Highlights
- कांग्रेस सांसदों पर राजस्थान की निधि हरियाणा में खर्च करने का आरोप।
- संजना जाटव, राहुल कस्वां और बृजेन्द्र सिंह ओला पर लगे गंभीर आरोप।
- सांसद निधि से लगभग 1.20 करोड़ रुपये कैथल में खर्च किए गए।
- मंत्री बेढ़म ने इसे केंद्रीय नेतृत्व की खुशामद करार दिया।
जयपुर | गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने कांग्रेस के तीन सांसदों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ये सांसद अपने क्षेत्रों के विकास की बलि चढ़ा रहे हैं।
संजना जाटव, राहुल कस्वां और बृजेन्द्र सिंह ओला पर सांसद निधि के दुरुपयोग का आरोप है। मंत्री के अनुसार वे अपने केंद्रीय नेतृत्व को खुश करने में लगे हैं।
इन सांसदों ने हरियाणा के कैथल में सांसद विकास निधि से बड़ी राशि खर्च की है। वहां कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला के बेटे चुनाव लड़ रहे हैं।
सांसद निधि के नियमों का उल्लंघन
नियमों के मुताबिक एक सांसद अपने क्षेत्र के बाहर अधिकतम 25 लाख रुपये खर्च कर सकता है। आपदा की स्थिति में यह सीमा एक करोड़ रुपये तक हो सकती है।
मंत्री बेढ़म ने बताया कि इन सांसदों ने नियमों को ताक पर रखकर पैसा भेजा है। राजस्थान की जनता के हक का पैसा दूसरे राज्य में लगाया जा रहा है।
भरतपुर और चूरू के विकास की अनदेखी
संजना जाटव ने भरतपुर के विकास के बजाय कैथल में 45 लाख रुपये खर्च किए हैं। उनके द्वारा अनुशंसित भरतपुर के विकास कार्य अभी भी अधूरे पड़े हैं।
राहुल कस्वां ने भी चूरू की निधि से 50 लाख रुपये हरियाणा के विकास के लिए दिए। झुन्झुनूं सांसद बृजेन्द्र सिंह ओला ने 25 लाख रुपये की राशि वहां भेजी है।
राजनीतिक भविष्य बचाने की कवायद
जवाहर सिंह बेढ़म ने कहा कि यह कदम सांसदों के राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए है। वे जनता के भरोसे को तोड़कर अपने नेताओं की खुशामद कर रहे हैं।
भरतपुर जिले में सांसद संजना जाटव का एक भी कार्य पूर्ण नहीं हुआ है। उनके द्वारा किए गए काम केवल अलवर जिले या फिर हरियाणा में दिखाई दे रहे हैं।
राजस्थान की जनता ने इन सांसदों को अपने क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए चुना था। लेकिन अब वे अपनी निधि का उपयोग केवल राजनीतिक लाभ के लिए कर रहे हैं।
इस मामले ने राजस्थान की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। भाजपा अब इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर हमलावर रुख अपना रही है।
मंत्री ने मांग की है कि सांसदों को जनता के प्रति अपनी जवाबदेही तय करनी चाहिए। विकास कार्यों में इस तरह का भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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