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राजस्थान

जयपुर सिविल लाइन्स बंगला विवाद: जयपुर कोर्ट का बड़ा फैसला: सिविल लाइन्स बंगले पर राज्य सरकार का दावा खारिज

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जयपुर की एक अदालत ने सिविल लाइन्स स्थित बंगला नंबर 15-16 के स्वामित्व मामले में राज्य सरकार का दावा खारिज कर दिया है। कोर्ट ने देरी को मुख्य आधार मानते हुए सरकार की याचिका को अमान्य करार दिया।

HIGHLIGHTS

  • जयपुर कोर्ट ने सिविल लाइन्स बंगले पर राज्य सरकार का मालिकाना हक का दावा खारिज किया। अदालत ने 30 साल की देरी को आधार मानते हुए संपदा निदेशालय की याचिका रद्द की। सरकार ने 1971 से अब तक 10 करोड़ रुपये किराए की भी मांग की थी। पूर्व राजपरिवार ने परिसीमा अधिनियम के तहत दावे को चुनौती दी थी।
jaipur court rejects govt claim civil lines bungalow
symbolic image

जयपुर | जयपुर के अधीनस्थ न्यायालय ने सिविल लाइन्स स्थित बंगला नंबर 15-16 के मालिकाना हक को लेकर राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है।

न्यायाधीश मुकेश परनामी ने संपदा निदेशालय के दावे को समय सीमा बीत जाने के आधार पर खारिज कर दिया।

कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने संपत्तियों का कब्जा प्राप्त करने के लिए 30 वर्षों तक कोई कार्रवाई नहीं की।

संपदा निदेशालय ने पिछले साल एक याचिका दायर की थी जिसमें बंगले पर सरकारी स्वामित्व का दावा किया गया था।

सरकार का तर्क था कि 1971 में निजी पदवियां समाप्त होने के बाद यह संपत्ति स्वतः राज्य के अधीन आ गई थी।

इस याचिका में 1971 से अब तक के लिए 10 करोड़ रुपये के किराए और 10 लाख रुपये प्रति माह की वसूली की मांग की गई थी।

पूर्व राजपरिवार के वकील रमेश शर्मा ने दलील दी कि सरकार 2002 तक ही कब्जा प्राप्त करने की कानूनी कार्रवाई कर सकती थी।

परिसीमा अधिनियम के अनुसार सरकार का यह दावा कानूनी रूप से बहुत देरी से पेश किया गया है।

कोर्ट ने उल्लेख किया कि मई 2003 में पूर्व राजपरिवार के सदस्य ब्रिगेडियर भवानी सिंह को संपत्ति खाली करने का नोटिस मिला था।

अदालत ने माना कि सरकार ने तीन दशकों तक अपने अधिकारों का प्रयोग नहीं किया और अब यह दावा कानूनी रूप से मान्य नहीं है।

दोनों पक्षों की लंबी बहस सुनने के बाद अदालत ने सरकार के मालिकाना हक के दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया।

इस फैसले से जयपुर के पूर्व राजपरिवार को बड़ी राहत मिली है और मालिकाना हक उनके पास बना रहेगा।

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