World News: एपस्टीन स्कैंडल: इजराइल ने बनवाए ट्रम्प के टेप? मौत नहीं, हत्या थी!

एपस्टीन स्कैंडल: इजराइल ने बनवाए ट्रम्प के टेप? मौत नहीं, हत्या थी!
एपस्टीन स्कैंडल: इजराइल और मौत का रहस्य
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Highlights

  • दावा है कि इजराइल ने ट्रम्प जैसे नेताओं के सेक्स टेप बनवाए।
  • जेफ्री एपस्टीन ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उसकी हत्या करवाई गई।
  • सीआईए पर भी ब्लैकमेल रिंग बनाने का आरोप लगा।
  • एपस्टीन के जिंदा होने या बॉडी डबल की भी चर्चा हुई।

नई दिल्ली: जेफ्री एपस्टीन (Jeffrey Epstein) सेक्स स्कैंडल (Sex Scandal) से जुड़ी कई चौंकाने वाली कॉन्स्पिरेसी थ्योरीज (Conspiracy Theories) सामने आई हैं। दावा है कि इजराइल (Israel) की खुफिया एजेंसी मोसाद (Mossad) का इसमें हाथ था और एपस्टीन ने आत्महत्या (Suicide) नहीं की, बल्कि उसकी हत्या (Murder) करवाई गई थी।

जेफ्री एपस्टीन का नाम आज भी दुनिया के सबसे सनसनीखेज सेक्स स्कैंडलों में शुमार है। एक समय वह दुनिया के ताकतवर नेताओं और हस्तियों का चहेता हुआ करता था।

उसके प्राइवेट आइलैंड पर होने वाली पार्टियों में शामिल होने की हसरत कई लोगों की थी। हालांकि, आज कोई भी उसका नाम लेना पसंद नहीं करता, क्योंकि एपस्टीन फाइल्स ने दुनिया को हिलाकर रख दिया है।

इस स्कैंडल से जुड़ी कई बातें ऐसी हैं, जिन्हें पूरी तरह सच नहीं कहा जा सकता, लेकिन उन्हें झूठ भी नहीं ठहराया जा सकता। आज हम भास्कर एक्सप्लेनर में एपस्टीन सेक्स स्कैंडल से जुड़ी ऐसी ही पांच कॉन्स्पिरेसी थ्योरीज की पूरी कहानी जानेंगे।

ये थ्योरीज बताती हैं कि कैसे एक शख्स की जिंदगी और मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए।

इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद का हाथ?

एपस्टीन सेक्स स्कैंडल को लेकर सबसे बड़ी कॉन्स्पिरेसी थ्योरी यह है कि इसके पीछे इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद का हाथ था। दावा किया जाता है कि मोसाद ने एपस्टीन और उसकी गर्लफ्रेंड गिस्लेन मैक्सवेल का इस्तेमाल जासूसी के लिए किया।

इन दोनों को दुनिया की बड़ी हस्तियों और नेताओं को हनी ट्रैप करने का काम सौंपा गया था। वे लड़कियों के साथ इन हस्तियों के आपत्तिजनक फोटो-वीडियो इकट्ठा करते थे।

इसका मुख्य मकसद इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए इन प्रभावशाली लोगों को ब्लैकमेल करना था। यह एक क्लासिक हनी ट्रैप ऑपरेशन की तरह काम करता था, जिससे संवेदनशील जानकारी हासिल की जा सके।

पूर्व इजराइली जासूस के दावे

पूर्व इजराइली जासूस अरी-बेन-मेनाशे ने एक इंटरव्यू में इस दावे को और पुख्ता किया। उन्होंने दावा किया कि एपस्टीन और मैक्सवेल इजराइली मिलिट्री इंटेलिजेंस के लिए काम करते थे।

उनके अनुसार, यह एक सुनियोजित ऑपरेशन था, जिसका उद्देश्य दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों पर नियंत्रण स्थापित करना था। इस तरह की जासूसी गतिविधियां अक्सर राष्ट्रीय सुरक्षा और भू-राजनीतिक लाभ के लिए की जाती हैं।

ईमेल रिकॉर्ड्स और इजराइली कनेक्शन

न्यूज वेबसाइट 'ड्रॉप साइट' के मुताबिक, 2013 से 2015 के बीच इजराइली सीक्रेट एजेंट योनो कोरेन ने एपस्टीन के मैनहटन वाले अपार्टमेंट में कई बार 10-15 दिन बिताए। एपस्टीन के ईमेल रिकॉर्ड्स से पता चला कि योनो, एपस्टीन और इजराइली सरकार के बीच संचार का माध्यम था।

