Highlights
- हाईकोर्ट ने फागी-दूदू सड़क मार्ग पर तोड़फोड़ की कार्रवाई पर 13 जनवरी तक रोक लगाई।
- नगर पालिका द्वारा बिना नोटिस दिए 60 साल पुराने पट्टे निरस्त करने को दी गई चुनौती।
- जस्टिस अनुरूप सिंघी की एकलपीठ ने स्थानीय निकाय सचिव और अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किया।
- राज्य सरकार को आगामी सुनवाई की तारीख 13 जनवरी तक अदालत में जवाब पेश करना होगा।
जयपुर | राजस्थान हाईकोर्ट ने फागी-दूदू सड़क मार्ग की चौड़ाई बढ़ाने और इसके सौंदर्यीकरण के मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने नगर पालिका द्वारा संपत्तियों को तोड़ने के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर यह कार्रवाई की है।
जस्टिस अनुरूप सिंघी की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रमुख स्थानीय निकाय सचिव और सार्वजनिक निर्माण विभाग के सचिव को नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही फागी के उपखण्ड अधिकारी और नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी से भी जवाब मांगा गया है।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि 13 जनवरी तक याचिकाकर्ताओं की संपत्तियों पर किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं की जाएगी। अदालत ने अधिकारियों को इस तिथि तक अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट लक्ष्मीकांत शर्मा मालपुरा ने पैरवी करते हुए कोर्ट को महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रभावित लोगों के पास करीब 60 साल पुराने वैध पट्टे मौजूद हैं।
बिना नोटिस पट्टे निरस्त करने का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि नगर पालिका ने सड़क चौड़ी करने के लिए बिना किसी पूर्व नोटिस के पट्टे निरस्त कर दिए। यह कार्रवाई नगर पालिका एक्ट की धारा 73 बी के तहत सार्वजनिक सूचना देकर की गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनकी संपत्तियों को अतिक्रमण बताकर निर्माण कार्यों को तोड़ने की चेतावनी दी जा रही है। इस प्रक्रिया को पूरी तरह से अवैध और मनमाना बताया गया है।
सरकारी पक्ष और कोर्ट का आदेश
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता जीएस गिल ने जवाब पेश करने के लिए अदालत से समय मांगा। उन्होंने कोर्ट को आश्वासन दिया कि 13 जनवरी तक कोई तोड़फोड़ नहीं होगी।
सुनवाई के समय नगर पालिका फागी के अधिशाषी अधिकारी राजपाल बुनकर भी अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। अब इस मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 13 जनवरी को निर्धारित की गई है।
इस आदेश से उन स्थानीय निवासियों को बड़ी राहत मिली है जिनकी संपत्तियों पर बुलडोजर चलने का खतरा मंडरा रहा था। अदालत अब सरकार के जवाब के आधार पर आगे का फैसला लेगी।
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