राम झरोखा भूमि विवाद: सिरोही राम झरोखा मंदिर भूमि घोटाला मामले में संयम लोढ़ा ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग

सिरोही राम झरोखा मंदिर भूमि घोटाला मामले में संयम लोढ़ा ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग
संयम लोढ़ा ने जयपुर में प्रमुख सचिवों से मुलाकात
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Highlights

  • संयम लोढ़ा ने शासन सचिवालय में देवस्थान और स्वायत्त शासन विभाग के प्रमुख सचिवों से मुलाकात की।
  • राम झरोखा मंदिर की भूमि को अवैध रूप से लीज पर देने और बेचान करने की उच्च स्तरीय जांच की मांग।
  • राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए स्थानीय जांच को मिलीभगत और संदेहास्पद बताया।
  • मंदिर की संपत्ति पर तत्काल रिसीवर नियुक्त करने और दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आग्रह।

जयपुर | पूर्व मुख्यमंत्री सलाहकार संयम लोढ़ा ने जयपुर में शासन सचिवालय का दौरा किया। उन्होंने देवस्थान विभाग की सचिव शूची त्यागी और स्वायत्त शासन विभाग के प्रमुख सचिव रवि जैन से महत्वपूर्ण मुलाकात की।

प्रमुख सचिवों से मुलाकात और जांच की मांग

लोढ़ा ने सिरोही के प्रसिद्ध राम झरोखा मंदिर की भूमि को खुर्द-बुर्द करने का मामला उठाया। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि मंदिर की भूमि का अवैध बेचान और लीज किया गया है।

इस आपराधिक मामले में उन्होंने तुरंत एक उच्च स्तरीय जांच दल गठित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस मामले की गहराई से जांच होना जनहित में आवश्यक है।

लोढ़ा ने राजस्थान उच्च न्यायालय के हालिया आदेश का भी विस्तार से हवाला दिया। माननीय न्यायालय ने नगर परिषद और राज्य सरकार को इस मामले में नए सिरे से जांच करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने अधिकारियों को बताया कि सिरोही जिला कलेक्टर को इस बारे में पहले ही सूचित किया जा चुका था। उन्होंने 2 जनवरी को ही प्रशासन को नगर परिषद की जांच रिपोर्ट के बारे में अवगत कराया था।

स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर सवाल

लोढ़ा के अनुसार नगर परिषद द्वारा पेश की गई जांच रिपोर्ट पूरी तरह से मिलीभगत का परिणाम है। उन्होंने इस रिपोर्ट को संदेहास्पद और दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।

जिला प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने पर उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की। इसके बाद दोनों उच्च अधिकारियों ने जयपुर से एक विशेष जांच दल भेजने का भरोसा दिलाया है।

यह दल मौके पर जाकर संपूर्ण प्रकरण की विस्तृत जांच करेगा और रिपोर्ट पेश करेगा। लोढ़ा ने स्पष्ट किया कि राम झरोखा मंदिर और उसकी संरचनाएं सिरोही की सांस्कृतिक धरोहर हैं।

मंदिर की भूमि का बेचान केवल एक धार्मिक मुद्दा नहीं है बल्कि यह सामाजिक हित से जुड़ा है। यह नागरिकों के कानूनी और सांस्कृतिक हितों को भी सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण

धार्मिक विरासत और सार्वजनिक हित की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। नागरिक अधिकारों और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए इस भूमि की सुरक्षा जरूरी है।

समाज और कानून दोनों ही इस प्रकार के अवैध भू-परिवर्तन का कड़ा विरोध करते हैं। सांस्कृतिक धरोहर का बेचान धार्मिक और भावनात्मक रूप से अत्यंत संवेदनशील विषय है।

वर्तमान कानून और न्याय व्यवस्था के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया पूर्णतः अवैध मानी जा रही है। लोढ़ा ने बताया कि जिला कांग्रेस कमेटी ने भी इस संबंध में ज्ञापन सौंपा था।

9 दिसंबर 2025 को सौंपे गए ज्ञापन में पट्टा निरस्त करने की मांग की गई थी। इसमें धर्मार्थ संपत्ति पर रिसीवर नियुक्त करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया था।

अवैध हस्तांतरण और करोड़ों का लेनदेन

करोड़ों रुपये के अवैध हस्तांतरण पर आपराधिक कार्यवाही करने के लिए भी निवेदन किया गया था। जिला कलेक्टर ने इसके बाद नगर परिषद को पट्टा निरस्तीकरण के आदेश दिए थे।

पट्टाधारकों को नोटिस भी जारी किए गए थे लेकिन पूरी प्रक्रिया को दुर्भावनापूर्ण बताया गया है। माननीय उच्च न्यायालय जोधपुर ने इसी कारण प्रकरण को रिमांड पर भेजा है।

अदालत ने नए सिरे से निष्पक्ष जांच करने और दोषियों पर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। लोढ़ा ने ज्ञापन में महंत जयरामदास के वसीयतनामे का भी विशेष उल्लेख किया है।

