Highlights
- राजियावास गांव में डॉगसा नाम के कुत्ते की मौत पर शोक।
- ग्रामीणों ने डीजे और रामधुनी के साथ निकाली भव्य शवयात्रा।
- हर अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले कुत्ते को दी गई विदाई।
- 15 जनवरी को कुत्ते की याद में बारहवें का कार्यक्रम होगा।
अजमेर | राजस्थान के अजमेर जिले में पशु प्रेम की एक ऐसी अद्भुत मिसाल पेश की गई है जिसने सभी का दिल जीत लिया है। ब्यावर क्षेत्र के राजियावास गांव में एक कुत्ते की मौत के बाद ग्रामीणों ने उसका अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ किया।
इस बेजुबान जानवर के प्रति ग्रामीणों का लगाव इतना गहरा था कि उसकी शवयात्रा में पूरा गांव शामिल हुआ। कुत्ते की अंतिम विदाई के दौरान डीजे बजाया गया और रामधुनी के साथ उसे श्मशान घाट तक ले जाया गया।
गांव का चहेता था डॉगसा
गांव के लोग इस कुत्ते को सम्मानपूर्वक डॉगसा कहकर बुलाते थे और वह पिछले कई वर्षों से गांव का अभिन्न हिस्सा था। उसकी मौत की खबर मिलते ही गांव में सन्नाटा पसर गया और लोगों ने अपने काम रोक दिए।
डॉगसा की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वह गांव में होने वाली हर शोकसभा और अंतिम संस्कार में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहता था। जब भी किसी ग्रामीण की मृत्यु होती थी तो वह कुत्ता सबसे पहले उसके घर पहुंच जाता था।
वह न केवल शवयात्रा में आगे चलता था बल्कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने तक श्मशान घाट परिसर में ही बैठा रहता था। उसकी इस वफादारी और सेवाभाव ने ग्रामीणों के दिलों में उसके लिए एक विशेष स्थान बना दिया था।
डीजे के साथ निकली अंतिम यात्रा
मंगलवार को जब डॉगसा का शव सड़क के किनारे मिला तो ग्रामीणों ने तय किया कि उसे लावारिस की तरह नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने तुरंत चंदा इकट्ठा किया और कुत्ते की अंतिम यात्रा को भव्य बनाने की तैयारी शुरू कर दी।
शवयात्रा के लिए एक विशेष वाहन को फूलों से सजाया गया और उस पर डॉगसा के पार्थिव शरीर को रखा गया। डीजे पर भक्ति संगीत और रामधुनी बजाते हुए पूरे गांव की गलियों से यह यात्रा निकाली गई।
इस दौरान गांव की महिलाएं और पुरुष बड़ी संख्या में शामिल हुए और सभी की आंखें अपने प्रिय डॉगसा के लिए नम थीं। रास्ते भर लोग इस अनोखी शवयात्रा को देखते रहे और ग्रामीणों के इस कार्य की सराहना करते रहे।
प्रशासक ब्रजपाल रावत ने जानकारी दी कि कुत्ता लगभग साढ़े पांच साल का था और उसकी मृत्यु अज्ञात कारणों से हुई है। उन्होंने बताया कि कुत्ते के जाने से गांव को ऐसा महसूस हो रहा है जैसे परिवार का कोई सदस्य चला गया हो।
विधि-विधान से हुआ अंतिम संस्कार
श्मशान घाट पहुंचने के बाद हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार कुत्ते का अंतिम संस्कार किया गया और उसे मुखाग्नि दी गई। शाम को गांव की धर्मशाला में एक शोक सभा आयोजित की गई जिसे स्थानीय भाषा में उठावना कहा जाता है।
ग्रामीणों ने केवल अंतिम संस्कार ही नहीं किया बल्कि कुत्ते की आत्मा की शांति के लिए आगे के धार्मिक अनुष्ठान भी तय किए हैं। आगामी 15 जनवरी को गांव में कुत्ते का बारहवां संस्कार किया जाएगा जिसमें सामूहिक भोज का आयोजन होगा।
यह घटना मानवता और पशुओं के बीच के अटूट रिश्ते को दर्शाती है जो आज के दौर में विरल होती जा रही है। राजियावास गांव के लोगों ने यह संदेश दिया है कि प्रेम और सम्मान केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं होना चाहिए।
सोशल मीडिया पर चर्चा
सोशल मीडिया पर भी इस कुत्ते की शवयात्रा की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। लोग राजियावास के ग्रामीणों की संवेदनशीलता की जमकर तारीफ कर रहे हैं और इसे एक प्रेरणादायक उदाहरण मान रहे हैं।
गांव के युवाओं ने बताया कि डॉगसा उनके बचपन का साथी था और वह हमेशा उनके आसपास ही रहता था। उसकी कमी को पूरा करना अब गांव वालों के लिए संभव नहीं होगा क्योंकि उसकी जगह कोई और नहीं ले सकता।
इस प्रकार अजमेर के एक छोटे से गांव ने बेजुबान जानवर के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट कर एक नई मिसाल कायम की है। अब पूरे क्षेत्र में इस अनोखी शवयात्रा और ग्रामीणों के पशु प्रेम की चर्चा जोरों पर है।
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