Rajasthan: कानपुर में रिटायर्ड इंजीनियर की आपबीती: 70 दिन 'डिजिटल अरेस्ट' कर 53 लाख ठगे

कानपुर में रिटायर्ड इंजीनियर की आपबीती: 70 दिन 'डिजिटल अरेस्ट' कर 53 लाख ठगे
कानपुर: रिटायर्ड इंजीनियर 70 दिन 'डिजिटल अरेस्ट'
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Highlights

  • कानपुर के रिटायर्ड इंजीनियर रमेश चंद्र को 70 दिनों तक साइबर ठगों ने 'डिजिटल अरेस्ट' कर रखा।
  • ठगों ने फर्जी पुलिस और सीबीआई अधिकारी बनकर मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे आरोप में 53 लाख रुपये वसूले।
  • इंजीनियर और उनकी पत्नी को 24 घंटे वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा गया और घर से निकलने पर प्रतिबंध था।
  • ठगों ने परिवार को नुकसान पहुंचाने और बेटों का करियर बर्बाद करने की धमकी देकर डराया।

कानपुर। 3 अक्टूबर का दिन, शुक्रवार। सुबह के 9 बजकर 59 मिनट हो रहे थे। कानपुर के लाजपत नगर स्थित मल्टी स्पेशियलिटी गुर्जर हॉस्पिटल (Gurjar Hospital) में रिटायर्ड इंजीनियर रमेश चंद्र (Ramesh Chandra) अपनी पत्नी नीलम (Neelam) का डायलिसिस (Dialysis) करा रहे थे। तभी उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले युवक ने अपना नाम गौरव बताया और एक ऐसी कहानी गढ़ी, जिसने रमेश चंद्र की जिंदगी के अगले 70 दिनों को खौफ और यातना से भर दिया।

गौरव ने बताया कि उसके नाम से एक सिम (SIM) निकालकर महाराष्ट्र (Maharashtra) की एक लड़की को परेशान किया गया है, जिसने बाद में आत्महत्या कर ली। उसने रमेश चंद्र को धमकाया कि यह कॉल कोलाबा पुलिस स्टेशन मुंबई (Colaba Police Station Mumbai) से आ रही है और उनके खिलाफ केस दर्ज हो गया है। फोन कटने के महज 30 सेकंड बाद, एक दूसरे नंबर से कॉल आई। इस बार फोन करने वाले ने खुद को कोलाबा पुलिस स्टेशन से उमेश मछिन्दर (Umesh Machhindar) बताया। उसने रमेश चंद्र से उनकी पूरी निजी जानकारी भेजने को कहा और जैसे ही जानकारी भेजी गई, उमेश ने वीडियो कॉल (Video Call) कर दी।

वीडियो कॉल पर उमेश ने रमेश चंद्र को बताया कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) का एक गंभीर मामला दर्ज है और उन्हें जेल भेजा जाएगा। इसके साथ ही, उनकी पत्नी और बच्चों को घर में ही नजरबंद कर दिया जाएगा। बचने का एक ही रास्ता बताया गया – जैसा ठग कहें, वैसा ही करें। इस एक कॉल ने रमेश चंद्र को 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest) कर लिया। अगले 70 दिनों तक वह अपने ही घर के एक कमरे में कैद रहे, ठगों की लगातार निगरानी में। इस दौरान, ठगों ने उनसे 53 लाख रुपये की बड़ी रकम ऐंठ ली। आज उनके खाते में मात्र 11 हजार रुपये बचे हैं।

ठगी का एहसास होने पर, रमेश चंद्र ने 15 दिसंबर को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने दैनिक भास्कर के साथ अपनी आपबीती साझा की, कि कैसे वह इस जाल में फंसे, पत्नी का डायलिसिस कैसे हुआ और वे 70 दिन उन्होंने कैसे बिताए।

कैसे हुए डिजिटल अरेस्ट: ठगों के जाल में फंसने की शुरुआत

रमेश चंद्र ने बताया कि वह उस वक्त इतने डर गए थे कि किसी को कुछ भी बताने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। रानीघाट थाना क्षेत्र के कोहना स्थित उपवन सोसाइटी (Upvan Society) में रहने वाले रमेश चंद्र केस्को (KESCo) से सुपरिटेंडेंट इंजीनियर (Superintendent Engineer) के पद से रिटायर्ड हुए हैं। वह अपनी पत्नी नीलम के साथ रहते हैं, जबकि उनके बच्चे अमेरिका (America) और नोएडा (Noida) में नौकरी करते हैं।