वसीयतनामे के अनुसार मंदिर की भूमि का बेचान या हस्तांतरण पूरी तरह से वर्जित है। इसके बावजूद महंत सीतारामदास ने मंदिर परिसर की जमीन का हस्तांतरण कर दिया।

लीज डीड और निजी संस्थानों की संलिप्तता

यह हस्तांतरण आदर्श शिक्षा समिति सिरोही को 99 वर्ष की लीज पर दिया गया है। लीज की अवधि 1 जून 2025 से शुरू होकर 31 जुलाई 2124 तक दर्शाई गई है।

इस अवैध सौदे में 75 लाख रुपये का प्रतिफल भुगतान दिखाया गया है। आदर्श शिक्षा समिति एक निजी संस्थान है जो व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करती है।

जिला कलेक्टर ने पट्टा संख्या 43 से 50 तक को निरस्त करने के आदेश दिए थे। हालांकि लोढ़ा ने पूरी जांच प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

उन्होंने कहा कि पट्टा जारी करने वाले अधिकारियों ने ही खुद इसकी जांच की है। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन और हितों का टकराव है।

प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन

जिस अधिकारी ने पट्टा जारी किया वह उसकी अनियमितता की निष्पक्ष जांच नहीं कर सकता। इससे पूरी जांच प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण हो गई और इसकी वैधता समाप्त हो गई।

जांचकर्ताओं ने इस गंभीर मामले को केवल प्रक्रियात्मक अनियमितता बताकर टालने की कोशिश की है। जबकि यह मामला एक गंभीर कानूनी अनियमितता का उदाहरण है।

लीज डीड संख्या 169 और 75 लाख की राशि के लेनदेन पर कोई ठोस जांच नहीं हुई। राम झरोखा मंदिर जोधपुर देवस्थान विभाग में एक पंजीकृत प्रन्यास के रूप में दर्ज है।

नियमों के अनुसार पंजीकृत लोक न्यास की अचल संपत्ति बिना अनुमति के हस्तांतरित नहीं हो सकती। राजस्थान उच्च न्यायालय ने भी अपने फैसलों में स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

वित्तीय अनियमितताएं और आयकर नियम

कोर्ट के अनुसार बेचान की राशि मंदिर के बजाय देवस्थान विभाग के खाते में जमा होनी चाहिए। इस मामले में 75 लाख रुपये का नकद लेनदेन आयकर नियमों का भी उल्लंघन है।

आयकर अधिनियम की धारा 269 एसटी के तहत इस तरह का लेनदेन प्रतिबंधित है। जिला कलेक्टर ने काली कमाई और अघोषित आय के पहलू पर कोई गौर नहीं किया।

दस्तावेज सामने आने के बावजूद उन्हें तत्काल जब्त नहीं किया गया जो कानून का उल्लंघन है। लोढ़ा ने कहा कि जिला कलेक्टर स्वयं जिला पंजीयन अधिकारी भी होती हैं।

संपत्तियों का भौतिक कब्जा हस्तांतरित होने से विवाद और अधिक बढ़ गया है। जांच रिपोर्ट में दस्तावेज अवैध पाए जाने के बाद भी रिसीवर नियुक्त नहीं किया गया।

सुरक्षा और रिसीवर की नियुक्ति की आवश्यकता

स्वामित्व और कब्जे के विवाद के कारण मौके पर भारी न्यूसेंस की स्थिति बनी हुई है। धार्मिक भावनाओं से जुड़े होने के कारण यहां कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

संपत्ति की सुरक्षा के लिए तत्काल प्रभाव से रिसीवर की नियुक्ति अनिवार्य हो गई है। पंजीकृत प्रन्यास की भूमि होने के बावजूद स्वामित्व की सही जांच नहीं की गई।

खरीददार द्वारा मंदिर की संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने की कोशिशें लगातार जारी हैं। आगामी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों के मद्देनजर यह मामला और संवेदनशील है।

धार्मिक संपत्तियों से जुड़े विवाद सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक व्यवस्था को बिगाड़ सकते हैं। सरकार को समय रहते इस पर कड़ी और निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए।

दोषियों पर कार्यवाही और संपत्ति की वापसी

लोढ़ा ने मांग की कि मौके और रिकॉर्ड के अनुसार वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट मंगवाई जाए। दोषियों के विरुद्ध तुरंत आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के आदेश जारी किए जाएं।

संपत्ति का भौतिक हस्तांतरण वापस मंदिर और मूर्ति के नाम पर किया जाना चाहिए। बेचान और लीज से जुड़े सभी दस्तावेजों को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।

उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे इस सांस्कृतिक धरोहर को बचाने के लिए कड़े कदम उठाएं। अधिकारियों ने भी मामले की गंभीरता को समझते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

सिरोही की जनता इस मामले में न्याय की प्रतीक्षा कर रही है। लोढ़ा ने अंत में कहा कि वे इस लड़ाई को तार्किक परिणति तक लेकर जाएंगे।

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