जयपुर | राजस्थान में भाजपा प्रत्याशियों की दो सूची निकले हुए कई दिन हो गए हैं, लेकिन टिकट कटने से नाराज हुए नेताओं और उनके समर्थकों के बगावती तेवर अभी तक शांत नहीं हुए हैं।
भाजपा की बढ़ी मुश्किलें: अशोक लाहोटी के समर्थन में उतरा वैश्य समाज, कहा- लाहोटी को टिकट नहीं तो भाजपा को वोट नहीं
सांगानेर विधानसभा सीट को भाजपा की अजय सीट माना जाता है। लेकिन इस बार पार्टी ने यहां से लाहोटी का टिकट साफ करते हुए भजन लाल शर्मा को चुनावी मैदान में उतार दिया है।
HIGHLIGHTS
- सांगानेर विधानसभा सीट को भाजपा की अजय सीट माना जाता है। लेकिन इस बार पार्टी ने यहां से लाहोटी का टिकट साफ करते हुए भजन लाल शर्मा को चुनावी मैदान में उतार दिया है।
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राजधानी जयपुर की सांगानेर सीट से भाजपा के मौजूदा विधायक अशोक लाहोटी (Ashok Lahoti) का टिकट कटने के बाद से उनके समर्थकों का विरोध लगातार जारी है।
सांगानेर विधानसभा सीट को भाजपा की अजय सीट माना जाता है। लेकिन इस बार पार्टी ने यहां से लाहोटी का टिकट साफ करते हुए भजन लाल शर्मा को चुनावी मैदान में उतार दिया है।
जिसके चलते लाहोटी के समर्थक और वैश्य समाज ने शुक्रवार को भाजपा मुख्यालय के बाहर मौन प्रदर्शन किया।
समाज के पदाधिकारियों ने आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी ने समाज की अनदेखी की है जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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वैश्य समाज ने चेतावनी दी है कि अगर समाज की बात को नहीं सुना गया तो भाजपा को इसका खमियाजा भुगतना होगा।
वैश्य समाज का कहना है कि पूरा समाज हमेशा से भाजपा के साथ रहा है, लेकिन वैश्य समाज की अनदेखी कर अशोक लाहोटी का टिकट काटना दुर्भाग्यपूर्ण है।
लाहोटी नहीं तो भाजपा को वोट नहीं
समाज ने पार्टी को साफ चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर लाहोटी के टिकट पर पुनः विचार नहीं किया गया तो उनका वोट भाजपा को नहीं जाएगा।
आपको बता दें कि इस बार भाजपा ने सांगानेर सीट पर उलटफेर करते हुए वर्तमान विधायक अशोक लाहोटी का टिकट काट दिया है और उनकी जगह भरतपुर निवासी पार्टी के महामंत्री भजन लाल शर्मा को चुनावी मैदान में उतारा है।
कैसा रहा था पिछले चुनाव का समीकरण ?
गौरतलब है कि पिछले साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अशोक लाहोटी को उम्मीदवार बनाया था।
जिसमें उन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी पुष्पेंद्र भारद्वाज को 35 हजार वोट से हराया था।
उस दौरान लाहोटी को 107947 वोट मिले थे, जबकि पुष्पेंद्र भारद्वाज को 72542 वोट मिले थे।
हालांकि उस वक्त भाजपा ने घनश्याम तिवारी का टिकट काट दिया था। जिससे नाराज होकर घनश्याम तिवारी ने खुद की अलग पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा था और भाजपा के वोट काट लिए थे।
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