झालावाड़ | राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे विधानसभा चुनावों से पहले पूरी तरह से एक्टिव नजर आ रही हैं।
चुनावों से पहले दौरे पर दौरा: पूर्व सीएम वसुंधरा राजे बोलीं- मुझे तो आना ही था, इस समाज की समधन जो हूं... और फिर.....
राजे ने कहा कि गुर्जर समाज के इस सम्मेलन में मुझे आना ही था, इस समाज की समधन जो हूं। उन्होंने आगे कहा कि न तो गुर्जर समाज मुझ से अलग हो सकता और न मैं उससे। हम एक दूजे के साथ मजबूत डोर से बंधे हुए हैं।
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- राजे ने कहा कि गुर्जर समाज के इस सम्मेलन में मुझे आना ही था, इस समाज की समधन जो हूं। उन्होंने आगे कहा कि न तो गुर्जर समाज मुझ से अलग हो सकता और न मैं उससे। हम एक दूजे के साथ मजबूत डोर से बंधे हुए हैं।
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राजे पिछले दो दिनों से झालावाड़ के दौरे पर है। इस दौरान उन्होंने कई बार लोगों के बीच जाकर कांग्रेस की गहलोत सरकार पर जमकर प्रहार किया है।
ऐसे में राजे शुक्रवार को गुर्जर समाज का समर्थन जुटाने के लिए उनके बीच पहुंची और कहा कि मैं तो गुर्जरों की समधन हूं यहां कैसे नहीं आती।
दरअसल, वसुंधरा राजे बीते दिन गुर्जर और गोस्वामी समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन में शिकरत करने पहुंची।
इस दौरान उन्होंने लोगों से कहा कि आज भी बच्चियों की पढ़ाई पर ध्यान नहीं दिया जाता है।
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ऐसे में आवश्यक है कि सामूहिक विवाह सम्मेलन जैसी अच्छी पहल के साथ समाज के लोग बालिका शिक्षा के लिए भी प्रोत्साहन शिविर लगाए।
झालावाड़ में आयोजित गुर्जर समाज के सामूहिक विवाह समारोह में पहुंचकर परिणय सूत्र में बंध रहे समस्त जोड़ों को बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी।
सामूहिक विवाह जैसी पहल समाज उत्थान की दिशा में सराहनीय कदम है। #MeraJhalawar #JaiJaiRajasthan pic.twitter.com/KIcppPjNmk
मुझे तो आना ही था, इस समाज की समधन जो हूं...
पूर्व मुख्यमंत्री राजे ने कहा कि गुर्जर समाज के इस सम्मेलन में मुझे आना ही था, इस समाज की समधन जो हूं।
उन्होंने आगे कहा कि न तो गुर्जर समाज मुझ से अलग हो सकता और न मैं उससे। हम एक दूजे के साथ मजबूत डोर से बंधे हुए हैं।
मैं तो 36 की 36 क़ौम को साथ लेकर चलती हूं। हमारे प्रधानमंत्री जी का मंत्र है सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास। हम इसे लेकर ही आगे बढ़ रहे हैं।
इसी के साथ उन्होंने कहा कि तीन दशक पहले जब वे हाड़ौती दौरे पर आई थी तब यहां के हालत कुछ अलग थे, लेकिन आज कुछ अलग अंदाज है।
उन्होंने कहा कि, इन दशकों में झालावाड़ कई बड़े परिवर्तनों का गवाह बना गया है।
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