यहां तक कि पूर्व इजराइली प्रधानमंत्री एहुद बराक के एपस्टीन के साथ कई ईमेल्स वायरल हुए। इन ईमेल्स में पैसे के लेन-देन की बातें भी सामने आईं, जिससे इजराइली कनेक्शन को लेकर संदेह और गहरा गया।

रॉबर्ट मैक्सवेल और खुफिया नेटवर्क

इजराइल और एपस्टीन के बीच कनेक्शन की एक और अहम कड़ी रॉबर्ट मैक्सवेल थे। वह एपस्टीन की गर्लफ्रेंड गिस्लेन के पिता थे और खुद मोसाद के लिए जासूसी करते थे।

आरोप है कि रॉबर्ट की मौत के बाद गिस्लेन और एपस्टीन ने उसी खुफिया नेटवर्क को आगे बढ़ाया। इस नेटवर्क का इस्तेमाल वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली व्यक्तियों को फंसाने और ब्लैकमेल करने के लिए किया गया।

किताबों में खुलासे और इजराइल का खंडन

जर्नलिस्ट डिलन हॉवर्ड, जेम्स रॉबर्ट्सन और मेलिसा क्रोनिन की किताब 'एपस्टीन: डेड मेन टेल नो टेल्स; स्पाइज, लाइज एंड ब्लैकमेल' में भी कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। किताब के मुताबिक, एपस्टीन ने न सिर्फ अमेरिका बल्कि सऊदी अरब और अन्य देशों के रहस्य जानने के लिए अपने संपर्कों का इस्तेमाल किया।

यह सारी जानकारी इजराइल को दी गई, जिससे इजराइल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रणनीतिक लाभ मिल सके। हालांकि, इजराइल के पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने सार्वजनिक तौर पर इजराइल के साथ एपस्टीन के संबंधों को खारिज किया है। उन्होंने साफ कहा था कि एपस्टीन का मोसाद से कोई लेना-देना नहीं है।

जेफ्री ने सुसाइड नहीं किया, मरवाया गया?

जुलाई 2019 में न्यूयॉर्क पुलिस ने जेफ्री एपस्टीन को सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोप में गिरफ्तार किया। इसके बाद उसे न्यूयॉर्क की जेल में रखा गया, जहां उसकी सुरक्षा कड़ी थी।

गिरफ्तारी के बाद यह दावा किया गया कि एपस्टीन के पास एक सीक्रेट क्लाइंट लिस्ट है। इस लिस्ट में दुनियाभर के कई हाई प्रोफाइल लोगों के नाम शामिल थे, जिनमें डोनाल्ड ट्रम्प, बिल क्लिंटन और प्रिंस एंड्रयू जैसे दिग्गज भी थे।

कहा गया कि एपस्टीन इन सभी के राज जानता था और उनका खुलासा कर सकता था। लेकिन 10 अगस्त 2019 को खबर आई कि एपस्टीन ने जेल के अंदर सुसाइड कर लिया है।

आत्महत्या पर उठे सवाल

एपस्टीन की मौत की खबर आते ही कई सवाल खड़े हो गए। अमेरिकी टीवी होस्ट जो स्कारबोरो ने ट्वीट किया, 'एक ऐसा व्यक्ति, जिसके पास अमीर और ताकतवर लोगों की जिंदगी तबाह करने की जानकारी थी, जेल में मरा पाया गया। यह तो रूसी तरीका है।'

न्यूयॉर्क के मेयर बिल डी ब्लासियो ने भी कहा, 'अब एपस्टीन दूसरों को दोषी नहीं ठहरा सकता।' इन बयानों ने मौत को लेकर संदेह और बढ़ा दिया।

सुरक्षा में खामियां और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट

एपस्टीन को जेल में कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया था और यह सुनिश्चित किया गया था कि वह आत्महत्या न कर सके। इसके बावजूद उसकी मौत हो गई, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पता चला कि उसकी गर्दन की कई हड्डियां टूटी हुई थीं। फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. माइकल बाडेन ने दावा किया कि ऐसी चोटें फांसी या आत्महत्या में नहीं होतीं, बल्कि यह गला घोंटने जैसा मामला लगता है।

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, जिस रात एपस्टीन की मौत हुई, उस रात सिक्योरिटी में कई खामियां देखी गईं। एपस्टीन के सेल के बाहर लगे 2 कैमरे उस रात कई बार खराब हुए।

