यस बैंक-अनिल अंबानी मनी लॉन्ड्रिंग केस: ED ने राणा कपूर से की अनिल अंबानी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ

ED ने राणा कपूर से की अनिल अंबानी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ
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Highlights

  • ED ने यस बैंक के को-फाउंडर राणा कपूर से अनिल अंबानी समूह से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ की।
  • अनिल अंबानी की कंपनियों में ₹11,000 करोड़ से ज्यादा के पब्लिक फंड के दुरुपयोग का आरोप है।
  • ED ने अनिल अंबानी समूह की ₹1120 करोड़ से अधिक की संपत्तियां अटैच की हैं।
  • यस बैंक ने रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस में ₹5,000 करोड़ से अधिक का निवेश किया था, जो बाद में NPA बन गया।

JAIPUR | प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने यस बैंक (Yes Bank) के को-फाउंडर राणा कपूर (Rana Kapoor) से अनिल अंबानी (Anil Ambani) समूह की कंपनियों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ की। कपूर का बयान प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (Prevention of Money Laundering Act) के तहत दर्ज किया गया है।

PTI के मुताबिक, अनिल अंबानी की कंपनियों में ₹11,000 करोड़ से अधिक का पब्लिक फंड भेजा गया है, जिसका कथित तौर पर दुरुपयोग हुआ है।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) का दावा है कि इस मामले में लोगों के पैसे को यस बैंक के माध्यम से अनिल अंबानी की कंपनियों में ट्रांसफर किया गया।

राणा कपूर से यह पूछताछ इसी बड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इससे पहले, ED अनिल अंबानी की कई संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर चुकी है।

अनिल अंबानी समूह पर ED और CBI की कार्रवाई

ED ने 24 जुलाई को अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप से जुड़े ठिकानों पर व्यापक छापेमारी की थी।

इन छापों में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए गए।

इसके बाद, 23 अगस्त को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भी अनिल अंबानी के घर पर छापेमारी की थी।

दोनों एजेंसियों का लक्ष्य वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की तह तक जाना है।

यस बैंक और अनिल अंबानी समूह का कनेक्शन: तीन सवालों में समझें

सवाल 1: यस बैंक और अनिल अंबानी की कंपनियों ने क्या किया?

यस बैंक ने अनिल अंबानी ग्रुप की दो कंपनियों में बड़ा निवेश किया था।

इनमें रिलायंस होम फाइनेंस (RHFL) में ₹2,965 करोड़ और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस (RCFL) में ₹2,045 करोड़ का निवेश शामिल है।

यह पैसा यस बैंक को रिलायंस निप्पॉन म्यूचुअल फंड से प्राप्त हुआ था, जो आम जनता का पैसा था।

ED का आरोप है कि म्यूचुअल फंड सीधे अंबानी ग्रुप में निवेश नहीं कर सकता था, क्योंकि SEBI के नियम इसकी इजाजत नहीं देते।

इसलिए, पैसे को अप्रत्यक्ष रूट से भेजा गया: म्यूचुअल फंड से यस बैंक में, और फिर बैंक से अंबानी की कंपनियों को।

दिसंबर 2019 तक, यस बैंक द्वारा किए गए ये सभी निवेश नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) या बैड लोन बन गए।

कुल मिलाकर, ₹11,000 करोड़ से अधिक के पब्लिक फंड्स के दुरुपयोग का गंभीर संदेह है।

सवाल 2: ED की जांच में अब तक क्या सामने आया है?

ED का कहना है कि यह स्पष्ट मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है, क्योंकि जनता के पैसे को गलत तरीके से रूट किया गया।

यस बैंक के को-फाउंडर राणा कपूर से सोमवार को इसी सिलसिले में पूछताछ की गई।

उनका बयान प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धाराओं के तहत रिकॉर्ड किया गया है।

जांच में यस बैंक और अंबानी ग्रुप के बीच के वित्तीय लेनदेन और लिंक की गहनता से पड़ताल की जा रही है।

ED को संदेह है कि SEBI के नियमों का उल्लंघन हुआ है और आम जनता के पैसे का दुरुपयोग किया गया है।

सवाल 3: आगे क्या होगा?

प्रवर्तन निदेशालय की जांच अभी भी जारी रहेगी।

राणा कपूर से मिली जानकारी के आधार पर और भी लोगों या दस्तावेजों की जांच की जा सकती है।

यदि पर्याप्त और पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो इस मामले में जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।

यह मामला पुराना है, लेकिन अब इसमें तेजी से प्रगति हो रही है।

इस जांच का सीधा असर यस बैंक और रिलायंस ग्रुप दोनों पर पड़ सकता है।

अनिल अंबानी समूह की ₹1120 करोड़ से अधिक की संपत्तियां अटैच

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अंबानी से जुड़ी कंपनियों की कुल ₹10,117 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की है।

हालिया कार्रवाई में, मुंबई के बॉलार्ड एस्टेट स्थित रिलायंस सेंटर, फिक्स डिपॉजिट (FD), बैंक बैलेंस और अनलिस्टेड निवेश सहित 18 संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की गई हैं।

इसके साथ ही, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर की 7, रिलायंस पावर की 2 और रिलायंस वैल्यू सर्विसेज की 9 संपत्तियां भी फ्रीज की गई हैं।

ED ने समूह की अन्य कंपनियों जैसे रिलायंस वेंचर एसेट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड और फाई मैनेजमेंट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के FD और निवेश भी अटैच किए हैं।

इससे पहले, बैंक लोन फ्रॉड से जुड़े मामलों में ED रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस और रिलायंस होम फाइनेंस की ₹8,997 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्तियां अटैच कर चुकी है।

इन लगातार हो रही कार्रवाइयों से यह साफ है कि नियामक एजेंसियां वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ सख्त रुख अपना रही हैं।

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