Highlights
- पीएम मोदी जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की त्रिपक्षीय यात्रा पर।
- भारत-जॉर्डन राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे हुए।
- भारत जॉर्डन से अपने कुल रॉक फॉस्फेट का 40% आयात करता है।
- IMEC कॉरिडोर पर चर्चा होने की प्रबल संभावना है।
JAIPUR | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) जॉर्डन (Jordan), इथियोपिया (Ethiopia) और ओमान (Oman) की त्रिपक्षीय यात्रा पर रवाना हुए। अपनी यात्रा के पहले चरण में वे जॉर्डन किंग अब्दुल्ला (King Abdullah) के निमंत्रण पर वहां जा रहे हैं।
पीएम मोदी की त्रिपक्षीय यात्रा का विवरण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सुबह जॉर्डन के लिए रवाना हो गए हैं। उनकी यह यात्रा 15 से 18 दिसंबर तक जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की रहेगी।
मोदी जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय इब्न अल हुसैन के निमंत्रण पर जा रहे हैं। वे 15-16 दिसंबर तक जॉर्डन में रहेंगे और भारत-जॉर्डन संबंधों पर किंग अब्दुल्ला के साथ बातचीत करेंगे।
यह यात्रा भारत और जॉर्डन के राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने के अवसर पर हो रही है। जॉर्डन के बाद, मोदी 16 दिसंबर को इथियोपिया जाएंगे।
जॉर्डन किंग से मोदी की पिछली मुलाकातें
पीएम मोदी की जॉर्डन यात्रा उनकी पिछली मुलाकातों को भी खास बनाती है। 10 फरवरी 2018 को, जब पीएम मोदी फिलिस्तीन की यात्रा पर थे, तब उनका विमान अम्मान में उतरा था।
यह केवल 2 घंटे की ट्रांजिट विजिट थी, लेकिन जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला प्रोटोकॉल तोड़कर मोदी से मिलने एयरपोर्ट पर पहुंचे थे। दोनों नेताओं की मुलाकात एयरपोर्ट के पास ही हुई।
इस छोटी सी मुलाकात के 15 दिन बाद, किंग अब्दुल्ला भारत दौरे पर आए थे। उनके आगमन पर, पीएम मोदी भी प्रोटोकॉल तोड़कर एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने पहुंचे थे।
अब 7 साल बाद, एक बार फिर पीएम मोदी जॉर्डन जा रहे हैं, जो दोनों देशों के मजबूत संबंधों को दर्शाता है।
भारत-जॉर्डन संबंधों के 75 साल
भारत और जॉर्डन ने 1950 में राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। साल 2025 में इन संबंधों के 75 साल पूरे हो जाएंगे, और मोदी की यह यात्रा इसी महत्वपूर्ण अवसर पर हो रही है।
द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंध
भारत, जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है। साल 2023-24 में दोनों देशों के बीच 26,033 करोड़ रुपए का व्यापार हुआ था, जिसमें भारत का निर्यात लगभग 13,266 करोड़ रुपए था।
दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 5 अरब डॉलर यानी 45,275 करोड़ रुपए करने का लक्ष्य रखा है। यह दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी को मजबूत करेगा।
भारत, जॉर्डन से बड़ी मात्रा में रॉक फॉस्फेट और फर्टिलाइजर का कच्चा माल खरीदता है। भारत के कुल रॉक फॉस्फेट आयात में जॉर्डन की हिस्सेदारी लगभग 40% है।
दूसरी ओर, जॉर्डन भारत से मशीनरी, पेट्रोलियम, अनाज, रसायन, मीट, ऑटो पार्ट्स और उद्योगों से जुड़े उत्पादों का आयात करता है। भारतीय कंपनियों ने जॉर्डन के फॉस्फेट और टेक्सटाइल सेक्टर में 1.5 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है।
IMEC कॉरिडोर पर चर्चा की संभावना
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) पर भी चर्चा होने की संभावना है। यह कॉरिडोर भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
IMEC का ऐलान साल 2023 में भारत में G20 समिट के दौरान हुआ था। यह एक अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग की योजना है, जिसके जरिए भारत का सामान मिडिल ईस्ट से होते हुए यूरोप तक पहुंचाया जाएगा।
IMEC: चीन के BRI का विकल्प
IMEC को चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का एक महत्वपूर्ण विकल्प बताया जा रहा है। BRI भी एक अंतरराष्ट्रीय मार्ग है जिसका उद्देश्य एशिया, अफ्रीका और यूरोप को जोड़ना है।
