Highlights
- झारखंड जेल में बंद सुनील मीणा लॉरेंस गैंग का नया मास्टरमाइंड है।
- वह बिजनेसमैन को फिरौती के लिए धमकी भरे कॉल कर रहा है।
- पाकिस्तान से हथियारों की सप्लाई में भी सुनील मीणा की अहम भूमिका है।
- अजमेर के बिजनेसमैन से 2 करोड़ की फिरौती मांगी गई थी।
जयपुर: राजस्थान का सुनील मीणा लॉरेंस गैंग का नया मास्टरमाइंड बनकर उभरा है। वह फिरौती के लिए बिजनेसमैन को धमकी भरे कॉल कर रहा है और पाकिस्तान से हथियारों की सप्लाई में भी उसका अहम रोल है। सुनील फिलहाल झारखंड की जेल में बंद है।
गैंगस्टर गोल्डी बरार और रोहित गोदारा से हुई दुश्मनी के बाद लॉरेंस गैंग ने राजस्थान में अपना नया नेटवर्क सक्रिय कर दिया है। इस नेटवर्क को मजबूत करने के लिए पुराने और नए बदमाशों को काम पर लगाया गया है।
लॉरेंस गैंग का नया चेहरा: सुनील मीणा
लॉरेंस के इस नेटवर्क में झारखंड और छत्तीसगढ़ में सक्रिय रहे राजस्थान के ही गैंगस्टर सुनील मीणा उर्फ मयंक सिंह का नाम सामने आया है। वह श्रीगंगानगर के घड़साना स्थित पुरानी मंडी का रहने वाला है, जो अब इस गैंग का एक प्रमुख चेहरा बन गया है।
सुनील मीणा फिलहाल झारखंड की एक जेल में बंद है, जहां उसे करीब नौ महीने पहले झारखंड पुलिस अजरबैजान से पकड़कर लाई थी। विदेश में बैठे आरजू विश्नोई और हैरी बॉक्सर जैसे अपराधी उसकी मदद कर रहे थे।
धमकी भरे कॉल और सनसनीखेज खुलासा
हाल ही में राजस्थान के कुछ शहरों में बड़े बिजनेसमैन को लॉरेंस गैंग की तरफ से धमकी भरे कॉल आए हैं। पुलिस जांच और लॉरेंस गैंग से जुड़े कुछ बदमाशों की गिरफ्तारी से यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, विदेशी नंबरों से किए गए इन धमकी भरे कॉल्स के पीछे सुनील मीणा का ही हाथ है। सोशल मीडिया पर हथियारों की नुमाइश करने वाला सुनील मीणा श्रीगंगानगर के घड़साना का रहने वाला है और अब वह गैंग के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
अजमेर के बिजनेसमैन से 2 करोड़ की फिरौती
अजमेर के बिजनेसमैन यशवंत शर्मा (58) ने पुलिस को एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि अजमेर के माखुपुरा औद्योगिक क्षेत्र में उनकी 'श्रीभगवती मशीन' के नाम से कंपनी है।
29 नवंबर 2025 को उन्हें एक वॉट्सऐप कॉल आया, जिसे उन्होंने अनजान नंबर होने के कारण रिसीव नहीं किया। इसके बाद उसी नंबर से उन्हें वॉट्सऐप मैसेज आया, जिसमें धमकी दी गई थी।
मैसेज में लिखा था, 'लगता है कि आपके कानों में कोई दिक्कत है, तभी हमारी कॉल की रिंग सुनाई नहीं दे रही है। गोली चलाकर आपके कान साफ करने ही पड़ेंगे।' यह स्पष्ट रूप से एक गंभीर धमकी थी।
इसके बाद एक और मैसेज आया, जिसमें लिखा था, 'आपको हमारे बारे में कोई गलतफहमी हो रही है, ठीक है। अब आपको कोई कॉल नहीं करेंगे, सीधा आपके सीने में गोली मारेंगे या फिर आपके परिवार में किसी को गोली मारेंगे, उसके बाद ही आपको फोन करेंगे।' यह संदेश सीधे तौर पर जान से मारने की धमकी थी।
