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छोटा ’दूदू’ बड़ी चाल: 6 महीने पहले तक पंचायत, फिर पालिका और अब बन गया जिला, आखिर क्या रहा कारण ?

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भले ही दूदू की पहचान राजस्थान के सबसे छोटे जिले के रूप में हो रही हो, लेकिन दूदू ने छोटा होने के बावजूद बड़ी चाल चली है। दूदू के बड़ा बनने की यात्रा भी बड़ी और रोचक रही है। 6 महीने पहले तक दूदू पंचायत थी।

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HIGHLIGHTS

  • भले ही दूदू की पहचान राजस्थान के सबसे छोटे जिले के रूप में हो रही हो, लेकिन दूदू ने छोटा होने के बावजूद बड़ी चाल चली है। दूदू के बड़ा बनने की यात्रा भी बड़ी और रोचक रही है। 6 महीने पहले तक दूदू पंचायत थी।
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Dudu

जयपुर | राजस्थान में 19 नए जिलों की घोषणा होते ही जयपुर से अलग होकर दूदू जिला बन गया। भले ही दूदू की पहचान राजस्थान के सबसे छोटे जिले के रूप में हो रही हो, लेकिन दूदू ने छोटा होने के बावजूद बड़ी चाल चली है। 

दूदू के बड़ा बनने की यात्रा भी बड़ी और रोचक रही है। 6 महीने पहले तक दूदू पंचायत थी।

इसके बाद उसने दूदू ने ऐसी छलांग लगाई और पालिका से सीधे जिले के रूप में उभर कर सामने आया है।

दरअसल, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जब 10 फरवरी को राजस्थान का बजट पेश किया था तब दूदू पंचायत थी। 

अपने बजट में सीएम गहलोत ने दूदू को नगर पालिका का दर्जा दिया था। इसके बाद बजट पारित होने के दिन इसे जिला बनाने की घोषणा की गई।

2011 की जनगणना के अनुसार दूदू की जनसंख्या 1,84,960 है जो लगभग समोआ देश या जर्मनी के संघीय शहर बॉन के बराबर है। जिले का जनसंख्या घनत्व 203 प्रति वर्ग किलोमीटर है।

दूदू में अब  3 उपखंड और 3 तहसील होंगी।

उपखंड: मोजमाबाद, दूदू और फागी।
तहसील: मोजमाबाद, दूदू और फागी।

दूदू में सभी विभागों के कार्यालय पहले से ही हैं

हालांकि ऐसा कभी नहीं रहा कि दूदू छोटा क्षेत्र होने के चलते सरकार की उपेक्षाओं का शिकार रहा हो। बल्कि यूं कहा जा सकता है कि दूदू पर तो गहलोत सरकार बेहद मेहरबान रही।

सीएम गहलोत के बार के मुख्यमंत्री कार्यकाल में दूूदू में तमाम सरकारी कार्यालय खोल दिए।

यहां जिला अस्पताल, एडीजे कोर्ट, एडीएम, एडिशनल एसपी, डीएसपी और डीटीओ से लेकर सभी महकमों के एक्सईएन के ऑफिस पहले से ही मौजूद हैं। 

दूदू तो ग्रामीण क्षेत्र की पहली ऐसी विधानसभा हैं जहां 5 सरकारी कॉलेज मौजूद हैं। 

दूदू में के जिला बनने के बाद अब इसमें तीन तहसील, तीन थाने और एक पुलिस सर्कल होगा। 

हालांकि अब दूदू के जिला बनने के बाद इसकी जरूरतों को पूरा करने के लिए कई बड़ी सुविधाओं का होना और भी जरूरी हो गया है। 

तो क्या बाबूलाल नागर का रहा योगदान ?

वहीं दूसरी ओर, राजनीतिक जानकारों का ये भी मानना है कि दूदू को विशुद्ध राजनीतिक कारणों से जिला बनाया गया है। 

बाबूलाल नागर यहां से चार बार विधायक हैं। नागर पहले 3 बार कांग्रेस और एक बार निर्दलीय विधायक बने।

राजनीतिक सूत्रों की माने तो नागर को सीएम गहलोत के बेहद करीबी माना जाता रहा है। 2018 में नागर को कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बावजूद भी वे निर्दलीय विधायक बने और गहलोत को समर्थन दिया।

हालांकि अब दूदू के जिला बनने के बाद इसकी जरूरतों को पूरा करने के लिए कई बड़ी सुविधाओं का होना और भी जरूरी हो गया है। 

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