Highlights
- अजमेर की मेलिरोन फार्मा कंपनी के डायरेक्टर से 1.11 करोड़ रुपये की बड़ी ठगी हुई।
- आरोपी ने 7 अफ्रीकी देशों में 11 दवाओं के रजिस्ट्रेशन का झांसा देकर पैसे हड़प लिए।
- पीड़ित ने सेनेगल की एक कंपनी के एजेंट पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया।
- पुलिस ने क्रिश्चियन गंज थाने में विदेशी एजेंट के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
अजमेर | राजस्थान के अजमेर शहर में एक प्रतिष्ठित दवा कंपनी के डायरेक्टर के साथ करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। यह पूरी ठगी सात अलग-अलग देशों में कंपनी के उत्पादों को रजिस्टर्ड कराने के बहाने की गई है।
धोखाधड़ी का पूरा मामला
पीड़ित दिनेश मुरजानी अजमेर की सागर विहार कॉलोनी में रहते हैं और एक दवा कंपनी के संचालक हैं। वह पंचशील इलाके में स्थित मेलिरोन फार्मा प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी में डायरेक्टर के पद पर तैनात हैं। दिनेश मुरजानी की कंपनी मुख्य रूप से दक्षिण अफ्रीका के विभिन्न देशों में जीवन रक्षक दवाओं की सप्लाई का काम करती है। अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार किसी भी देश में दवा भेजने से पहले वहां के स्थानीय प्रशासन से रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है।
विदेशी एजेंट से हुआ संपर्क
दवाओं के पंजीकरण की यह प्रक्रिया काफी जटिल होती है जिसे वहां की स्थानीय एजेंसियां ही पूरा करवाती हैं। पीड़ित ने बताया कि उन्हें अपनी कंपनी की 11 प्रमुख दवाओं का पंजीकरण सात अलग-अलग अफ्रीकी देशों में करवाना था। इन देशों में बुर्किना फासो, माली, नाइजर और कांगो ब्रजाविल जैसे राष्ट्र शामिल थे। इसके साथ ही आइवरी कोस्ट और सेनेगल में भी दवाओं के रजिस्ट्रेशन की योजना बनाई गई थी ताकि व्यापार का विस्तार किया जा सके। साल 2023 में दिनेश मुरजानी ने सेनेगल की एक कंपनी फार्मा डिस अफ्रीका के एजेंट सौलेमाने म्बेंगुए से संपर्क किया था। एजेंट ने उन्हें आश्वासन दिया था कि वह बहुत जल्द सभी देशों में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करवा देगा।
करोड़ों रुपये की हुई ठगी
एजेंट ने रजिस्ट्रेशन की फीस और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर पीड़ित से 105000 यूरो की मांग की थी। भारतीय मुद्रा के हिसाब से यह राशि लगभग 1 करोड़ 11 लाख 8 हजार 685 रुपये के करीब होती है। पीड़ित ने व्यापारिक संबंधों और भरोसे के आधार पर यह पूरी रकम बैंक के माध्यम से एजेंट को ट्रांसफर कर दी थी। हालांकि पैसे मिलने के बाद एजेंट के व्यवहार में अचानक बदलाव आने लगा और काम में देरी होने लगी।
18 महीने का लंबा इंतजार
पैसे देने के बाद पीड़ित लगातार एजेंट के संपर्क में रहे लेकिन 18 महीने बीत जाने के बाद भी एक भी रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ। एजेंट हर बार नया बहाना बनाकर समय मांगता रहा और अंत में उसने बातचीत करना बंद कर दिया। जब पीड़ित ने अपनी जमा पूंजी और यूरो वापस मांगे तो एजेंट ने पैसे लौटाने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद पीड़ित को अहसास हुआ कि उनके साथ बहुत बड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर की धोखाधड़ी की गई है।
पुलिस ने शुरू की जांच
परेशान होकर पीड़ित दिनेश मुरजानी ने अजमेर के क्रिश्चियन गंज थाने में आरोपी एजेंट के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत मुकदमा दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी अरविंद चारण ने बताया कि पुलिस बैंक खातों के विवरण और ईमेल पत्राचार की जांच कर रही है। इस मामले में साइबर सेल की भी मदद ली जा रही है ताकि विदेशी एजेंट तक पहुंचा जा सके। इस घटना के बाद अजमेर के व्यापारिक जगत में हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस ने व्यापारियों को सलाह दी है कि किसी भी विदेशी लेनदेन से पहले संबंधित व्यक्ति और कंपनी की पूरी जांच अवश्य करें। इस मामले में पुलिस अब यह भी देख रही है कि क्या इस एजेंट ने पहले भी किसी और कंपनी के साथ इसी तरह की ठगी की है। फिलहाल पुलिस की टीम तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है।
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