मैसेज में यह भी लिखा था कि 'भगवती मशीन टूल्स से आपने बहुत पैसा कमा लिया है और अब आपसे पैसा कमाने की हमारी बारी है। मेरे को आपसे 2 करोड़ रुपए चाहिए, अगर इसे नजरअंदाज किया गया तो सीधे ऊपर जाने की तैयारी कर लेना।'
भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि ऐसा ही एक धमकी भरा मैसेज अजमेर शहर के ही एक और सट्टा कारोबारी को भी मिला था। हालांकि, उसने पुलिस को कोई लिखित शिकायत नहीं दी थी, जिससे मामला और भी गंभीर हो गया।
पुलिस ने जब मैसेज की जांच की तो उसमें लॉरेंस गैंग की धमकी में नीचे लिखे गए गैंगस्टरों के नामों में एक नाम नया था, वह था सुनील मीणा। इस नाम के सामने आने से जांच की दिशा बदल गई।
पेट्रोल पंप पर फायरिंग की पुरानी वारदात
इससे पहले अजमेर में लॉरेंस गैंग के बदमाशों ने 20 अक्टूबर 2021 को कचहरी रोड स्थित एक पेट्रोल पंप पर फायरिंग की थी। फरीदाबाद जेल में बंद भूपेंद्र सिंह ने सोशल साइट्स पर एक पोस्ट कर इस वारदात की जिम्मेदारी ली थी।
पंप मालिक के बेटे नमन गर्ग ने पुलिस को बताया था कि उसे दो दिन से धमकी भरे फोन आ रहे थे। उसने फोन नहीं उठाया तो उसके ताऊजी को फोन किया गया, जिसमें करीब 5 करोड़ की डिमांड की जा रही थी।
रकम नहीं देने और फोन नहीं उठाने के कारण इस वारदात को अंजाम दिया गया था। यह घटना गैंग की धमकी देने के तरीके का एक और उदाहरण थी।
इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई कर लच्छीपुरा, अजमेर निवासी नरेंद्र सिंह उर्फ मोनू रावत (28), सारण पाली निवासी पप्पू सिंह उर्फ पप्सा रावत (28) व फरीदकोट जेल में बंद भूपेंद्र सिंह खरवा को पकड़ा था।
पूछताछ में सामने आया था कि ये सभी बदमाश गैंगस्टर सुनील मीणा के संपर्क में थे। उसी के माध्यम से वे लॉरेंस गैंग के लिए काम कर रहे थे, जिससे सुनील मीणा की भूमिका और स्पष्ट हो गई।
मलेशिया से लॉरेंस का नेटवर्क चला रहा था सुनील
ये सब कुछ सामने आने के बाद पुलिस ने न सिर्फ लॉरेंस व संदीप मीणा से जुड़े बदमाशों की धरपकड़ शुरू कर दी, बल्कि उनकी मौजूदा मूवमेंट को ट्रैक करना भी शुरू कर दिया। पुलिस ने यह भी पता लगा लिया कि अजमेर में व्यापारी को मिले कॉल के पीछे कभी मलेशिया से लॉरेंस का नेटवर्क चलाने वाले संदीप मीणा और राहुल का ही दिमाग था।
इसी दौरान पुलिस ने भूपेंद्र सिंह खरवा (33), दीपक सिंह उर्फ दीपसा (29), राहुल सिंह (20) और नरेंद्र सिंह गहलोत उर्फ मोनू (36) को पकड़ लिया।
इनसे हुई पूछताछ में यह कन्फर्म हो गया कि लॉरेंस गैंग की तरफ से राजस्थान में बिजनेसमैनों को फिरौती के लिए धमकी भरे कॉल के पीछे झारखंड की जेल में बंद सुनील मीणा ही है। गिरफ्तार किए गए बदमाश बड़ी वारदातों को अंजाम देने की तैयारी में भी थे, जिससे उनकी मंशा साफ हो गई।
