सिरोही: सडक़ बदहाली बनाम वीआईपी सुईट: टूटी सडक़ों पर जान गंवा रहे और मंत्रीजी वीआईपी सुईट बनवा रहे

टूटी सडक़ों पर जान गंवा रहे और मंत्रीजी वीआईपी सुईट बनवा रहे
सिरोही: सडक़ बदहाली बनाम वीआईपी सुईट
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Highlights

  • सिरोही के गोयली चौराहे पर टूटी सडक़ के कारण एक किशोरी की दर्दनाक मौत।
  • सर्किट हाउस में वीआईपी सुईट और कमरों के लिए 1.64 करोड़ की स्वीकृति।
  • शहर का हृदय स्थल और एसीबी कार्यालय के बाहर की सडक़ें भी पूरी तरह बदहाल।
  • मांडवा हनुमान मंदिर के पास भी सडक़ हादसे में जा चुकी है एक युवक की जान।

सिरोही | सिरोही जिले में विकास की प्राथमिकताएं वर्तमान में गंभीर सवालों के घेरे में हैं। एक तरफ जहां आम जनता टूटी सडक़ों के कारण अपनी जान गंवाने को मजबूर है, वहीं दूसरी तरफ वीआईपी सुविधाओं पर करोड़ों का बजट खर्च किया जा रहा है। सिरोही के गोयली चौराहे पर महज दो दिन पहले टूटी सडक़ के कारण एक किशोरी की जान चली गई, जिससे पूरे शहर में शोक और आक्रोश की लहर है। विडंबना यह है कि शहर गड्ढों में गुम हो रहा है और सिरोही के विधायक व राज्यमंत्री वीआईपी सुविधाएं बढ़ाने के लिए एक करोड़ 64 लाख रुपये स्वीकृत करवा रहे हैं।

सडक़ों की बदहाली और जानलेवा हादसे

सिरोही शहर का गोयली चौराहा इन दिनों हादसों का केंद्र बना हुआ है। सडक़ पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण स्कूटी सवार बालिकाएं असंतुलित होकर गिर गई थीं, जिसमें हाईवे से गुजर रहे वाहन की चपेट में आने से एक की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गईं। इसी तरह कुछ दिन पहले मांडवा हनुमान मंदिर के समीप भी एक सडक़ हादसे में ऑटो चालक की मौत हो चुकी है। शहर से गुजरने वाला हाईवे जगह-जगह से क्षतिग्रस्त है, लेकिन इन हादसों के बावजूद सुधार की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

सर्किट हाउस के लिए भारी बजट की स्वीकृति

जनता की सुरक्षा की अनदेखी के बीच राज्यमंत्री ओटाराम देवासी ने सिरोही सर्किट हाउस में दो वीआईपी सुईट और तीन अतिरिक्त कमरों के निर्माण के लिए एक करोड़ 64 लाख रुपये की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी करवाई है। मंत्रीजी की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार उन्होंने प्रबंधक सर्किट हाउस और सार्वजनिक निर्माण विभाग से इसके प्रस्ताव मंगवाए थे। उन्होंने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को पत्र लिखकर तर्क दिया था कि वीआईपी और पर्यटकों का भारी संख्या में आना-जाना रहता है, जिसके लिए वर्तमान कमरे अपर्याप्त हैं।

शहर के भीतरी इलाकों का बुरा हाल

जिला मुख्यालय की सडक़ें ही नहीं बल्कि शहर के भीतरी भाग भी बदहाली का शिकार हैं। गांधी पार्क के पास स्थित सर्किट हाउस का नजदीकी सर्किल लंबे समय से क्षतिग्रस्त है। एसीबी कार्यालय के बाहर सडक़ की हालत इतनी खराब है कि दुपहिया वाहन चालक अक्सर असंतुलित होकर गिर रहे हैं। सदर बाजार में सिनेमा रोड पूरी तरह डैमेज हो चुका है और सरजावाव दरवाजे की संपर्क सडक़ों का भी यही हाल है। घांचीवाड़ा, कृष्णापुरी, भाटकड़ा और ब्रह्मपुरी जैसे इलाकों में सडक़ें अर्से से मरम्मत का इंतजार कर रही हैं।

जनता की मांग और प्रशासनिक उदासीनता

शहरवासियों का कहना है कि सर्किट हाउस में वीआईपी सुईट बनवाने से ज्यादा जरूरत इन जानलेवा गड्ढों को भरने की है। प्रशासन द्वारा कुछ जगहों पर पैबंद लगाए गए हैं, लेकिन वे नाकाफी साबित हो रहे हैं। सडक़ों की बदहाली से न केवल यातायात बाधित हो रहा है, बल्कि लोगों का जीवन भी खतरे में है। व्यापारियों का कहना है कि खराब सडक़ों के कारण उनके कारोबार पर भी बुरा असर पड़ रहा है। धूल और गंदगी से लोग परेशान हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों का ध्यान केवल वीआईपी सुविधाओं पर केंद्रित है।

प्राथमिकताओं पर उठते सवाल

सिरोही की जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि क्या वीआईपी का आराम आम नागरिक की जान से ज्यादा कीमती है। एक करोड़ 64 लाख रुपये की बड़ी राशि से शहर की कई मुख्य सडक़ों का कायाकल्प किया जा सकता था। गोयली चौराहे जैसे संवेदनशील स्थानों पर सडक़ मरम्मत की तत्काल आवश्यकता है ताकि भविष्य में किसी और मासूम की जान न जाए। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सडक़ों को दुरुस्त नहीं किया गया तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

प्रशासनिक अधिकारियों को चाहिए कि वे केवल कागजी कार्रवाई और वीआईपी प्रस्तावों तक सीमित न रहकर धरातल पर उतरें। शहर की सडक़ों का निरीक्षण कर उन्हें सुरक्षित बनाया जाना चाहिए। जब तक बुनियादी ढांचा मजबूत नहीं होगा, तब तक वीआईपी सुईट और अन्य विलासिता की वस्तुएं बेमानी हैं। सिरोही के निवासियों को अब उम्मीद है कि सरकार उनकी परेशानियों को समझेगी और सडक़ों की स्थिति सुधारने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य शुरू करेगी।

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