राजस्थान दिवस: आज राजस्थान 75 को होयो 'आन-बान-शान वाळो आपणो राजस्थान'

आज राजस्थान 75 को होयो  'आन-बान-शान वाळो आपणो राजस्थान'
राजस्थान दिवस
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Highlights

राजस्थान का एकीकरण, 30 मार्च 1949 को पूरा हुआ था एकीकरण का यह काम, राजस्थान नाम देने के पीछे भी था एक बड़ा कारण, आजादी से पहले कई रियासतें और कई राजाओं का रहा शासन, वंशानुगत शासन के बाद जब देश में लोकतंत्र हुआ लागू, राजाओं के स्थान के चलते प्रदेश का नामकरण हुआ "राजस्थान", गौरव गाथाओं को समेटे क्षेत्रफल में राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य, लेकिन करोड़ों कंठों की राजस्थानी भाषा आज भी मान को मोहताज | 

जयपुर | राजस्थान आन-बान-शान से मना रहा अपना 75वां स्थापना दिवस, राजस्थानी भाषा के बिना राजस्थान दिवस का नहीं कोई औचित्य, राजस्थानी भाषा को विश्व की श्रेष्ठतम भाषाओं में माना गया, समृद्ध साहित्य, कई बोलियां, विशाल शब्दकोश पर भी नहीं सुनवाई, राजस्थानी को मान्यता का मुद्दा प्रदेश की अस्मिता से जुड़ा हुआ, लेकिन राजनीतिक उदासीनता के कारण मायड़ मान को मोहताज, विगत 80 वर्षों से राजस्थानी भाषा की मान्यता को लेकर कई आंदोलन, करोड़ों कंठों की राजस्थानी भाषा को प्रदेश के युवा भरने लगे हुंकार, अपनी मायड़ भाषा की मान्यता के लिए जोरशोर से छेड़ रखी मुहिम, आज भी राजस्थान दिवस के मौके पर सोशल मीडिया पर उठाई मांग

शौर्य, बलिदान, स्वाभिमान, सभ्यता, समृद्ध संस्कृति की धरती है राजस्थान, विभिन्न रियासतों के विलय के बाद 30 मार्च 1949 को हुई थी स्थापना, सबसे पहले अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली रियासतों का हुआ एकीकरण, बाद में इसमें जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर और बीकानेर की रियासतों का विलय, वैसे माना जाए तो कुल 7 चरण में हुआ

राजस्थान का एकीकरण, 30 मार्च 1949 को पूरा हुआ था एकीकरण का यह काम, राजस्थान नाम देने के पीछे भी था एक बड़ा कारण, आजादी से पहले कई रियासतें और कई राजाओं का रहा शासन, वंशानुगत शासन के बाद जब देश में लोकतंत्र हुआ लागू, राजाओं के स्थान के चलते प्रदेश का नामकरण हुआ "राजस्थान", गौरव गाथाओं को समेटे क्षेत्रफल में राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य, लेकिन करोड़ों कंठों की राजस्थानी भाषा आज भी मान को मोहताज | 

राज्यपाल कलराज मिश्र का विशेष लेख, कहा-'भक्ति और शक्ति की सांस्कृतिक धरा-राजस्थान, राजस्थान में स्वतंत्रता का बीज कभी मुरझाया नहीं, राजस्थान नाम ही मन में गौरव की अनुभूति कराने वाला है, साहित्य, कला और संस्कृति में भी बेहद संपन्न है, भौगोलिक परिस्थितियों में भी यहां के लोगों ने उत्सवधर्मिता का जीवन जिया है, यह दिवस सद्भाव की हमारी संस्कृति को सहेजने का है, आईए, हम सभी मिलकर प्रयास करें, राजस्थान आगे बढ़े और बढ़ता ही रहे, राजस्थान दिवस पर हम प्रदेश के चहुंमुखी विकास का संकल्प लेते हैं

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