इन आरोपियों के खिलाफ पहले से ही कई मामले दर्ज हैं, जो उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि को दर्शाते हैं। अजरबैजान से पहले सुनील मलेशिया से लॉरेंस का नेटवर्क चला रहा था, जो उसकी अंतरराष्ट्रीय पहुंच को दिखाता है।
दो नाम से पहचान पत्र: पुलिस को धोखा
सुनील मीणा ने पुलिस और सिक्योरिटी एजेंसीज से बचने के लिए मयंक सिंह और सुनील मीणा नाम से दो पहचान बना रखी थीं। झारखंड और छत्तीसगढ़ की पुलिस एक ही शख्स द्वारा की गई वारदातों के मामले में दो अलग-अलग शख्स को तलाश रही थी।
बाद में जांच में सामने आया था कि मयंक और सुनील एक ही हैं, जो मलेशिया में बैठकर झारखंड के गैंगस्टर अमन साहू और लॉरेंस विश्नोई के बीच मुख्य कड़ी बना हुआ था। इस दोहरी पहचान ने पुलिस को लंबे समय तक भ्रमित रखा।
इसी साल 11 मार्च को झारखंड के पलामू में एटीएस के साथ हुई मुठभेड़ में अमन साहू मारा गया था। इससे पहले 28 अक्टूबर 2024 को गैंगस्टर सुनील मीणा को इंटरपोल की मदद से अजरबैजान में पकड़ लिया गया था।
इसके बाद 23 अगस्त 2025 को सुनील मीणा उर्फ मयंक सिंह को अजरबैजान से प्रत्यर्पण कर रांची लाया गया था। फिलहाल वह झारखंड के रामगढ़ जिले की जेल में बंद है, जहां उससे पूछताछ जारी है।
सुनील मीणा उर्फ मयंक सिंह पर झारखंड, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में 50 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। इनमें से अधिकतर मामले झारखंड और छत्तीसगढ़ के ही हैं, जो उसकी व्यापक आपराधिक गतिविधियों को दर्शाते हैं।
नौवीं के बाद छोड़ी पढ़ाई, अपराध की दुनिया में कदम
झारखंड पुलिस की पूछताछ में सुनील मीणा उर्फ मयंक सिंह ने तमाम बातें बताईं। उसके पिता मंगतराम दिहाड़ी मजदूर हैं, और परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी।
साल 2014 में उसने नौवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। घरवालों के दबाव देने पर दोबारा दसवीं में एडमिशन लिया, लेकिन कुछ दिनों बाद ही वह एक डीजे में काम करने लगा, जिससे उसकी पढ़ाई छूट गई।
पहली बार लॉरेंस से उसकी मुलाकात मोहाली के एक कॉलेज में हुई थी। हालांकि, उसके बाद दोनों की कोई बातचीत नहीं हुई थी और न ही दोनों बाद में संपर्क में रहे, यह महज एक इत्तेफाक था।
इस बीच साल 2019 में सुनील को पता चला कि गांव का ही राहुल कुमार मलेशिया में रहता है और वह वहां काफी पैसा कमाता है। ज्यादा पैसा कमाने के लालच में ही वह राहुल के माध्यम से पासपोर्ट बनवाकर मलेशिया चला गया।
वहां जुली फार्मा कंपनी में 65 हजार प्रति महीने वेतन पर काम करने लगा। इसी दौरान वहां उसकी मुलाकात मंदीप सिंह से हुई, जो उसके जीवन में एक नया मोड़ लेकर आया।
मंदीप के जरिए लॉरेंस से संपर्क
मंदीप ने ही हैरी से उसका संपर्क कराया। हैरी के माध्यम से ही दोबारा सुनील मीणा लॉरेंस के संपर्क में आया, जिससे उसके आपराधिक करियर को नई दिशा मिली।
