पिण्डवाड़ा रेलवे जंक्शन की मांग तेज: पिण्डवाड़ा में रेलवे जंक्शन की मांग को लेकर विशाल वाहन रैली, सांसद लुंबाराम चौधरी के खिलाफ जमकर नारेबाजी

Ad

Highlights

  • पिण्डवाड़ा में रेलवे जंक्शन बनाने की मांग को लेकर निकाली गई विशाल वाहन रैली।
  • जालोर सिरोही सांसद लुंबाराम चौधरी के खिलाफ प्रदर्शनकारियों ने की नारेबाजी।
  • वर्ष 2016-17 के सर्वे के आधार पर पिण्डवाड़ा में ही जंक्शन बनाने की मांग।
  • खनन परियोजना और जंक्शन शिफ्टिंग के बीच कथित साठगांठ का लगाया आरोप।

सिरोही | राजस्थान के सिरोही जिले के पिण्डवाड़ा में रेलवे जंक्शन बनाने की मांग अब एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले चुकी है। शनिवार को इस मांग के समर्थन में क्षेत्र के हजारों लोगों ने एक विशाल वाहन रैली निकाली और अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया। यह रैली पिण्डवाड़ा शहर से शुरू होकर सिरोही जिला मुख्यालय तक पहुंची जहां कलेक्ट्रेट के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया गया। रैली में सैकड़ों की संख्या में चार पहिया वाहन और मोटरसाइकिलें शामिल थीं जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि राजनीतिक दबाव के कारण जंक्शन को पिण्डवाड़ा के बजाय स्वरूपगंज ले जाने की कोशिश की जा रही है।

रेलवे जंक्शन के लिए पुराने सर्वे का हवाला

प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वर्ष 2016-17 में रेलवे विभाग द्वारा जंक्शन के लिए पिण्डवाड़ा नगर का ही विस्तृत सर्वे किया गया था। उस समय तकनीकी और भौगोलिक दृष्टि से पिण्डवाड़ा को ही सबसे उपयुक्त स्थान माना गया था। क्षेत्रवासियों का कहना है कि पिण्डवाड़ा एक औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र है और यहां से रेलवे को अच्छा राजस्व भी प्राप्त होता है। इसके बावजूद अब अचानक जंक्शन को अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की खबरें आने से लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी स्थिति में जंक्शन को पिण्डवाड़ा से बाहर नहीं जाने देंगे।

सांसद लुंबाराम चौधरी के खिलाफ नारेबाजी

रैली के दौरान जालोर सिरोही सांसद लुंबाराम चौधरी के प्रति जनता का गुस्सा साफ तौर पर देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने सांसद के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उन पर पक्षपात करने के आरोप लगाए। लोगों का कहना है कि सांसद जनभावनाओं का सम्मान करने के बजाय कुछ प्रभावशाली लोगों के हितों की रक्षा कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान हाय हाय के नारे लगाए गए और चेतावनी दी गई कि यदि सांसद ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया तो उन्हें आगामी दिनों में कड़े विरोध का सामना करना पड़ेगा। लोगों ने सांसद पर स्वरूपगंज के पक्ष में पैरवी करने का सीधा आरोप लगाया है।

खनन परियोजना और जंक्शन का विवाद

इस पूरे आंदोलन में कमलेश मेटा कास्ट खनन परियोजना का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि रेलवे जंक्शन को स्वरूपगंज शिफ्ट करने के पीछे असली मंशा खनन माफियाओं को लाभ पहुंचाना है। उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित खनन परियोजना से निकलने वाली सामग्री की सुगम ढुलाई के लिए रेलवे जंक्शन को वहां ले जाने की साजिश रची जा रही है। पिण्डवाड़ा की चार ग्राम पंचायतें पिछले तीन महीनों से इस खनन परियोजना के खिलाफ संघर्ष कर रही हैं। वक्ताओं ने कहा कि नेता एसी कमरों में बैठकर फैसले ले रहे हैं जबकि जमीन पर जनता अपने जल जंगल और जमीन की रक्षा के लिए लड़ रही है।

रेल मंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

जिला कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने जिला कलेक्टर के प्रतिनिधि को रेल मंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में पिण्डवाड़ा की भौगोलिक स्थिति और व्यापारिक महत्व का उल्लेख करते हुए जंक्शन को यहीं बनाए रखने की मांग की गई है। ज्ञापन में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि सरकार और रेलवे प्रशासन ने जनभावनाओं के विपरीत कोई निर्णय लिया तो यह आंदोलन और अधिक उग्र हो जाएगा। लोगों ने मांग की है कि पुराने सर्वे को आधार मानकर तुरंत जंक्शन निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाए और किसी भी प्रकार के राजनीतिक हस्तक्षेप को रोका जाए।

चुनाव बहिष्कार की चेतावनी

प्रदर्शन के दौरान हुई सभा में स्थानीय नेताओं और वक्ताओं ने भाजपा नेतृत्व पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सत्ता के नशे में चूर नेता आम जनता की आवाज को अनसुना कर रहे हैं। वक्ताओं ने घोषणा की कि यदि पिण्डवाड़ा के साथ न्याय नहीं हुआ तो आगामी पंचायती राज चुनावों में सत्ताधारी दल के नेताओं का गांवों में प्रवेश वर्जित कर दिया जाएगा। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल एक जंक्शन की नहीं बल्कि क्षेत्र के विकास और स्वाभिमान की लड़ाई है।

सुरक्षा और यातायात व्यवस्था

रैली की विशालता को देखते हुए सिरोही पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। शहर के मुख्य चौराहों और कलेक्ट्रेट के बाहर भारी पुलिस जाब्ता तैनात किया गया था। रैली के कारण शहर के मुख्य बाजारों में यातायात व्यवस्था कुछ समय के लिए बाधित हुई लेकिन पुलिस ने वैकल्पिक मार्गों से वाहनों को निकालकर स्थिति को संभाला। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को शांति बनाए रखने की अपील की और उनके ज्ञापन को उचित माध्यम से सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। इस आंदोलन ने एक बार फिर स्थानीय विकास के मुद्दों पर राजनीतिक खींचतान को उजागर कर दिया है।

Must Read: भले ही बदल गया हो राजस्थान का मैप, लेकिन पुराने जिलों के आधार पर होंगे विधानसभा चुनाव

पढें राज्य खबरें, ताजा हिंदी समाचार (Latest Hindi News) के लिए डाउनलोड करें thinQ360 App.

  • Follow us on :