जोधपुर | राजस्थान के जोधपुर में जोजरी नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। जोधपुर-बाड़मेर हाईवे के पास स्थित लगभग 35 बीघा क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित हो रही फैक्ट्रियों के खिलाफ 15 जेसीबी मशीनों ने ध्वस्तीकरण शुरू किया है। इस बड़ी कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए 125 पुलिसकर्मियों का जाब्ता मौके पर मौजूद रहा। जोधपुर विकास प्राधिकरण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की देखरेख में यह अभियान चलाया जा रहा है।
जोजरी नदी प्रदूषण पर बड़ी कार्रवाई: जोधपुर में जोजरी नदी के प्रदूषण पर बड़ा एक्शन 35 बीघा में अवैध फैक्ट्रियों पर चली 15 जेसीबी
जोधपुर में जोजरी नदी को प्रदूषित करने वाली अवैध फैक्ट्रियों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है और 35 बीघा क्षेत्र में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की है।
HIGHLIGHTS
- जोधपुर के जोजरी नदी क्षेत्र में 35 बीघा में फैली अवैध फैक्ट्रियों पर बुलडोजर चला। कार्रवाई के दौरान 15 जेसीबी और 125 पुलिसकर्मियों का भारी जाब्ता तैनात रहा। करोड़ों रुपये की मशीनें जब्त की गईं और यह अभियान अगले 8 दिनों तक जारी रहेगा। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद प्रशासन ने प्रदूषण रोकने के लिए यह कड़ा कदम उठाया है।
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करोड़ों की मशीनें जब्त और लंबी कार्रवाई
प्रशासन ने इन अवैध फैक्ट्रियों में मौजूद करोड़ों रुपये की भारी मशीनों को जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। जोजरी नदी के मामले में पहली बार इतने बड़े स्तर पर प्रशासनिक एक्शन देखने को मिला है। अधिकारियों के अनुसार अवैध फैक्ट्रियों के खिलाफ यह अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है और संभावना जताई जा रही है कि यह कार्रवाई अगले 8 दिनों तक निरंतर जारी रह सकती है। इससे अवैध औद्योगिक इकाइयों में हड़कंप मचा हुआ है।
प्रदूषण से बंजर हो रही हजारों एकड़ जमीन
जोजरी नदी नागौर जिले के पूंदलू गांव से निकलती है और 83 किलोमीटर का सफर तय कर जोधपुर के खेड़ालदा खुर्द के पास लूणी नदी में मिलती है। पिछले लंबे समय से इस सहायक नदी में उद्योगों का जहरीला और तेजाबी पानी छोड़ा जा रहा है। इस प्रदूषित पानी के कारण लूणी तहसील के कई गांवों की कृषि भूमि पूरी तरह बंजर हो चुकी है जिससे स्थानीय किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख और जनस्वास्थ्य
इस प्रदूषण से जोधपुर, पाली और बालोतरा के लगभग 20 लाख लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने इसे सरकार की विफलता बताते हुए कहा था कि वर्षों से संज्ञान लेने के बावजूद जमीनी हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है। इसी दबाव और अदालती आदेशों के पालन में अब प्रशासन सख्ती दिखा रहा है।
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