एक बार 3 मिनट के लिए कैमरे बंद हुए और जब दोबारा चालू हुए तो एपस्टीन की मौत हो चुकी थी। जेल की ओर से जारी सीसीटीवी फुटेज में भी 1 मिनट का जंप था, जो संदेह पैदा करता है।

सिक्योरिटी गार्ड्स को हर 30 मिनट में जाकर एपस्टीन को देखना होता था, लेकिन उस रात ऐसा नहीं हुआ। टोवा नोएल और मिचेल थॉमस नाम के दोनों गार्ड ड्यूटी के दौरान सो गए और अपनी लॉगबुक में झूठ लिखा कि उन्होंने एपस्टीन को चेक किया है।

इन सभी बातों को लेकर काफी चर्चा होती है कि एपस्टीन की मौत की वजह सुसाइड थी या फिर मर्डर। कयास लगाए जाते हैं कि अगर एपस्टीन जिंदा रहता तो कई ताकतवर और रईस लोगों को बर्बाद कर सकता था।

सीआईए ने ब्लैकमेल रिंग बनाई?

एपस्टीन स्कैंडल से जुड़ी एक और बड़ी कॉन्स्पिरेसी थ्योरी यह है कि सीआईए (CIA) दुनिया के तमाम बड़े नेताओं, उद्योगपतियों और अन्य ताकतवर लोगों को कंट्रोल करना चाहती थी। इसका मकसद फॉरेन पॉलिसी, डिफेंस डील, स्टॉक मार्केट, ट्रेड वगैरह की जानकारी हासिल करना और उन्हें नियंत्रित करना था।

इसके लिए सीआईए ने एपस्टीन की मदद से एक 'ब्लैकमेल रिंग' तैयार की। इस रिंग के जरिए ताकतवर हस्तियों के प्राइवेट वीडियो, फोटो, मैसेज और ईमेल वगैरह इकट्ठा किए गए।

सीआईए मुखबिर होने का दावा और खंडन

सितंबर 2025 में अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (DOJ) के सीनियर अधिकारी ग्लेन प्रेजर ने दावा किया कि एपस्टीन सीआईए का मुखबिर था। उन्होंने यह भी कहा कि डीओजे इसकी जांच नहीं करना चाहता था, क्योंकि एपस्टीन अमेरिका और इजराइल के लिए काफी अहम था।

हालांकि, डीओजे ने इस दावे को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि दावा करने वाले शख्स का एपस्टीन केस से कोई लेना-देना नहीं है और उसने निजी फायदे के लिए ऐसे मनगढ़ंत दावे किए हैं।

सबूतों की कमी

न तो अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई (FBI) या डीओजे की केस फाइलों में, न कोर्ट में पेश सबूतों में और न ही सार्वजनिक रिपोर्टों में ऐसा कोई ठोस सबूत मिला। ऐसा कोई भी सबूत नहीं था जो एपस्टीन को सीआईए ऑपरेटिव साबित करे।

हालांकि, एपस्टीन की प्रॉपर्टी से मिले सबूतों में दिखा है कि वह लोगों को ब्लैकमेल करने के लिए उनके फोटो-वीडियो बनाता था। यह अमूमन हर अपराधी या माफिया करता है, लेकिन इसका किसी सीक्रेट मिशन से सीधा लिंक साबित नहीं हुआ।

एपस्टीन मरा नहीं, उसका बॉडी डबल मरा?

अगस्त 2019 में जेफ्री एडवर्ड एपस्टीन की मौत के बाद एरिक पियर्सन नाम के एक व्यक्ति ने फेसबुक पर एक चौंकाने वाला दावा किया। उसने कहा कि एपस्टीन मरा नहीं है और जो व्यक्ति दिखाया गया वह एपस्टीन का बॉडी डबल है।

एरिक ने एक फोटो के साथ अपनी पोस्ट में लिखा, 'डेड बॉडी को बिना कवर या बॉडी बैग के क्यों निकाला जा रहा है? चेहरा बहुत पिंक है, जो डेड मैन का नहीं लगता।' इस पोस्ट ने एक नई कॉन्स्पिरेसी थ्योरी को जन्म दिया।

जिंदा होने के दावे और फोटो में अंतर

इसके बाद यह चर्चा होने लगी कि एपस्टीन अभी जिंदा है। कुछ लोगों का मानना था कि वह अपने आइलैंड पर प्रोटेक्टिव कस्टडी में रह रहा है और वहीं से सेक्स स्कैंडल का बिजनेस चला रहा है।