IMEC के ऐलान के बाद, 7 अक्टूबर को हमास ने इजराइल पर हमला कर दिया था। इससे IMEC के भविष्य पर सवाल उठे, लेकिन गाजा जंग के रुकते ही यह कॉरिडोर फिर चर्चा में आ गया है।
IMEC में जॉर्डन और इजराइल की भूमिका
IMEC कॉरिडोर में भारत, UAE, सऊदी अरब, जॉर्डन, इजराइल, ग्रीस, इटली, फ्रांस, अमेरिका, यूरोपीय यूनियन और जर्मनी शामिल हैं। इसका मकसद यूरोप, मिडिल ईस्ट और भारत के बीच व्यापार को बढ़ाना है।
इस परियोजना के तहत यूरोप, मिडिल-ईस्ट और भारत को समुद्री और रेल मार्ग के जरिए जोड़ा जाएगा। सऊदी अरब में 1200 किमी का रेलमार्ग पहले ही तैयार है।
जॉर्डन से लेकर इजराइल तक रेलमार्ग पर काम होना बाकी है। इस काम में तेजी लाने के लिए पीएम मोदी के दौरे को अहम माना जा रहा है, क्योंकि जॉर्डन इस कॉरिडोर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यूरोप तक सामान पहुंचाने में IMEC का लाभ
IMEC को यूरोप और साउथ एशिया को सीधा जोड़ने वाला नया ट्रेड रूट माना जा रहा है। अभी भारत से यूरोप तक कार्गो स्वेज कैनाल और लाल सागर से होकर गुजरता है, जो लंबा और भीड़भाड़ वाला समुद्री मार्ग है।
IMEC कॉरिडोर की कुल लंबाई 6 हजार किलोमीटर है। इसमें यूरोप से इजराइल और UAE से भारत के बीच 3500 किलोमीटर लंबा समुद्री मार्ग भी शामिल है।
भारत से कार्गो पहले समुद्री रास्ते से UAE या सऊदी अरब पहुंचेगा। वहां से रेल के जरिए जॉर्डन और इजराइल होते हुए सीधे यूरोप तक भेज दिया जाएगा।
अटलांटिक काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार, इस कॉरिडोर के बनने के बाद भारत से यूरोप तक सामान पहुंचाने में लगभग 40% समय बचेगा। साथ ही, लागत में भी 30% की कमी आएगी।
अभी भारत से किसी भी कार्गो शिप को जर्मनी पहुंचने में 36 दिन लगते हैं। IMEC रूट से इसमें 14 दिन की बचत होगी, जो व्यापार के लिए एक बड़ा फायदा है।
जॉर्डन किंग अब्दुल्ला द्वितीय का वंश
जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय को पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का सबसे करीबी वंशज माना जाता है। उनका संबंध सीधे हाशिमी वंश से है, जो इस्लाम में सबसे प्रतिष्ठित वंशों में से एक है।
मोहम्मद साहब कुरैश कबीले से थे, और इसी कबीले की एक शाखा बनू हाशिम थी, जिससे हाशिमी वंश की शुरुआत हुई।
पैगंबर मोहम्मद साहब की बेटी हजरत फातिमा, उनके दामाद हजरत अली, और उनके बेटे हसन और हुसैन की पीढ़ियां आगे चलकर मक्का के शरीफ बनीं। वे ही बाद में हाशिमी राजवंश के शासक बने।
जॉर्डन के शासक हाशिमी राजवंश से आते हैं, जिसने लगभग 700 साल तक मक्का पर शासन किया था। पहले जॉर्डन के राजा शरीफ हुसैन बिन अली थे, और मौजूदा राजा अब्दुल्ला द्वितीय उन्हीं के पड़पोते हैं।
इस तरह, उनका वंश सीधे पैगंबर मोहम्मद साहब से जुड़ता है, जो उन्हें इस्लामिक दुनिया में एक विशेष स्थान दिलाता है।
जॉर्डन एक संवैधानिक राजशाही है, जहां राजा बनने की प्रक्रिया संविधान में तय है। संविधान कहता है कि सत्ता का उत्तराधिकारी हाशिमी राजवंश से ही होगा और राजगद्दी पिता से बेटे को मिलेगी।
जॉर्डन: मिडिल ईस्ट का 'नो ऑयल' देश
जॉर्डन मिडिल ईस्ट का एकमात्र ऐसा देश है, जिसे 'नो ऑयल' देश कहा जाता है। इजराइल, लेबनान, यमन और बहरीन जैसे देशों में भी तेल उत्पादन कम है, लेकिन उनमें भविष्य में अधिक तेल होने की संभावना है।
मिडिल ईस्ट के जिन देशों में तेल के विशाल भंडार हैं, वहां करोड़ों साल पहले समुद्र था। समुद्री जीव मरने के बाद तलछटी चट्टानों में दबकर तेल में बदल गए।
जॉर्डन का ज्यादातर हिस्सा रेगिस्तानी और पहाड़ी चट्टानों से बना है, जो कभी समुद्र के नीचे नहीं था। इसी कारण यहां तेल बनने की प्रक्रिया नहीं हो पाई।
तेल न होने के बावजूद, जॉर्डन के पास फॉस्फेट और पोटाश अच्छी मात्रा में हैं। ये दोनों उर्वरकों में इस्तेमाल होते हैं और जॉर्डन की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत अहम हैं, जिससे देश की आर्थिक स्थिरता बनी रहती है।
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