जा सकता है कि चांदी चुंबक से चिपकती है या नहीं; असली चांदी कभी नहीं चिपकेगी। 'आइस टेस्ट' में चांदी पर बर्फ रखने से वह बहुत तेजी से पिघलती है क्योंकि चांदी ऊष्मा की बहुत अच्छी सुचालक होती है। इसके अलावा, 'स्मेल टेस्ट' और 'क्लॉथ टेस्ट' के जरिए भी शुद्धता की पहचान की जा सकती है। यदि चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ने पर उस पर काला निशान उभर आता है, तो वह शुद्ध मानी जाती है। बाजार में चल रही इस उठापटक के बीच निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी बड़े निवेश से पहले वित्तीय विशेषज्ञों की राय अवश्य लें।

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