3 अक्टूबर को जब वह अपनी पत्नी की डायलिसिस कराने अस्पताल गए थे, तभी पहली कॉल आई। कॉल करने वाले ने बताया कि उनके नाम से एक सिम ली गई है, जिसका इस्तेमाल महाराष्ट्र की 19 वर्षीय लड़की को टॉर्चर करने के लिए किया गया, जिससे उसने आत्महत्या कर ली। रमेश चंद्र ने अस्पताल में होने की बात कहकर फोन काट दिया। एक घंटे बाद, दूसरे नंबर से फिर वही बात दोहराई गई। उन्होंने अपनी तबीयत ठीक न होने का बहाना बनाकर फोन काट दिया।

डायलिसिस के बाद जब वह घर पहुंचे, तो दोपहर करीब डेढ़ बजे एक तीसरे नंबर से कॉल आई। इस बार कॉल करने वाले ने खुद को गौरव बताया और कहा, 'कोलाबा पुलिस स्टेशन मुंबई से बात करो। उनकी कॉल उठाओ, तुम्हारे खिलाफ केस दर्ज हो गया है।' फोन कटने के 30 सेकंड बाद, फिर कॉल आई। इस बार फोन करने वाले ने खुद को कोलाबा पुलिस स्टेशन से उमेश बताया और कहा, 'तुम पर केस दर्ज हो गया है। अपनी पूरी पर्सनल डिटेल मुझे भेज दो।' जैसे ही रमेश चंद्र ने अपनी डिटेल भेजी, उमेश ने वीडियो कॉल कर दी। वीडियो कॉल पर उसके पीछे खड़ा एक युवक चिल्लाया, 'इसके खिलाफ और केस हैं क्या?' उमेश ने बताया कि इनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज है।

रमेश चंद्र ने बताया कि ठगों ने उनसे कहा, 'तुम्हारी 24 घंटे निगरानी हो रही है, अगर होशियारी की तो सब लोग बर्बाद हो जाओगे।' इस धमकी ने उन्हें पूरी तरह से डरा दिया।

सीबीआई अधिकारी का प्रवेश और संपत्ति सीज करने की धमकी

वीडियो कॉल पर उमेश ने रमेश चंद्र को मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में फंसाया। उसने बताया कि इस केस में जेट एयरवेज (Jet Airways) के मालिक नरेश गोयल (Naresh Goyal) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के सामने लिखित में दिया है कि रमेश चंद्र ने 538 करोड़ रुपये का 10 प्रतिशत लेकर अपना खाता नंबर, चेक बुक और एटीएम (ATM) प्रयोग करने को दिए थे। यह बात सुनकर रमेश चंद्र के होश उड़ गए।

इसके बाद फोन कट गया। दोपहर करीब 02:42 बजे एक और कॉल आई। इस बार कॉल करने वाले ने खुद को एस के जैसवाल (S.K. Jaiswal) और सीबीआई (CBI) अधिकारी बताया। उसने रमेश चंद्र को धमकाया कि उन्हें मुंबई जेल लाया जाएगा और उनके दोनों बच्चों व पत्नी को घर में ही नजरबंद कर दिया जाएगा। जैसवाल ने कहा कि उनकी पूरी संपत्ति और बैंक खातों को सीज किया जा रहा है और सभी के नंबर सर्विलांस (Surveillance) पर लगे हैं। उसने रमेश चंद्र से उनकी बैंक डिटेल भेजने को कहा, जो उन्होंने डरकर भेज दी।

अगले दिन, 4 अक्टूबर को, एस के जैसवाल ने रमेश चंद्र को उनके पीपीएफ (PPF) खाते में जमा 15,31,781 रुपये अलीगढ़ (Aligarh) स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (State Bank of India) से एसबीआई के कानपुर वाले खाते में ट्रांसफर करने को कहा। उसने यह भी निर्देश दिया कि वे अपने शेयर (Shares) बेच दें और म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) को रिडीम (Redeem) कराकर अपने खाते में क्रेडिट कराएं। ठग ने कहा कि इस संपत्ति की जांच सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की देखरेख में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) करेगा। रमेश चंद्र ने 9 अक्टूबर को ये सभी काम करवा दिए। इसी दिन से उन्हें और उनकी पत्नी को 24 घंटे निगरानी में रखा जाने लगा।

