Jaipur | आज 4 दिसंबर को रुपया डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर 90.43 पर आ गया है। विदेशी फंड्स की लगातार निकासी और अमेरिकी टैरिफ (US Tariffs) के कारण यह गिरावट आई है, जिससे आयात और विदेश में पढ़ाई महंगी होगी।
रुपया गिरा: रुपया डॉलर के मुकाबले 90.43 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर
आज 4 दिसंबर को रुपया डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर 90.43 पर आ गया है। विदेशी फंड्स की लगातार निकासी और अमेरिकी टैरिफ (US Tariffs) के कारण यह गिरावट आई है, जिससे आयात और विदेश में पढ़ाई महंगी होगी।
HIGHLIGHTS
- रुपया डॉलर के मुकाबले 90.43 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा। विदेशी फंड्स की निकासी और अमेरिकी टैरिफ मुख्य कारण। आयात, विदेश में पढ़ाई और यात्रा हुई महंगी। RBI का हस्तक्षेप कम रहा, जिससे गिरावट और तेज हुई।
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समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) के अनुसार, आज डॉलर के मुकाबले रुपया 28 पैसे गिरकर 90.43 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि कल यह 90.15 पर था। साल 2025 में रुपया डॉलर के मुकाबले 5.5% कमजोर हो चुका है, जो 1 जनवरी को 85.70 के स्तर पर था।
रुपए में गिरावट के मुख्य कारण
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा भारतीय आयात पर 50% टैरिफ लगाने से भारत की जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth) पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इससे निर्यात घटता है और विदेशी मुद्रा की आमद कम होती है, जिससे रुपए पर दबाव बनता है।
जुलाई 2025 से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय एसेट्स से 1.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है। यह निकासी अमेरिकी ट्रेड टैरिफ की चिंताओं के कारण हुई है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ी है। तेल और सोने की कंपनियां भी हेजिंग (Hedging) के लिए डॉलर खरीद रही हैं, जिससे रुपए पर लगातार दबाव बना हुआ है।
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आयात और विदेश यात्रा पर असर
रुपए की गिरावट का सीधा असर भारत के आयात बिल (Import Bill) पर पड़ता है, जिससे वस्तुओं का आयात महंगा हो जाता है। उदाहरण के लिए, अब 1 डॉलर के लिए 90.21 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं, जबकि पहले यह 50 रुपए था। इससे विदेश में शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों के लिए फीस और अन्य खर्च काफी बढ़ गए हैं।
RBI का हस्तक्षेप और भविष्य की उम्मीदें
एलकेपी सिक्योरिटीज (LKP Securities) के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी (Jatin Trivedi) ने बताया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील (India-US Trade Deal) पर ठोस खबर न आने से रुपए की तेज बिकवाली हुई है। उन्होंने कहा कि मेटल और गोल्ड की ऊंची कीमतों ने आयात बिल को बढ़ाया है। इस बार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का हस्तक्षेप भी काफी कम रहा है, जिससे गिरावट और तेज हुई।
बाजार को उम्मीद है कि शुक्रवार को आने वाली आरबीआई पॉलिसी (RBI Policy) में केंद्रीय बैंक करेंसी को स्थिर करने के लिए कुछ कदम उठाएगा। तकनीकी रूप से रुपया बहुत ज्यादा ओवरसोल्ड (Oversold) हो चुका है।
करेंसी की कीमत कैसे तय होती है?
डॉलर की तुलना में किसी भी अन्य करेंसी की वैल्यू घटने को मुद्रा का कमजोर होना (Currency Depreciation) कहते हैं। हर देश के पास फॉरेन करेंसी रिजर्व (Foreign Currency Reserve) होता है, जिसका उपयोग अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के लिए किया जाता है। इस रिजर्व के घटने या बढ़ने का असर करेंसी की कीमत पर सीधा दिखता है।