थरूर की विदेश नीति पर टिप्पणी: थरूर बोले- प्रधानमंत्री का हारना भारत के हारने जैसा: विदेश नीति पार्टी नहीं, देश की होती है; पाकिस्तान से खतरे को नजरअंदाज न करें

थरूर बोले- प्रधानमंत्री का हारना भारत के हारने जैसा: विदेश नीति पार्टी नहीं, देश की होती है; पाकिस्तान से खतरे को नजरअंदाज न करें
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Highlights

  • विदेश नीति भाजपा या कांग्रेस की नहीं, बल्कि पूरे भारत की होती है।
  • प्रधानमंत्री की हार को भारत की हार के रूप में देखा जाना चाहिए।
  • पाकिस्तान हाइपरसोनिक मिसाइल और ड्रोन तकनीक से सुरक्षा खतरे बढ़ा रहा है।
  • बांग्लादेश की अस्थिरता भारत के लिए सॉफ्ट अंडरबेली साबित हो सकती है।

नई दिल्ली | कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने हाल ही में भारत की विदेश नीति और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिए हैं। एक प्रमुख मीडिया संस्थान के साथ चर्चा के दौरान उन्होंने पाकिस्तान की राजनीति, अर्थव्यवस्था और चीन के बढ़ते प्रभाव पर विस्तार से प्रकाश डाला। थरूर ने स्पष्ट किया कि विदेश नीति भाजपा या कांग्रेस जैसे राजनीतिक दलों की निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत राष्ट्र की नीति होती है। उन्होंने कहा कि जब हम अंतरराष्ट्रीय मंच पर होते हैं, तो हम एक राष्ट्र के रूप में खड़े होते हैं।

शशि थरूर ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रधानमंत्री का नेतृत्व देश का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई राजनीति में प्रधानमंत्री की हार पर खुशी मनाता है, तो वह वास्तव में भारत की हार का जश्न मना रहा होता है। थरूर ने पंडित जवाहरलाल नेहरू के प्रसिद्ध शब्दों को याद करते हुए कहा कि यदि भारत ही नहीं बचेगा, तो कोई और कैसे जीवित रह सकता है। यह बयान दर्शाता है कि राष्ट्रीय हितों के मामले में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सोचने की आवश्यकता है। विपक्ष में होने के बावजूद उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति पर एकता का संदेश दिया है।

पाकिस्तान से बढ़ता सुरक्षा खतरा

पाकिस्तान के संदर्भ में थरूर ने भारत को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान अपनी सैन्य रणनीति में बड़े बदलाव कर रहा है। अब वह पारंपरिक युद्ध के बजाय हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक और छिपकर हमला करने की रणनीति पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है। पाकिस्तान द्वारा ड्रोन और रॉकेट तकनीक का बढ़ता उपयोग भारत की सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती है। थरूर ने चेतावनी दी कि भारत को इन आधुनिक खतरों को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि यह तकनीक युद्ध का स्वरूप बदल रही है।

पाकिस्तान की आंतरिक अस्थिरता और अर्थव्यवस्था

थरूर ने पाकिस्तान की वर्तमान स्थिति को अत्यंत जटिल बताया। उनके अनुसार, पाकिस्तान में नागरिक सरकार का अस्तित्व केवल नाम मात्र का है, जबकि वास्तविक शक्ति वहां की सेना के पास सुरक्षित है। पाकिस्तान की जीडीपी वृद्धि दर वर्तमान में लगभग 2.7 प्रतिशत है, जो भारत की 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर के मुकाबले काफी कम है। थरूर ने कहा कि पाकिस्तान की कमजोर आर्थिक स्थिति उसे भविष्य में खतरनाक और अप्रत्याशित कदम उठाने के लिए उकसा सकती है, जो पूरे दक्षिण एशिया के लिए जोखिम भरा हो सकता है। वहां की सेना नीति निर्धारण में हावी रहती है और उसी के हिसाब से फैसले लिए जाते हैं।

बांग्लादेश की चुनौतियां और भारत का हित

पड़ोसी देश बांग्लादेश के बारे में बात करते हुए थरूर ने वहां बढ़ते ऊर्जा संकट और महंगाई का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में निवेशकों का भरोसा कम हो रहा है और वहां की आंतरिक अस्थिरता भारत के लिए चिंता का विषय है। बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच हालिया रक्षा समझौतों की चर्चा पर उन्होंने कहा कि यह भारत को एक शत्रु के रूप में चित्रित करने की कोशिश हो सकती है। थरूर ने आगाह किया कि बांग्लादेश की अस्थिरता उसे भारत की सॉफ्ट अंडरबेली बना सकती है, जिससे पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। जमात-ए-इस्लामी जैसी ताकतों का उदय स्थिति को और अधिक गंभीर बना रहा है।

क्षेत्रीय संपर्क और विकास की संभावनाएं

अंत में, थरूर ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के महत्व पर बात की। भारत ने बांग्लादेश के विकास के लिए बंदरगाहों, रेल मार्गों और ऊर्जा ग्रिड से जुड़ी कई योजनाएं पेश की हैं। थरूर का मानना है कि ये परियोजनाएं दोनों देशों के आर्थिक हितों के लिए आवश्यक हैं और इससे पूरे क्षेत्र की समृद्धि बढ़ेगी। हालांकि, इन योजनाओं की सफलता बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिरता और सुरक्षा वातावरण पर निर्भर करती है। भारत के लिए अपने पड़ोस में शांति बनाए रखना उसकी अपनी प्रगति और सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। थरूर ने स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार की जानी चाहिए।

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