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राज्य

कांग्रेस का विरोध: सरकारी बैठकों में भाजपा पदाधिकारियों की मौजूदगी पर कांग्रेस का विरोध

गणपत सिंह मांडोली

एनसयूआई (NSUI) राष्ट्रीय संयोजक दशरथ नरुका (Dashrath Naruka) के नेतृत्व में कांग्रेस (Congress) कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्टर (District Collector) से मिलकर सरकारी बैठकों में भाजपा (BJP) पदाधिकारियों की मौजूदगी पर आपत्ति जताई। उन्होंने इसे नियमविरुद्ध बताया।

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HIGHLIGHTS

  • सरकारी बैठकों में भाजपा पदाधिकारियों की मौजूदगी पर कांग्रेस ने जताई आपत्ति। एनएसयूआई राष्ट्रीय संयोजक दशरथ नरुका के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने की शिकायत। कांग्रेस ने इसे नियमविरुद्ध बताते हुए गोपनीयता भंग होने का आरोप लगाया। अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए गए।

जयपुर: एनसयूआई (NSUI) राष्ट्रीय संयोजक दशरथ नरुका (Dashrath Naruka) के नेतृत्व में कांग्रेस (Congress) कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्टर (District Collector) से मिलकर सरकारी बैठकों में भाजपा (BJP) पदाधिकारियों की मौजूदगी पर आपत्ति जताई। उन्होंने इसे नियमविरुद्ध बताया।

सरकारी बैठकों में भाजपा की दखलंदाजी

कांग्रेसजनों ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

एनएसयूआई राष्ट्रीय संयोजक दशरथ नरुका के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने अपनी शिकायत दर्ज कराई।

उन्होंने बताया कि लगातार यह देखा जा रहा है कि प्रशासनिक बैठकों में भाजपा नेता शामिल होते हैं।

यह पूरी तरह से नियमविरुद्ध है और इससे बैठकों की गोपनीयता भंग होती है।

अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के आरोप

नरुका ने कहा कि ऐसे पदाधिकारी बाहर जाकर अधिकारियों व कर्मचारियों पर रौब जमाते हैं।

उनसे अवैध वसूली की जाती है, जिससे कर्मचारी वर्ग परेशान है।

कांग्रेसजनों ने आरोप लगाया कि सभी विभागों में टेंडर में घपला किया जा रहा है।

अधिकारियों पर दबाव बनाकर उनसे अनैतिक कार्य करवाए जा रहे हैं।

जिला प्रशासन पर निष्क्रियता का आरोप

यह सब जिला प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।

उन्होंने जिला कलेक्टर से इस मामले में तुरंत कार्रवाई की मांग की।

कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि इस पर रोक नहीं लगी तो वे आंदोलन करेंगे।

यह मुद्दा राज्य की राजनीति में गर्माता जा रहा है और विपक्ष सरकार पर हमलावर है।

कर्मचारी वर्ग में भी इस दखलंदाजी को लेकर भारी रोष व्याप्त है।

प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।

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