उसके बाद उसने अनमोल बिश्नोई और गोल्डी बरार समेत अन्य लोगों से बातचीत शुरू कर दी। लॉरेंस ने उसे सऊदी अरब में ट्रक चलाने वाले राकेश कुमार से संपर्क करने को कहा।
राकेश से जब संपर्क किया तो पता चला कि वह मूल रूप से बिहार का रहने वाला है। राकेश ने ही लॉरेंस के कहने पर सुनील की झारखंड के बड़े गैंगस्टर अमन साहू से बात कराई, जो उसके लिए एक महत्वपूर्ण संपर्क साबित हुआ।
अमन ने बातचीत के दौरान सुनील को उसके लिए काम करने को कहा। अमन ने सुनील को बताया था कि उसे जो मोबाइल नंबर उपलब्ध कराया जाएगा, उस पर फोन व मैसेज भेजकर खुद को मयंक सिंह बताते हुए रंगदारी मांगना है।
कहे अनुसार, सुनील धमकी भरे कॉल और मैसेज करने लगा। अमन ने ही सुनील को नया नाम मयंक सिंह दिया था, जिससे वह अपनी असली पहचान छिपा सके।
वो सुनील मीणा से मयंक सिंह बन गया। इसके साथ ही वह अमन साहू व लॉरेंस बिश्नोई गैंग के लिए एक कड़ी का काम करने लग गया था, जिससे उसकी गैंग में स्थिति मजबूत हुई।
पाकिस्तान से हथियारों की सप्लाई में अहम भूमिका
पूछताछ में यह भी सामने आया था कि झारखंड और छत्तीसगढ़ में साहू गैंग के सदस्य कोयला कारोबारी, ठेकेदार, ट्रांसपोर्टर, जमीन कारोबारी सहित अन्य लोगों से रंगदारी वसूलते थे। यह रंगदारी की रकम गैंग के लिए आय का मुख्य स्रोत थी।
इसके बाद ये रंगदारी की रकम झारखंड से हवाला के जरिए अमन साहू गैंग यूरोप भेजता था। यह एक जटिल अंतरराष्ट्रीय हवाला नेटवर्क का हिस्सा था।
यूरोप से ये रकम हवाला के माध्यम से मलेशिया और थाईलैंड में जगह बदल-बदलकर रहने वाले सुनील मीणा उर्फ मयंक सिंह तक पहुंचती थी। सुनील मीणा रंगदारी की ये रकम मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर स्थित पाक-पंजाब नामक रेस्टोरेंट के एक कर्मचारी के पास पहुंचाता था।
इसके बाद वह कर्मचारी इस रकम को पाकिस्तान में हथियार बेचने वाले एजेंट तक पहुंचाता था। रकम मिलने के बाद एजेंट अपने गुर्गों के जरिए अमन साहू गैंग तक हथियारों की सप्लाई कराता था, जिससे गैंग की ताकत बढ़ती थी।
सुनील मीणा साल 2023 में 15 दिनों के लिए मलेशिया से वापस लौटकर राजस्थान स्थित अपने घर आया था। इसके बाद वह वापस मलेशिया गया तो जूली फार्मा ने उसे काम पर नहीं रखा।
इसी दौरान उसे लॉरेंस गैंग से पता चला कि झारखंड एटीएस रांची ने उसका इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाया है। यह खबर उसके लिए एक बड़ा झटका थी।
इसके बाद वह अमन के इशारे पर पहले थाईलैंड और इसके बाद थाईलैंड से अजरबैजान गया। उसने अपने गांव के दोस्त राहुल को भी अजरबैजान बुला लिया था, ताकि उसे मदद मिल सके।
इसके बाद अक्टूबर 2024 में अजरबैजान में इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उसे पकड़ लिया गया था। यह उसकी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक यात्रा का अंत था।
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