पैसे ट्रांसफर करने का दबाव और फर्जी जज का नाटक

डिजिटल अरेस्ट के दौरान, ठगों ने रमेश चंद्र पर लगातार दबाव बनाए रखा। उनकी वीडियो कॉल एक भी पल के लिए कटने नहीं दी जाती थी। उनका मोबाइल 24 घंटे चार्जिंग में लगा रहता था और उन्हें किसी से भी बात करने की इजाजत नहीं थी। ठगों ने रमेश चंद्र से कहा कि अगर वे जेल जाने से बचना चाहते हैं, तो उनके बताए गए खाते में 20 लाख रुपये डाल दें। रमेश चंद्र ने डरकर आरटीजीएस (RTGS) के माध्यम से यह रकम ट्रांसफर कर दी। इसके बाद, उनके पीएफ (PF) और म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) के पैसे भी ठगों ने अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए।

ठगों का जाल यहीं खत्म नहीं हुआ। 21 नवंबर को, एस के जैसवाल ने रमेश चंद्र की बात एक फर्जी सुप्रीम कोर्ट के जज से कराई। यह बातचीत लगभग 2 मिनट तक चली, जिसमें फर्जी जज ने रमेश चंद्र को आश्वासन दिया कि उनका पैसा 48 से 72 घंटे में वापस आ जाएगा, लेकिन इसके लिए उन्हें 'बेल सिक्योरिटी बॉन्ड' (Bail Security Bond) के रूप में 10 लाख रुपये जमा करने होंगे। 11 दिसंबर को, रमेश चंद्र ने यह रकम भी ठगों द्वारा बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दी। इस तरह, ठगों ने कुल 53 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए।

53 लाख की वसूली का विस्तृत विवरण

रमेश चंद्र ने विस्तार से बताया कि कैसे ठगों ने उनसे यह बड़ी रकम ऐंठी।

  • 9 अक्टूबर को, उन्होंने एसबीआई की मेन ब्रांच से 2 लाख रुपये 'थानवी इलेक्ट्रिकल एंड मैकेनिकल' (Thanvi Electrical & Mechanical) के बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) के केटी ब्रांच, तिरुपति (Tirupati) स्थित खाते में ट्रांसफर किए।
  • 20 नवंबर को, उन्होंने म्यूचुअल फंड का पैसा रिफंड कराकर 23 लाख रुपये 'कर्री जगदीश बाबू' (Karri Jagdish Babu) के नाम से इंडसइंड बैंक (IndusInd Bank) की आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) शाखा में ट्रांसफर किए।
  • इसके बाद, 11 दिसंबर को, उनकी पत्नी नीलम के आईसीआईसीआई (ICICI) खाते से 10 लाख रुपये 'आकांक्षा कामर्शियल' (Akanksha Commercial) के पारालेखमुंडी (Paralakhemundi) ब्रांच में ट्रांसफर किए गए।

यह सभी लेनदेन ठगों के सीधे निर्देश पर और उनकी लगातार निगरानी में किए गए थे।

70 दिनों का मानसिक और शारीरिक अत्याचार

रमेश चंद्र ने बताया कि 70 दिनों तक उनके जीवन का हर पल ठगों की निगरानी में बीता। 24 घंटे उनके मोबाइल पर वीडियो कॉल चलती रहती थी। पहले दिन ठगों ने उन्हें लगातार 6 घंटे तक टॉर्चर किया। उनसे कहा गया कि वे और उनकी पत्नी खुद को एक कमरे में बंद कर लें। कुर्सी पर फोन रखवा दिया गया और रमेश चंद्र सामने बेड पर बैठ गए। ठग वीडियो कॉल पर लगातार उनसे पूछताछ करते रहे। जब रमेश चंद्र ने भूख लगने पर खाना खाने की इजाजत मांगी, तो ठग ने धमकाते हुए कहा, 'जेल जाना है तो खा लो जाकर।' डर के मारे रमेश चंद्र वहीं बेड पर बैठे रहे और पानी तक नहीं पीया।

उनके फ्लैट में 5 दिनों तक नौकरानी को भी नहीं आने दिया गया। दीपावली (Diwali) पर जब उनका बेटा घर आया, तो ठग नाराज हो गए। उन्होंने रमेश चंद्र को धमकाया, 'बेटा घर नहीं आएगा। उसे वापस भेजो।' रमेश चंद्र ने हाथ जोड़कर मिन्नतें कीं। एस के जैसवाल ने उन्हें चेतावनी दी, 'बेटे को कुछ नहीं बताओगे। बताया तो सभी को जेल भेज दूंगा।'

