JF-17 की मांग में उछाल: पाकिस्तान के JF-17 फाइटर जेट की मांग बढ़ी, सऊदी अरब और बांग्लादेश समेत कई देशों के साथ बड़े सौदे की तैयारी

पाकिस्तान के JF-17 फाइटर जेट की मांग बढ़ी, सऊदी अरब और बांग्लादेश समेत कई देशों के साथ बड़े सौदे की तैयारी
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Highlights

  • प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों की बढ़ती वैश्विक मांग का दावा किया है।
  • सऊदी अरब और बांग्लादेश जैसे देश JF-17 थंडर विमान खरीदने के लिए पाकिस्तान से संपर्क में हैं।
  • JF-17 को चीन और पाकिस्तान ने मिलकर बनाया है लेकिन इसमें रूसी तकनीक का भी इस्तेमाल है।
  • नाइजीरिया और म्यांमार जैसे देशों की वायुसेना में यह विमान पहले से ही शामिल है।

इस्लामाबाद | पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया है कि भारत के साथ पिछले साल हुए संघर्ष के बाद पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों की मांग में भारी इजाफा हुआ है। उन्होंने कहा कि कई अंतरराष्ट्रीय खरीदार अब पाकिस्तान के फाइटर जेट्स में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

रेडियो पाकिस्तान की एक रिपोर्ट के अनुसार शहबाज शरीफ ने बुधवार को एक कार्यक्रम के दौरान यह महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कई देशों के साथ लड़ाकू विमानों की बिक्री को लेकर बातचीत काफी उन्नत चरण में पहुंच गई है।

हालांकि प्रधानमंत्री ने सीधे तौर पर किसी खास विमान का नाम नहीं लिया लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मांग JF-17 थंडर के लिए है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि विकासशील देशों के बीच इस विमान की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।

बांग्लादेश, सूडान और लीबिया जैसे देशों ने पाकिस्तान के इस लड़ाकू विमान को अपने सैन्य बेड़े में शामिल करने की इच्छा जताई है। इसके अलावा सऊदी अरब, इराक और इंडोनेशिया जैसे बड़े देश भी इस दौड़ में शामिल नजर आ रहे हैं।

विभिन्न देशों के साथ चल रही बातचीत

रॉयटर्स की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री ने इस साल की शुरुआत में पाकिस्तान के वायु सेना प्रमुख से मुलाकात की थी। इस बैठक के दौरान इंडोनेशिया ने लगभग 40 की संख्या में JF-17 विमान खरीदने के प्रस्ताव पर चर्चा की है।

वहीं पड़ोसी देश बांग्लादेश के साथ भी रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं। बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार दोनों देशों के वायुसेना प्रमुखों के बीच विमानों की खरीद को लेकर बातचीत का दौर पूरा हो चुका है।

सऊदी अरब के साथ होने वाला सौदा पाकिस्तान के लिए आर्थिक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान सऊदी अरब से मिले 2 अरब डॉलर के कर्ज के बदले इन विमानों की आपूर्ति कर सकता है।

हालांकि पाकिस्तानी सेना की ओर से अभी तक इन समझौतों को लेकर कोई औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है। बांग्लादेश और अन्य देशों ने भी अभी तक किसी अंतिम अनुबंध पर हस्ताक्षर करने की घोषणा नहीं की है।

इन देशों के पास पहले से है JF-17

JF-17 थंडर विमान पहले से ही दुनिया के कई देशों की वायुसेना का हिस्सा बन चुका है। नाइजीरिया, म्यांमार और अजरबैजान जैसे देशों ने अपनी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए इस विमान पर भरोसा जताया है।

नाइजीरिया ने कुछ साल पहले पाकिस्तान से इन विमानों की खेप प्राप्त की थी और उनका सफल संचालन कर रहा है। म्यांमार की वायुसेना में भी ये विमान पिछले कई सालों से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

