जालोर: ओडवाड़ा मे दो भाइयो के विवाद से पुरे गांव मे 150 से अधिक घर होंगे धवस्त ,16 मई के बाद तोडा जायेगा

ओडवाड़ा मे दो भाइयो के विवाद से पुरे गांव मे 150 से अधिक घर होंगे धवस्त ,16 मई के बाद तोडा जायेगा
150 से अधिक घर होंगे धवस्त ,16 मई के बाद तोडा जायेगा
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Highlights

  • करीब 3 साल पहले गांव के निवासी मुकेश पुत्र मुल्लसिंह राजपुरोहित व महेन्द्रसिंह पुत्र बाबुसिंह राजपुरोहित ने अपने जमीन के बटवारे को लेकर विवाद हो गया था
  • कोर्ट के आदेश पर 150 से अधिक कच्चे मकान व 160 के करीब बाड़े बंदी हटाने को लेकर गांव में मकानों को चिन्हित कर निशान लगाये हैं।

जालोर | जालोर के बाड़मेर मार्ग पर ओडवाड़ा गांव में दो भाइयो के झगडे की वजह से 35 एकड़ ओरण भूमि पर बने 150 से अधिक मकान व अतिक्रमण 16 मई को हटाया जाएगा। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट ने 7 मई को आदेश जारी कर दिया है आहोर तहसीलदार हितेश त्रिवेदी ने कहा है कि इसे पहले भी इन सभी घरों को नोटिस दिये थे। लेकिन लोगो ने ध्यान नहीं और मकान खाली नहीं किए हैं। 7 मई को फिर से हाईकोर्ट ने आदेश जारी कर ओरण भूमि में बने मकानों को अतिक्रमण बताते हुए हटाने के आदेश दिये हैं। जिसके बाद आहोर तहसील द्वारा इनको नोटिस जारी कर 14 मई तक मकान व अन्य कब्जा खाली करने को कहा गया है।नोटिस के बाद भी इनका ध्यान नहीं जाता है तो 16 मई को प्रशासन की और से बेदखल कर बने सभी मकानों को तोड़ा जायेगा एवं सामान जब्त किया जायेगा।

देखे यह पूरा मामला

ओढवड़ा की पूर्व संरपंच प्रमिला राजपुरोहित (ramila rajpurohit)  ने बताया कि करीब 3 साल पहले गांव के निवासी मुकेश पुत्र मुल्लसिंह राजपुरोहित व महेन्द्रसिंह पुत्र बाबुसिंह राजपुरोहित ने अपने जमीन के बटवारे को लेकर विवाद हो गया था। जिसके बाद दोनों भाइयों में मामला इतना बढ़ गया कि मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। जिसके बाद दोनों भाइयों की जमीन का नाप हुआ। जिसमें गांव के करीब 440 घर ओरण (oran) भूमि में पाये गये। जिसके बाद कोर्ट के आदेश से 2022 व 2023 में कुछ कच्चे अतिक्रमण हटा दिये है। अब फिर से कोर्ट के आदेश पर 150 से अधिक कच्चे मकान व 160 के करीब बाड़े बंदी हटाने को लेकर गांव में मकानों को चिन्हित कर निशान लगाये हैं। 16 मई से हटाने की प्रकिया चालू की जाएगी |

20 मकानों पर स्टे उन पर कार्यवाही नही

तहसीलदार ने बताया कि गांव में ओरण भूमि पर बने 20 मकानों मालिकों ने पूर्व में अस्थाई रोक (स्टे) लगाई गयी है। जिन पर कोर्ट के आगामी आदेश कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

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