उन्हें दूसरे कमरे में जाने की इजाजत नहीं थी और कमरे में लगे टीवी (TV) को भी चलाने नहीं दिया जाता था। वॉशरूम जाने और खाना बनाने के लिए भी उन्हें ठगों से इजाजत लेनी पड़ती थी। अगर बाथरूम में 20 मिनट से अधिक समय हो जाता, तो वे उनकी पत्नी को डराने लगते और कॉल पर धमकाते थे। एक दिन, उनकी पत्नी घर में मोबाइल छोड़कर चुपचाप घर से निकल गईं। वापस आने पर एस के जैसवाल ने उन्हें डांटा और कहा, 'आप बाहर क्यों गई थीं? हमारे आदमी आप पर पूरी निगरानी कर रहे हैं।' रमेश चंद्र ने बताया कि इन 70 दिनों में ठग उन्हें लगातार जेल भेजने और उनके बेटों का करियर बर्बाद करने की धमकी देते रहे।

शादी पार्टी में भी वीडियो कॉल से निगरानी

रमेश चंद्र की पत्नी नीलम ने बताया कि जब वे बैंक से पैसे निकालने जाते थे, तो साइबर ठग एक मोबाइल से वीडियो कॉल के जरिए उन पर निगरानी रखते थे, वहीं दूसरे मोबाइल पर वॉट्सऐप (WhatsApp) चैट (Chat) करते रहते थे। बाहर जाने पर उन्हें ठगों को यह बताना पड़ता था कि उन्होंने किस रंग के कपड़े पहने हैं और वे किस आदमी से मिलने जा रहे हैं। नीलम ने बताया कि यूएस (US) में रहने वाले उनके एक क्लासमेट की बेटी की शादी में जाने के लिए भी उन्हें ठगों से इजाजत लेनी पड़ी। शादी समारोह में भी वे दोनों वीडियो कॉल के जरिए ठगों की निगरानी में ही रहे थे। रमेश चंद्र ने बताया कि ठग वॉयस (Voice) और वीडियो कॉल, दोनों का इस्तेमाल करते थे और ग्रुप कॉल (Group Call) भी करते थे।

रमेश चंद्र की आपबीती और आंखों में आंसू

रमेश चंद्र ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा, 'मैंने जिंदगी में एक रुपया भी रिश्वत के नहीं लिए। मेरी मेहनत की कमाई वो लोग ले गए।' यह कहते-कहते उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। रमेश चंद्र के हाथों में बैंडेज (Bandage) लगे हुए थे, जिन्हें दिखाते हुए उन्होंने बताया, 'मेरे खाते में सिर्फ 14 हजार रुपये ही बचे हैं। इसमें भी 3 हजार रुपये डायलिसिस में लग गए।'

उन्होंने बताया कि 70 दिनों तक वे किसी को कुछ इसलिए नहीं बता सके, क्योंकि ठगों ने उन्हें धमकाया था कि उनके दोनों बेटों की निगरानी के लिए 'अल्फा टीम' (Alpha Team) लगी है। ठगों ने कहा था कि अगर कुछ भी बताया, तो बेटों की जिंदगी बर्बाद कर देंगे और बड़े बेटे को अमेरिका से डिपोर्ट (Deport) कर दिया जाएगा। उन्होंने रमेश चंद्र को यह भी धमकाया कि नरेश गोयल के बारे में पूछताछ के लिए उन्होंने एक दंपती को बुलाया था, जिसे नरेश के लोगों ने मार डाला था। ठगों ने कहा था कि पूछताछ पूरी होने तक वे लोग घर से बाहर नहीं निकलेंगे।

पत्नी का दर्द और भविष्य की चिंता

नीलम ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि उनकी दोनों किडनियां खराब हैं और सप्ताह में 2 बार डायलिसिस होता है। अब तो उनके पास इलाज के भी पैसे नहीं बचे हैं। उन्होंने कहा, 'देखते हैं कितने दिनों तक डायलिसिस हो पाती है।' नीलम ने भावुक होकर बताया, 'आज तक हम खुद का मकान नहीं खरीद पाए। हमने सोचा था कि बेटे पढ़-लिख जाएं, फिर मकान खरीदेंगे, लेकिन बदमाश मेरे पति की जीवन भर की कमाई खा गए।' यह कहते हुए नीलम की आंखों से आंसू बहने लगे। रमेश चंद्र ने उन्हें संभाला। उन्होंने बताया कि उनका बड़ा बेटा अमेरिका से एमबीए (MBA) कर रहा है, जबकि छोटा बेटा नोएडा से बीटेक (B.Tech) कर रहा है। वे हर महीने बड़े बेटे को करीब 1500 डॉलर (Dollar) और छोटे बेटे को 15 हजार रुपये भेजती थीं। अब उनके पास अपने बेटों की पढ़ाई के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं।

यह घटना साइबर ठगी के बढ़ते खतरे और लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता को उजागर करती है। सतर्कता और जानकारी ही ऐसे जालसाजों से बचने का एकमात्र तरीका है।

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