सिरोही। भ्रष्टाचार के मामले में दंडित जिस कार्मिक को एसीबी के डीजीपी ने विभागीय सेवा से बर्खास्त करने का आदेश दिया था उसे पदोन्नत किए जाने का मामला सामने आया है। इस मामले में एक जागरूक नागरिक ने संबंधित कार्मिक के खिलाफ एसीबी हुई कार्रवाई के दस्तावेज मुख्यमंत्री को भेजकर कार्मिक समेत इस मामले लिप्त दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
Rajasthan : उमाशंकर दवे की भ्रष्टाचार में दोषसिद्धि के बावजूद पदोन्नति
HIGHLIGHTS
- सिरोही में भ्रष्टाचार के आरोपी उमाशंकर दवे को एसीबी के डीजीपी के आदेश के बावजूद बर्खास्त नहीं किया गया और उसे पदोन्नति देकर सिरोही सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक का शाखा प्रबंधक बना दिया गया
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इस मामले में सिरोही कलेक्टर को भी ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से अब यह मामला मुख्यमंत्री के ध्यान लाया गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र भेजने वाले प्रवीण नाथ गोस्वामी ने बताया कि उमाशंकर दवे स्टेनो वर्तमान शाखा प्रबंधक सिरोही सैंट्रल को-आॅपरेटिव बैंक में प्रबंधक के पद पर कार्यरत को भ्रष्टाचार के मामले में दंडित किए जाने एवं पुलिस महानिदेशक भ्रष्टाचार विभाग की ओर से सेवा से बर्खास्त करने के आदेश के बावजूद बर्खास्त नहीं करने एवं संबंधित प्रबंध निदेशक के विरूद्ध कार्रवाई की गई है।
गोस्वामी ने बताया कि सिरोही जिला कलेक्टर एवं प्रबंध निदेशक को 15 दिन के भीतर इस पर कार्रवाई किए जाने एवं उमाशंकर दवे को सेवा से बर्खास्त करने एवं उसको दिए गए गलत परिलाभों की वसूली करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन दो माह बीत जाने के बावजूद अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इसलिए अब यह मामला मुख्यमंत्री के ध्यान में लाया गया है। गोस्वामी ने बताया कि सिरोही सैंट्रल को-आॅपरेटिव बैंक के पूर्व स्टेनो के पद उमाशंकर दवे को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए पकडा था। इस मामले में 2002 में चार्ज सीट सैशन न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण जोधपुर में दी थी।
न्यायालय ने उमाशंकर दवे को दोषी मानते हुए 1 साल का कठोर कारावास व अन्य एक्ट में एक साल का अतिरिक्त कठोर कारावास तथा 10 हजार के अर्थदंड से दंडित किया था। न्यायालय ने यह निर्णय 19 अप्रैल 2019 को दिया था। इसके बाद महानिदेशक भ्रष्टाचार ब्यूरो 23 मई 2012, 5 नवंबर 2020 और 23 फरवरी 2021 को पत्र भेजकर उमाशंकर दवे को सेवा से बर्खास्त कर ब्यूरो मुख्यालय को अवगत कराने का सूचित किया था। लेकिन, उमाशंकर दवे को सेवा से बर्खास्त नहीं किया गया। बल्कि विभाग ने मिलीभगत कर उसकी पदोन्नति कर सिरोही बैंक शाखा का शाखा प्रबंधक बना दिया।
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