Highlights
- बीजेपी नेता रामलाल शर्मा का बयान सोशल मीडिया पर वायरल।
- डर के माहौल में इबादत की सार्थकता पर उठाए सवाल।
- बस स्टैंड के अतिक्रमण को लेकर राम मंदिर का दिया उदाहरण।
- दो अदालतों द्वारा स्थल को अतिक्रमण मानने का किया दावा।
चौमूं | राजस्थान के जयपुर जिले के चौमूं में बस स्टैंड स्थित मस्जिद के अतिक्रमण को लेकर उपजा विवाद एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता और पूर्व विधायक रामलाल शर्मा ने भोपावास में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए बयान दिया है। उनका यह बयान अब सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर जमकर वायरल हो रहा है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।
इबादत और एकाग्रता पर रामलाल शर्मा के तर्क
रामलाल शर्मा ने अपने संबोधन के दौरान इबादत की शुद्धता पर सवाल उठाते हुए कहा कि भय और असुरक्षा के माहौल में की गई प्रार्थना कभी स्वीकार्य नहीं होती। उन्होंने तर्क दिया कि यदि कोई व्यक्ति जंगल में बैठकर तपस्या कर रहा हो और उसे हर क्षण यह डर सताए कि कोई शेर या भेड़िया उस पर हमला कर सकता है, तो वह कभी भी ईश्वर के साथ एकाग्र नहीं हो सकता। इसी तर्क को मस्जिद विवाद से जोड़ते हुए उन्होंने कहा, "अगर इबादत के दौरान मन में यह आशंका बनी रहे कि पीछे से कोई तेज रफ्तार वाहन टक्कर मार सकता है, तो वह इबादत पूरी श्रद्धा से नहीं की जा सकती। ऐसी स्थिति में अल्लाह से संपर्क स्थापित होना असंभव है।"
अतिक्रमण हटाने की अपील और राम मंदिर का उदाहरण
बस स्टैंड के समीप पड़े पत्थरों के विवाद पर शर्मा ने कहा कि वहां पहले भारी मात्रा में पत्थर डाले गए थे, जिनमें से अधिकांश को अब हटाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यदि शेष पत्थरों को भी समुदाय के लोग स्वयं हटा लेते हैं, तो यह समाज में एक सकारात्मक संदेश देगा और भाईचारे की मिसाल पेश करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि बस स्टैंड क्षेत्र में अतिक्रमण के कारण यात्रियों, स्थानीय व्यापारियों और आम जनता को प्रतिदिन भारी ट्रैफिक जाम और असुविधा का सामना करना पड़ता है। जनहित को ध्यान में रखते हुए सड़कों को अतिक्रमण मुक्त करना अनिवार्य है।
अपने भाषण में राम मंदिर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि न्याय की प्रक्रिया लंबी हो सकती है लेकिन सत्य की जीत सुनिश्चित है। उन्होंने कहा, "जैसे 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद राम मंदिर का सपना साकार हुआ, वैसे ही यहां भी कानून अपना काम करेगा।" उन्होंने दावा किया कि दो निचली अदालतें इस स्थल को पहले ही अतिक्रमण घोषित कर चुकी हैं और आगामी फैसला भी साक्ष्यों के आधार पर जल्द आएगा। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अतिक्रमण आज नहीं तो कल हटेगा ही, इसमें कोई संदेह नहीं है।
विपक्ष और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया
रामलाल शर्मा के इस बयान के बाद क्षेत्र में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि शहर के विकास और सुगम यातायात के लिए अतिक्रमण मुक्त सड़कें और कानून का पालन आवश्यक है। वहीं, दूसरी ओर विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने इस बयान को गैर-जरूरी और समाज में तनाव पैदा करने वाला बताया है। इस विवादित बयान के बाद स्थानीय प्रशासन भी सतर्क है ताकि क्षेत्र में शांति और कानून व्यवस्था बनी रहे।
राजनीति