यह भी दावा किया जाता है कि एपस्टीन की मौत के बाद जो फोटो दिखाई गई, वह एपस्टीन से नहीं मिलती। दिखाई गई फोटो से उसके नाक, कान और मुंह काफी अलग दिखते हैं। मारा गया शख्स एपस्टीन नहीं, बल्कि उसका बॉडी डबल है।

एफबीआई का खंडन और फुटेज

हालांकि, एफबीआई ने इन सभी दावों का खंडन किया। एफबीआई ने कहा, 'जेफ्री एपस्टीन अपने सेल में बेहोश पाया गया। उसे इमरजेंसी ट्रीटमेंट के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।'

एपस्टीन की मौत के बाद एफबीआई ने जेल का 10 घंटे का फुटेज भी जारी किया। इस फुटेज में एपस्टीन के पास कोई आता-जाता नहीं दिखा। इसके आधार पर एफबीआई ने माना कि एपस्टीन ने सुसाइड किया।

जुलाई 2025 में डीओजे और एफबीआई ने एक मेमो रिलीज किया। इसमें आधिकारिक तौर पर कहा गया कि एपस्टीन ने 10 अगस्त 2019 को अपनी सेल में सुसाइड कर लिया था।

ट्रम्प ने एपस्टीन पीड़िता वर्जीनिया गिफ्रे को मरवाया?

जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के राष्ट्रपति बने। इसके ठीक 3 महीने बाद अप्रैल में वर्जीनिया गिफ्रे नाम की महिला की मौत हो गई, जो एपस्टीन केस की मुख्य पीड़िता थी।

इसके बाद से सोशल मीडिया पर यह चर्चा होने लगी कि वर्जीनिया गिफ्रे की मौत में कहीं न कहीं ट्रम्प का हाथ है। दावा किया जाता है कि ट्रम्प ने गिफ्रे को 'चुप' करवाने के लिए मरवा दिया।

वर्जीनिया के आरोप और मौत पर सवाल

वर्जीनिया ने पहले भी कहा था कि उन्हें जान का खतरा है। उन्होंने बताया था कि कई बड़े लोग उन्हें चुप कराने के लिए उनकी हत्या करवाना चाहते हैं।

हालांकि, ऑफिशियल रिपोर्ट के मुताबिक वर्जीनिया ने सुसाइड किया था। उनके परिवार वालों ने भी इस बात की पुष्टि की।

एपस्टीन से मुलाकात और शोषण की कहानी

वर्जीनिया जब 16 साल की थीं, तब पहली बार उनकी मुलाकात एपस्टीन से हुई थी। वह एपस्टीन की करतूतों को दोबारा उजागर करने वाली पहली पीड़िता थीं।

2019 में 'मीटू मूवमेंट' (Me Too Movement) के दौरान उन्होंने एपस्टीन पर कई गंभीर आरोप लगाए। गिफ्रे ने बताया, 'जब मैं 16 साल की थी और डोनाल्ड ट्रम्प के क्लब मार-ए-लागो में काम कर रही थी, तब मुझे गिस्लेन मैक्सवेल मिली। उसने मसाज थेरेपी का ऑफर दिया और मुझे एपस्टीन के पास ले गई।'

इसके बाद एपस्टीन मुझे अपने विला ले गया और अगले 3 साल तक मेरा यौन शोषण हुआ। यह कहानी बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली थी, जिसने दुनिया को हिला दिया।

प्रिंस एंड्रयू और किताब में खुलासे

2021 में वर्जीनिया ने ब्रिटेन के शाही परिवार के प्रिंस एंड्रयू के खिलाफ केस दर्ज कराया। उन्होंने आरोप लगाया, 'जब मैं 17 साल की थी, तब एपस्टीन मुझे प्रिंस एंड्रयू के पास ले गए। एंड्रयू ने मेरे साथ 3 बार यौन संबंध बनाए।'

इसके अलावा वर्जीनिया ने अपनी किताब 'नोबडीज गर्ल' (Nobody's Girl) में भी कई खुलासे किए। इसमें उन्होंने ट्रम्प का जिक्र किया, लेकिन ऐसा कोई सीधा आरोप नहीं लगाया कि ट्रम्प ने उनके साथ दुराचार किया हो।

एपस्टीन स्कैंडल की ये पांच कॉन्स्पिरेसी थ्योरीज आज भी लोगों के मन में कई सवाल छोड़ जाती हैं। इन थ्योरीज के पीछे की सच्चाई क्या है, यह शायद कभी पूरी तरह सामने न आ पाए, लेकिन इन्होंने दुनिया के शक्तिशाली लोगों की काली करतूतों पर से पर्दा उठाने का काम जरूर किया है।

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