बीकानेर | राजस्थान में खेजड़ी वृक्षों के संरक्षण को लेकर चल रहा आंदोलन अब उग्र रूप ले रहा है। खेजड़ी बचाओ आंदोलन के संयोजक परसराम विश्नोई ने घोषणा की है कि आगामी 17 फरवरी को पांच लाख से अधिक लोग खेजड़ी संरक्षण की मांग को लेकर अनशन पर बैठेंगे। यह घोषणा जोधपुर और बीकानेर संभाग में मंत्री केके सिंह के आश्वासन के बावजूद पेड़ों की निरंतर कटाई के विरोध में की गई है।
प्रशासन और सरकार पर दबाव
बीकानेर जिला कलेक्ट्रेट के सामने पिछले सात दिनों से पर्यावरण प्रेमियों का महापड़ाव जारी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि सरकार ने ठोस कानून लागू नहीं किया, तो मुकाम के स्थान पर बीकानेर में एक विशाल मेला भरा जाएगा। उल्लेखनीय है कि इसी दिन मुकाम में गुरु जम्भेश्वर का मेला भी आयोजित होना है, जिसमें देशभर से लाखों विश्नोई श्रद्धालु शामिल होते हैं। महापड़ाव के कारण प्रशासन की चिंताएं बढ़ गई हैं और जयपुर तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
संतों की मुख्यमंत्री से महत्वपूर्ण वार्ता
आंदोलन के सातवें दिन गतिरोध खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया। मुकाम पीठाधीश्वर स्वामी रामानंद महाराज के नेतृत्व में 11 सदस्यीय संतों के प्रतिनिधिमंडल को जयपुर बुलाया गया। इस प्रतिनिधिमंडल में महंत भगवानदास जाम्भा, स्वामी भागीरथदास शास्त्री और स्वामी सच्चिदानंद सहित कई वरिष्ठ संत शामिल थे। देर शाम मुख्यमंत्री के साथ हुई इस वार्ता से आंदोलन समाप्त होने की उम्मीद जगी है, हालांकि धरातल पर अभी भी आक्रोश व्याप्त है।
कटाई पर रोक न लगने से नाराजगी
राज्य मंत्री केके बिश्नोई ने पूर्व में महापड़ाव स्थल पर आकर आश्वासन दिया था कि पेड़ों की कटाई रोकी जाएगी, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध कटाई अभी भी जारी है। इसी आक्रोश के चलते 150 से अधिक लोग क्रमिक अनशन पर हैं और भजन-कीर्तन के माध्यम से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। अब सबकी नजरें सरकार के अगले कदम और मुख्यमंत्री के साथ हुई वार्ता के परिणामों पर टिकी हैं।
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