Highlights
- जालोर एसपी ने रिश्वत मामले में दो पुलिस जवानों को निलंबित किया।
- बजरी माफिया से ट्रेक्टर छोड़ने के बदले दस हजार की रिश्वत मांगी गई थी।
- थिंक 360 की खबर के बाद पुलिस महकमे में मचा हड़कंप।
- मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसपी ने दिए सख्त आदेश।
जालोर | राजस्थान के जालोर जिले में पुलिस महकमे को शर्मसार करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ बजरी के अवैध कारोबार में खाकी की मदद करने वाले दो जवानों पर गाज गिरी है।
पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र सिंह ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए यह कड़ा कदम उठाया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि खाकी की आड़ में अवैध काम करने वालों को विभाग में बख्शा नहीं जाएगा।
थिंक 360 की खबर का बड़ा असर
जालोर जिले में अवैध बजरी खनन और परिवहन का खेल काफी समय से चल रहा था। थिंक 360 ने इस पूरे प्रकरण को प्रमुखता से उठाते हुए रिश्वतखोरी के खेल का पर्दाफाश किया था।
खबर प्रसारित होने के बाद पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों में खलबली मच गई और प्रशासन हरकत में आया। पुलिस अधीक्षक ने तुरंत संज्ञान लेते हुए पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश जारी किए।
मीडिया में खबर आने के बाद से ही पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे थे। जनता के बीच पुलिस की छवि को सुधारने के लिए यह कार्रवाई अत्यंत आवश्यक मानी जा रही थी।
रिश्वत का ऑडियो और पूरा घटनाक्रम
यह पूरा मामला एक कथित ऑडियो क्लिप के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद चर्चा में आया था। जसवंतपुरा थाना क्षेत्र की सुंधा माता चौकी पर तैनात कांस्टेबल भंवरलाल बिश्नोई का ऑडियो सामने आया था।
इस ऑडियो में कांस्टेबल बजरी से भरे ट्रैक्टर को छोड़ने के बदले दस हजार रुपये की मांग कर रहा था। ट्रैक्टर मालिक और पुलिसकर्मी के बीच हुई इस बातचीत ने भ्रष्टाचार की पूरी पोल खोल दी।
बताया जा रहा है कि पुलिसकर्मी ने ट्रैक्टर तो पहले ही छोड़ दिया था लेकिन पैसे बाद में मिलने थे। जब ट्रैक्टर मालिक ने वादा पूरा नहीं किया तो सिपाही ने फोन पर उसे धमकाना शुरू कर दिया।
पैसे नहीं मिलने पर सिपाही का गुस्सा फूट पड़ा और उसने अपनी नाराजगी फोन पर ही जाहिर की। यही बातचीत रिकॉर्ड हो गई और अब पुलिस विभाग के लिए गले की फांस बन गई है।
दो अलग-अलग थानों के जवानों पर गिरी गाज
एसपी की प्रारंभिक जांच में केवल एक सिपाही नहीं बल्कि दो पुलिसकर्मियों की संलिप्तता पाई गई है। निलंबित होने वालों में भंवरलाल बिश्नोई और भीनमाल थाने में तैनात दिनेश शामिल हैं।
इन दोनों जवानों पर बजरी माफिया के साथ सीधा संपर्क रखने और उन्हें अवैध संरक्षण देने का आरोप है। एक साथ दो थानों के जवानों पर कार्रवाई से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।
एसपी शैलेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के किसी भी मामले में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उन्होंने दोनों जवानों को निलंबित कर तुरंत लाइन हाजिर होने के आदेश दिए हैं।
जांच टीम अब इस बात का पता लगा रही है कि इन जवानों ने अब तक कितने ट्रैक्टरों को अवैध रूप से छोड़ा है। साथ ही माफियाओं के साथ उनके पिछले वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
भ्रष्टाचार की जड़ें और उच्चाधिकारियों की भूमिका
इस मामले के सामने आने के बाद अब पुलिस के आला अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि कांस्टेबल स्तर के कर्मचारी बिना बड़े सहयोग के इतना बड़ा साहस नहीं कर सकते।
बजरी माफिया और पुलिस के बीच यह गठजोड़ काफी पुराना बताया जा रहा है जो लंबे समय से फल-फूल रहा था। स्थानीय निवासियों ने कई बार इसकी मौखिक शिकायत की थी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही थी।
अब जब ऑडियो साक्ष्य के रूप में सामने आ गया है तो पुलिस के लिए जवाब देना मुश्किल हो गया है। चर्चा है कि इस नेटवर्क में कुछ थानाधिकारी भी वरिष्ठ अधिकारियों की रडार पर आ सकते हैं।
गठजोड़ के इस खेल में थानाधिकारियों की भूमिका की भी जांच को लेकर जितने मुंह उतनी बातें हो रही हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह इस नेटवर्क की तह तक जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
जालोर में बजरी माफिया और पुलिस का गठजोड़, सीएम के अभियान की उड़ रही धज्जियां -
पुलिस अधीक्षक का सख्त संदेश
एसपी शैलेंद्र सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पुलिस का काम कानून की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि पुलिस की छवि खराब करने वालों के लिए इस विभाग में कोई जगह नहीं है।
उन्होंने जिले के सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधीन काम करने वाले कर्मचारियों पर कड़ी नजर रखें। किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि में शामिल पाए जाने पर और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सुंधा माता चौकी एक महत्वपूर्ण स्थान है जहाँ से बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही होती है। यहाँ तैनात पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी क्षेत्र में कानून व्यवस्था और नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
पुलिस अधीक्षक ने यह भी निर्देश दिए हैं कि जिले के सभी चेक पोस्ट पर सीसीटीवी कैमरों की स्थिति की जांच की जाए। इससे भविष्य में अवैध गतिविधियों पर डिजिटल माध्यम से निगरानी रखी जा सकेगी।
जनता और मीडिया की भूमिका
इस पूरे मामले में थिंक 360 की खोजी पत्रकारिता की सराहना की जा रही है जिसने इस भ्रष्टाचार को उजागर किया। जागरूक नागरिक और सक्रिय मीडिया के कारण ही आज दोषियों पर यह कार्रवाई संभव हो सकी है।
जालोर की जनता अब उम्मीद कर रही है कि यह जांच केवल निलंबन तक ही सीमित नहीं रहेगी। अवैध बजरी खनन पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
अवैध बजरी खनन से न केवल राजस्व की हानि होती है बल्कि नदियों के प्राकृतिक स्वरूप को भी बड़ा नुकसान पहुँचता है। भूजल स्तर गिरने की एक बड़ी वजह ये बेतहाशा अवैध खनन गतिविधियां ही मानी जाती हैं।
बजरी माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे सड़कों पर तेज रफ्तार ट्रैक्टर दौड़ाते हैं जिससे अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं। पुलिस और माफिया का यह अनैतिक गठजोड़ आम आदमी की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गया है।
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