Highlights
- राज्य मंत्री ओटाराम देवासी का खनन परियोजना पर चर्चा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल।
- पिंडवाड़ा क्षेत्र के 12 गांवों की जनता ने मंत्री को खुले संवाद की दी चुनौती।
- कमलेश मेटाकास्ट कंपनी के साथ 1700 करोड़ के एमओयू और भूमि अधिग्रहण पर उठे सवाल।
- आगामी 28 जनवरी को बड़े आंदोलन की तैयारी में जुटे ग्रामीण, भाजपा की बढ़ी मुश्किलें।
सिरोही | राजस्थान के सिरोही जिले में इन दिनों राजनीतिक पारा काफी चढ़ा हुआ है। राज्य मंत्री ओटाराम देवासी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वे कमलेश मेटाकास्ट खनन परियोजना के बारे में चर्चा करते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद पिंडवाड़ा क्षेत्र की जनता में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त हो गया है। वायरल वीडियो में सांसद, जिलाध्यक्ष और पिंडवाड़ा विधायक भी नजर आ रहे हैं जिससे विवाद और गहरा गया है। ग्रामीणों ने मंत्री के बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें सार्वजनिक मंच पर आकर जवाब देने की चुनौती दी है।
खनन परियोजना और ग्रामीणों के तीखे सवाल
क्षेत्र वासियों का कहना है कि यदि अरावली का कोई मसला नहीं है तो सुप्रीम कोर्ट इस मामले में स्वतः संज्ञान क्यों ले रहा है। रोहिड़ा, भारजा और वाटेरा जैसी पंचायतों के लोग अब जागरूक हो चुके हैं और वे सरकार के तर्कों से सहमत नहीं हैं। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि जमीन नहीं जा रही है तो पर्यावरणीय जनसुनवाई की पूरी प्रक्रिया क्यों शुरू की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री ने मध्यस्थता कर मुख्यमंत्री से मुलाकात तो करवाई लेकिन जब वार्ता विफल हुई तो मीडिया में यह कहने को कहा गया कि वार्ता सफल रही है।
प्रशासनिक रिपोर्ट और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप
ग्रामीणों ने पिंडवाड़ा एसडीएम की रिपोर्ट पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि प्रस्तावित खनन क्षेत्र में कोई कीमती पेड़ नहीं है और केवल कांटेदार झाड़ियां मौजूद हैं। इसके विपरीत लोगों का कहना है कि उनकी सिंचित जमीनों को कागजों में असिंचित बता दिया गया है। सरकार ने इस पर अब तक कोई ठोस एक्शन नहीं लिया है। कागजों में 598 घरों के विस्थापित होने की बात कही गई है लेकिन धरातल पर सच्चाई को छिपाया जा रहा है। पुलिस थाने में फर्जी सहमति पत्र तैयार करने की शिकायतें भी दर्ज कराई गई हैं लेकिन मामले की जांच ठंडे बस्ते में है।
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राजनीतिक समीकरण और आगामी चुनाव का डर
सिरोही जिले में भाजपा की वर्तमान स्थिति को लेकर भी सोशल मीडिया पर तीखी चर्चाएं हो रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जिले में कुछ नेता अवैध गतिविधियों और अवैध मिट्टी खनन को बढ़ावा देने में मस्त हैं। राम झरोखे जमीन विवाद और पिंडवाड़ा रेलवे जंक्शन का मुद्दा भी सरकार के लिए बड़ा सरदर्द बना हुआ है। आगामी पंचायती राज चुनावों को देखते हुए नेताओं में अपनी राजनीतिक जमीन खिसकने का भय साफ देखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि भाजपा को इस बार चुनावों में जनता के गुस्से का सामना करना पड़ेगा।
आगामी 28 जनवरी को बड़े आंदोलन की तैयारी
क्षेत्र की चार ग्राम पंचायतों और 12 गांवों की जनता अब पूरी तरह एकजुट हो गई है। आगामी 28 जनवरी को एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई है जिसे लेकर प्रशासन और सत्ताधारी दल में बोखलाहट साफ नजर आ रही है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी पुश्तैनी जमीन और पर्यावरण की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएंगे। राज्य सरकार द्वारा कमलेश मेटाकास्ट के साथ किए गए 1700 करोड़ के एमओयू को लेकर भी जनता के बीच भारी असंतोष है। मंत्री ओटाराम देवासी को दी गई खुली चुनौती ने इस पूरे विवाद को राजस्थान की राजनीति के केंद्र में ला दिया है।
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