Highlights
- मंत्री केके विश्नोई ने लिखित आश्वासन का वादा किया।
- खेजड़ी कटाई को गैर-जमानती अपराध बनाने की मांग।
- सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए पेड़ों की कटाई का विरोध।
- 480 लोग महापड़ाव में अनशन पर बैठे हैं।
बीकानेर | राजस्थान के बीकानेर में खेजड़ी वृक्षों की अवैध कटाई के खिलाफ पिछले चार दिनों से जारी 'खेजड़ी बचाओ आंदोलन' में आखिरकार एक बड़ी सफलता मिलती नजर आ रही है। बीकानेर कलेक्ट्रेट पर चल रहे महापड़ाव के बीच प्रदेश सरकार के मंत्री केके विश्नोई ने आंदोलनकारियों की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए मंच से एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच हुई वार्ता के बाद अब यह गतिरोध समाप्त होने की कगार पर है।
सरकार देगी लिखित आश्वासन
मंत्री केके विश्नोई ने आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार खेजड़ी संरक्षण के मुद्दे पर बेहद गंभीर है और इसे केवल मौखिक नहीं, बल्कि लिखित आश्वासन के रूप में लागू किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि खेजड़ी वृक्षों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार हर संभव कदम उठाएगी। आंदोलनकारियों के लिए यह एक बड़ी नैतिक जीत है, क्योंकि वे लंबे समय से 'ट्री एक्ट' जैसे सख्त कानून की मांग को लेकर अनशन पर बैठे थे।
अमृता देवी बिश्नोई का बलिदान और सरकारी संकल्प
मंत्री विश्नोई ने बिश्नोई समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए मां अमृता देवी के बलिदान का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है और अमृता देवी की विरासत को कभी झुकने नहीं दिया जाएगा। इस घोषणा के बाद अनशनकारियों के बीच उत्साह का माहौल है, हालांकि आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक लिखित आश्वासन उनके हाथ में नहीं आता, तब तक महापड़ाव जारी रह सकता है।
विवाद की जड़: सौर ऊर्जा परियोजनाएं और पेड़ों की कटाई
दरअसल, पश्चिमी राजस्थान में बड़े पैमाने पर स्थापित हो रहे सोलर पावर प्रोजेक्ट्स इस विवाद का मुख्य केंद्र हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि बीकानेर संभाग में विकास के नाम पर हजारों खेजड़ी वृक्षों को बेरहमी से काटा जा रहा है। शिकायतें यह भी हैं कि कई स्थानों पर पेड़ों को काटकर साक्ष्य मिटाने के लिए उन्हें रात के अंधेरे में जमीन में गाड़ दिया गया। राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी को 'मरुस्थल की जीवनरेखा' माना जाता है, और इसकी इस प्रकार की दुर्गति ने पर्यावरण प्रेमियों के आक्रोश को हवा दी है।
कड़े कानून की मांग: 1000 रुपये का जुर्माना नाकाफी
वर्तमान नियमों के अनुसार, खेजड़ी की अवैध कटाई पर मात्र 1000 रुपये का मामूली जुर्माना लगाया जाता है। आंदोलनकारियों का तर्क है कि यह राशि इतनी कम है कि अपराधी आसानी से इसे भरकर कानून की धज्जियां उड़ाते हैं। संतों और पर्यावरणविदों की मुख्य मांग है कि इस जुर्माने को समाप्त कर खेजड़ी की कटाई को 'गैर-जमानती अपराध' की श्रेणी में लाया जाए। साथ ही, एक विशेष 'ट्री एक्ट' बनाकर इसे धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर घोषित किया जाए ताकि सौर ऊर्जा कंपनियां अपनी मनमानी न कर सकें।
ऐतिहासिक विरासत और संतों का अल्टीमेटम
यह आंदोलन 1730 ईस्वी के उस महान 'खेजड़ली बलिदान' की याद दिलाता है, जहां अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में 363 लोगों ने पेड़ों के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। बीकानेर में 3 फरवरी से करीब 480 लोग, जिनमें 29 संत और 60 महिलाएं शामिल हैं, अन्न-जल त्याग कर आमरण अनशन पर हैं। संतों द्वारा सरकार को दिए गए 24 घंटे के अल्टीमेटम के बाद ही प्रशासन हरकत में आया और मंत्रियों का दल वार्ता के लिए बीकानेर पहुंचा।
राजनीति