Nitin gadkari : स्लीपर बसों के लिए नए सुरक्षा नियम: अब केवल मान्यता प्राप्त फैक्ट्रियों में ही होगा निर्माण

स्लीपर बसों के लिए नए सुरक्षा नियम: अब केवल मान्यता प्राप्त फैक्ट्रियों में ही होगा निर्माण
स्लीपर बसों के नए सुरक्षा नियम
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Highlights

  • स्लीपर बसों का निर्माण अब केवल मान्यता प्राप्त कारखानों और वाहन निर्माता कंपनियों में ही होगा।
  • बसों में फायर डिटेक्शन सिस्टम और ड्राइवर की थकान पहचानने वाले AI सेंसर अनिवार्य किए गए।
  • अवैध मॉडिफिकेशन और जुगाड़ के कारण होने वाले बस अग्निकांडों को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया।
  • नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों और बस बॉडी बिल्डरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश।

नई दिल्ली | देश में स्लीपर कोच बसों में बढ़ती आग की घटनाओं और पिछले छह महीनों में हुई 145 मौतों के बाद केंद्र सरकार ने बसों के निर्माण को लेकर सुरक्षा मानक पूरी तरह बदल दिए हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि अब स्लीपर बसों का निर्माण केवल मान्यता प्राप्त कारखानों और वाहन निर्माता कंपनियों में ही होगा।

इस नए फैसले का मुख्य उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना और अवैध तरीके से बसों के निर्माण पर रोक लगाना है। सरकार अब उन सभी छोटी वर्कशॉप्स पर शिकंजा कसेगी जो बिना किसी सुरक्षा मानक के बसों की बॉडी तैयार करती हैं।

जुगाड़ और अवैध मॉडिफिकेशन पर लगाम

हालिया जांचों में यह गंभीर तथ्य सामने आया है कि अधिकांश बस अग्निकांडों की असली वजह अवैध मॉडिफिकेशन और जुगाड़ तकनीक है। जैसलमेर बस अग्निकांड इसका सबसे बड़ा उदाहरण बना जहां 14 अक्टूबर को हुई दुर्घटना में 21 लोग जिंदा जल गए थे।

जांच में पाया गया कि जिस बस का पंजीकरण नॉन-एसी के रूप में हुआ था उसे बस मालिक ने नियमों के विरुद्ध एसी बस में तब्दील कर दिया था। इसी अवैध वायरिंग और ओवरलोड की वजह से शॉर्ट-सर्किट हुआ और मात्र 14 दिन पुरानी बस पूरी तरह जलकर खाक हो गई।

अनिवार्य तकनीकी मानक और AI सेंसर

नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया है कि अब हर स्लीपर बस में आधुनिक फायर डिटेक्शन सिस्टम का होना अनिवार्य है। इसके साथ ही ड्राइवर को नींद आने या थकान होने पर सतर्क करने वाला विशेष एआई सेंसर भी हर बस में लगाया जाएगा।

सुरक्षा के लिए हर कोच में हथौड़ा और आपातकालीन रोशनी के साथ स्पष्ट निकास द्वार होना भी जरूरी कर दिया गया है। इन तकनीकी मानकों के बिना अब किसी भी बस को फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाएगा।

अधिकारियों की जवाबदेही और सख्त कार्रवाई

जैसलमेर हादसे के बाद भ्रष्टाचार की जांच में कई प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई है। नियमों के उल्लंघन के बावजूद फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने के आरोप में चित्तौड़गढ़ के डीटीओ सुरेंद्र सिंह गहलोत को निलंबित कर दिया गया है।

गडकरी ने राजस्थान सरकार को पत्र लिखकर उन अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है जिन्होंने बस बॉडी बिल्डरों को सेल्फ-सर्टिफिकेशन की अनुमति दी थी। अब यात्रियों के लिए केवल प्रमाणित कारखानों में बनी बसें ही उपलब्ध होंगी जिससे तकनीकी खामियों का खतरा खत्म हो जाएगा।

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