Highlights
- पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने स्वच्छता में लापरवाही पर ग्राम विकास अधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों को निलंबित किया।
- निरीक्षण रिपोर्ट में कचरे के ढेर और प्रशासनिक अनियमितताएं पाए जाने पर पाली और सिरोही में सख्त कार्यवाही की गई।
- अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के खिलाफ 17 सीसीए की कार्यवाही प्रस्तावित की गई है।
- स्वच्छ भारत मिशन के ब्लॉक कोऑर्डिनेटर और क्लस्टर प्रभारियों को भी पदमुक्त और निलंबित किया गया।
जयपुर | राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने ग्रामीण स्वच्छता अभियान के तहत लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। मंत्री ने अतिरिक्त आयुक्त की निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर कई अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश जारी किए हैं।
स्वच्छता पर मंत्री का विशेष जोर
मंत्री मदन दिलावर का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक ग्राम पंचायत में स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करना और घर-घर कचरा संग्रहण सुनिश्चित करना है। उन्होंने पंचायतों को निर्देश दिए हैं कि कचरा वाहनों के माध्यम से प्रतिदिन कचरा इकट्ठा किया जाए और नियमित सफाई हो।
स्वच्छता की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए मंत्री ने अधिकारियों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि विश्राम की व्यवस्था अनिवार्य की है। सचिव से लेकर खंड विकास अधिकारी तक सभी को महीने में चार बार गांवों में रुककर स्वच्छता कार्य का आकलन करना होगा।
विभाग द्वारा इसके लिए एक विशेष प्रारूप तैयार किया गया है जिसमें अधिकारियों को रात्रि विश्राम के बाद अपनी रिपोर्ट दर्ज करनी होती है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही संबंधित पंचायत के उत्कृष्ट कार्यों या कमियों का मूल्यांकन किया जाता है।
निरीक्षण रिपोर्ट और कार्यवाही
हालिया कार्यवाही पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त आयुक्त बृजेश कुमार चंदोलिया की निरीक्षण रिपोर्ट पर आधारित है। चंदोलिया ने पिछले दिनों सिरोही और पाली जिलों की विभिन्न पंचायतों का औचक निरीक्षण किया था।
रिपोर्ट में सिरोही के रेवदर और पाली के सोजत ब्लॉक की पंचायतों में गंभीर अनियमितताएं पाई गई थीं। इन कमियों को देखते हुए मंत्री ने ग्राम विकास अधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।
सोजत की ग्राम पंचायत सांडिया और रेवदर की ग्राम पंचायत सानवाड़ा के ग्राम विकास अधिकारियों पर गाज गिरी है। इसके साथ ही इन पंचायतों के प्रशासकों को भी उनके पद से मुक्त करने के आदेश दिए गए हैं।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत कार्यरत ब्लॉक कोऑर्डिनेटर और क्लस्टर प्रभारियों को भी पदमुक्त या निलंबित किया गया है। मंत्री ने साफ कर दिया है कि स्वच्छता के मामले में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अधिकारियों पर अनुशासनात्मक एक्शन
पाली और सिरोही जिला परिषद के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के खिलाफ भी 17 सीसीए के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की गई है। इन अधिकारियों पर पर्यवेक्षण में लापरवाही बरतने का आरोप है।
अतिरिक्त आयुक्त बृजेश कुमार चंदोलिया ने 28 और 29 दिसंबर को सिरोही की रेवदर पंचायत समिति का दौरा किया था। निरीक्षण के दौरान मुख्य सड़कों पर कचरे के ढेर लगे हुए मिले थे।
सोजत की सांडिया पंचायत में राष्ट्रीय राजमार्ग से गांव की ओर जाने वाली सड़क पर गंदगी का अंबार पाया गया। ग्राम पंचायत प्रशासन द्वारा मुख्य द्वार के पास गोबर के ढेर हटाने की कोई कोशिश नहीं की गई थी।
निरीक्षण में प्रशासनिक अनियमितताएं भी सामने आई हैं जैसे बैठक रजिस्टर में कार्यवाही विवरण का अधूरा होना। रजिस्टर में खाली पेज छोड़े गए थे और जनप्रतिनिधियों के हस्ताक्षर भी मौजूद नहीं थे।
धरातल पर दिखी भारी कमियां
रेवदर की सानवाड़ा पंचायत में घर-घर कचरा संग्रहण के लिए लगाई गई ट्रैक्टर ट्राली गलियों के हिसाब से सही नहीं पाई गई। छोटी गलियों में वाहन नहीं पहुंचने के कारण पूरा क्षेत्र स्वच्छता के दायरे से बाहर रह गया था।
नाली निर्माण की कमी के कारण कई स्थानों पर सड़कों पर गंदा पानी फैला हुआ पाया गया। यह स्थिति ग्रामीणों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही थी जिसे मंत्री ने गंभीरता से लिया।
शिवगंज पंचायत समिति की बगसीन और रेवदर की सिरोड़ी पंचायत में भी इसी प्रकार की कमियां उजागर हुई हैं। यहां के ग्राम विकास अधिकारियों और क्लस्टर प्रभारियों को भी निलंबित करने के निर्देश दिए गए हैं।
तत्कालीन विकास अधिकारियों और नोडल अधिकारियों को भी अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से नहीं निभाने का दोषी पाया गया है। इनके खिलाफ भी विभागीय जांच और कार्यवाही के आदेश पारित किए गए हैं।
भविष्य के लिए सख्त चेतावनी
मंत्री मदन दिलावर ने स्पष्ट किया है कि राजस्थान को स्वच्छ बनाने का सपना तभी पूरा होगा जब अधिकारी धरातल पर काम करेंगे। उन्होंने सभी अधिकारियों को चेतावनी दी है कि वे कागजी कार्यवाही के बजाय फील्ड में सक्रिय रहें।
इस कार्यवाही से पूरे पंचायती राज विभाग में हड़कंप मच गया है और अन्य जिलों के अधिकारी भी सतर्क हो गए हैं। सरकार का लक्ष्य हर गांव को कचरा मुक्त और सुंदर बनाना है।
स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने के लिए भी विशेष निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीणों को कचरा पात्रों का उपयोग करने और सड़कों पर गंदगी न फैलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
भविष्य में भी इस तरह के औचक निरीक्षण जारी रहेंगे और रिपोर्ट के आधार पर सख्त एक्शन लिया जाएगा। मंत्री ने जनता से भी अपील की है कि वे स्वच्छता बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास के साथ-साथ स्वास्थ्य मानकों को सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है। स्वच्छता इस दिशा में पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है जिसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे संसाधनों का सही उपयोग करें और सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करें। किसी भी फर्जी हाजिरी या काम में चोरी की सूचना पर तुरंत कार्यवाही की जाएगी।
यह पूरा प्रकरण शासन की पारदर्शिता और जवाबदेही को दर्शाता है जहां उच्च अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं। मदन दिलावर ने भ्रष्टाचार और कामचोरी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है।
आने वाले दिनों में अन्य जिलों की भी रिपोर्ट तैयार की जा रही है और वहां भी इसी प्रकार की कार्यवाही की संभावना है। ग्रामीण जनता ने मंत्री के इस कड़े फैसले का स्वागत किया है।
अंततः सरकार का ध्येय है कि राजस्थान की हर ग्राम पंचायत स्वच्छता के मॉडल के रूप में विकसित हो। इसके लिए बजट और संसाधनों की कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी लेकिन काम की गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा।
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