दिसंबर 2025 तक लीबिया के एक विद्रोही गुट के साथ भी बड़े सौदे की खबरें चर्चा में रही हैं। इस सौदे की कीमत लगभग 4 अरब डॉलर बताई जा रही है जो पाकिस्तान के इतिहास की सबसे बड़ी रक्षा डील हो सकती है।

सूडान के साथ भी पाकिस्तान एक बड़ी डिफेंस डील करने की तैयारी में जुटा हुआ है। इस प्रस्तावित समझौते की कुल कीमत लगभग 12,500 करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया गया है।

तकनीक और निर्माण का सफर

JF-17 थंडर एक मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है जिसे पाकिस्तान और चीन ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। इस विमान का डिजाइन और मुख्य तकनीक चीन की चेंगड़ू एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन ने तैयार की है।

पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स इस विमान की फाइनल असेंबलिंग का काम अपनी सुविधाओं में पूरा करता है। इस विमान के निर्माण में पाकिस्तान की हिस्सेदारी लगभग 58 प्रतिशत और चीन की 42 प्रतिशत है।

इस फाइटर जेट की सबसे खास बात इसमें इस्तेमाल होने वाला इंजन है जो रूस में निर्मित है। चीन और पाकिस्तान के पास उस समय आधुनिक इंजन तकनीक उपलब्ध नहीं होने के कारण रूसी इंजन का चुनाव किया गया था।

विमान के नए ब्लॉक 3 संस्करण में भी रूस में बने RD-93 MA इंजन का ही उपयोग किया जा रहा है। रूस इन इंजनों की आपूर्ति चीन के माध्यम से पाकिस्तान को सुनिश्चित करता है।

चुनौतियां और तकनीकी खामियां

ग्लोबल डिफेंस कॉर्प की रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान का यह विमान मेंटेनेंस के लिए पूरी तरह चीन पर निर्भर है। स्पेयर पार्ट्स की कमी और रूसी इंजन की आपूर्ति में आ रही बाधाएं पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय हैं।

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के कारण इंजन के पुर्जों की उपलब्धता पर भी बुरा असर पड़ा है। इसके अलावा JF-17 एक स्टेल्थ फाइटर नहीं है जिसका मतलब है कि यह दुश्मन के रडार की पकड़ में आसानी से आ सकता है।

विमान के इंजन की शक्ति को लेकर भी विशेषज्ञों ने कई बार सवाल उठाए हैं। कम पावर वाला इंजन होने के कारण भारी हथियार ले जाते समय इसकी गति और मारक क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

JF-17 केवल 3.6 टन तक के हथियार ही ढोने में सक्षम है जो आधुनिक युद्ध के लिहाज से कम माना जाता है। अधिक हथियार ले जाने की स्थिति में विमान को अपने ईंधन की मात्रा में कटौती करनी पड़ती है।

एवियोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम

इस विमान का एवियोनिक्स सिस्टम भी आधुनिक मानकों के मुकाबले थोड़ा पुराना माना जाता है। इससे पायलट को नेविगेशन और संचार के दौरान कई तरह की तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

हथियारों को नियंत्रित करने वाले इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में भी सुधार की काफी गुंजाइश देखी गई है। विमान का जैमिंग सिस्टम और सेंसर तकनीक दुश्मन के खतरों को पहचानने में उतनी प्रभावी नहीं है जितनी होनी चाहिए।

इन तमाम चुनौतियों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस विमान की मांग का मुख्य कारण इसकी कम कीमत है। JF-17 की तुलना अक्सर भारत के तेजस और अमेरिका के F-16 जैसे विमानों से की जाती है।

सस्ते विकल्प की तलाश कर रहे देशों के लिए JF-17 एक आकर्षक विकल्प बनकर उभरा है। पाकिस्तान को उम्मीद है कि आने वाले समय में वह रक्षा निर्यात के क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत कर पाएगा।

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