Highlights
- धोरीमन्ना की जन आक्रोश रैली में गहलोत और पायलट गुट के बीच दूरियां साफ दिखीं।
- हेमाराम चौधरी ने सीमांकन के विरोध में मोर्चा खोला जिसमें पायलट शामिल हुए।
- सचिन पायलट ने 2028 के विधानसभा चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं में जोश भरा।
- अशोक गहलोत के जल्द ही बाड़मेर दौरे की सुगबुगाहट से सियासत गरमाई।
बाड़मेर | बाड़मेर के धोरीमन्ना में आयोजित जन आक्रोश रैली ने राजस्थान कांग्रेस की आंतरिक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। इस रैली के जरिए बाड़मेर और बालोतरा जिला सीमांकन के विरोध में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने अपनी ताकत दिखाई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के साथ पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट भी इस मंच पर नजर आए। हालांकि गहलोत गुट के वरिष्ठ नेता अमीन खान और पूर्व विधायक मेवाराम जैन ने इस महत्वपूर्ण रैली से दूरी बनाए रखी। इस अनुपस्थिति ने पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी को एक बार फिर सार्वजनिक कर दिया है। रैली में शामिल नेताओं ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और एकजुटता का संदेश देने का प्रयास किया।
पायलट का कार्यकर्ताओं को सीधा संदेश
रैली के समापन के बाद सचिन पायलट ने सीधे बाड़मेर पहुंचकर अपने समर्थकों के साथ सघन संवाद किया। उन्होंने आजाद सिंह राठौड़ के कार्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए आगामी चुनौतियों के लिए तैयार रहने को कहा। पायलट ने कार्यकर्ताओं से साल 2028 के विधानसभा चुनावों की तैयारी अभी से शुरू करने का पुरजोर आह्वान किया। उनके इस दौरे को बाड़मेर की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने के बड़े प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष विनोद जाखड़ और निर्मल चौधरी के साथ युवाओं में नया जोश भरने की कोशिश की। पायलट के इस रुख से स्थानीय कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखने को मिला है।
वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात और मंथन
सचिन पायलट ने महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव शमा बानो के निवास पर जाकर पूर्व मंत्री गफूर अहमद का कुशलक्षेम जाना। इसके बाद उन्होंने बायतू विधायक हरीश चौधरी के साथ लंबी राजनीतिक मंत्रणा और भविष्य की रणनीति पर मंथन किया। दूसरी ओर गोविंद सिंह डोटासरा और टीकाराम जूली ने सर्किट हाउस में स्थानीय कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। उन्होंने आने वाले पंचायती राज और नगर निकाय चुनावों के लिए संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने पर जोर दिया। डोटासरा ने कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर भाजपा सरकार की विफलताओं को जनता के बीच ले जाने का निर्देश दिया। इन बैठकों से स्पष्ट है कि पार्टी चुनाव मोड में आने की तैयारी कर रही है।
गहलोत की संभावित यात्रा पर नजर
हेमाराम चौधरी द्वारा सीमांकन के विरोध में दिए जा रहे धरने को पायलट गुट का खुला समर्थन मिलता दिख रहा है। हेमाराम चौधरी को गहलोत का धुर विरोधी और पायलट कैंप का मजबूत स्तंभ माना जाता है। अब सियासी गलियारों में चर्चा है कि अशोक गहलोत भी जल्द ही बाड़मेर का दौरा कर सकते हैं। थार के रेगिस्तान में बढ़ती यह सियासी सरगर्मी आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीति में नए समीकरण बना सकती है।
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