Highlights
- राजस्थान के सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों के बैग का वजन 50 प्रतिशत तक कम किया जाएगा।
- सत्र 2026-27 से छात्रों को दो चरणों में किताबें बांटी जाएंगी और भविष्य में इसे तिमाही आधार पर किया जाएगा।
- शिक्षा विभाग ने कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए माय करियर एडवाइजर मोबाइल एप लॉन्च किया है।
- इस एप में 1500 से अधिक करियर विकल्पों की जानकारी और एआई आधारित पर्सनलाइज्ड गाइडेंस उपलब्ध है।
जयपुर | राजस्थान में शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों के हित में दो बड़े और महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा पहली से पांचवीं तक के बच्चों के स्कूल बैग का भार कम करने की योजना तैयार की गई है। इसके साथ ही छात्रों को उनके भविष्य के लिए सही मार्गदर्शन प्रदान करने के उद्देश्य से माय करियर एडवाइजर मोबाइल एप भी लॉन्च किया गया है। नई शिक्षा नीति के तहत लिए गए इन फैसलों का मुख्य उद्देश्य बच्चों पर शैक्षणिक बोझ कम करना और उनकी सीखने की क्षमता को बढ़ाना है।
स्कूल बैग का वजन होगा आधा
शिक्षा विभाग के नए प्रस्ताव के अनुसार नई शिक्षा नीति 2020 के निर्देशों का पालन करते हुए बच्चों पर पढ़ाई का बोझ कम किया जाएगा। सत्र 2026-27 से विद्यार्थियों को दो चरणों में पाठ्य पुस्तकें वितरित की जाएंगी। इस नई व्यवस्था के लागू होने से बच्चों के स्कूल बैग का वजन वर्तमान की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। इससे छोटे बच्चों को भारी बैग ढोने से मुक्ति मिलेगी और उनका शारीरिक स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा। भारी स्कूल बैग की समस्या लंबे समय से अभिभावकों और शिक्षकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई थी जिसे अब हल करने का प्रयास किया जा रहा है।
तिमाही आधार पर किताबों का वितरण
शिक्षा विभाग के शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने इस योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सत्र 2027-28 से पाठ्य पुस्तकों का आवंटन तिमाही आधार पर करने की तैयारी है। जब यह व्यवस्था पूरी तरह लागू हो जाएगी तो विद्यार्थियों के बैग का भार वर्तमान भार का केवल 25 प्रतिशत ही रह जाएगा। विभाग का मानना है कि इस कदम से पढ़ाई बच्चों के लिए बोझ नहीं बनेगी बल्कि वे आनंद के साथ शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे। यह पहल शिक्षा को बाल केंद्रित बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान
लंबे समय से विशेषज्ञों द्वारा भारी स्कूल बैग के कारण बच्चों में होने वाली पीठ और कंधे की समस्याओं पर चिंता जताई जा रही थी। शिक्षा विभाग ने इन चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए किताबों के वजन को कम करने का वैज्ञानिक तरीका निकाला है। जब किताबें टुकड़ों में उपलब्ध होंगी तो बच्चों को हर दिन पूरी सामग्री ले जाने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे उनकी सीखने की क्षमता में भी वृद्धि होगी क्योंकि वे शारीरिक रूप से कम थकेंगे और मानसिक रूप से अधिक सक्रिय रहेंगे।
माय करियर एडवाइजर एप की शुरुआत
विद्यार्थियों को करियर के प्रति जागरूक बनाने के लिए विभाग ने एक आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। कक्षा 9 से 12वीं तक के छात्रों के लिए माय करियर एडवाइजर मोबाइल एप पेश किया गया है। यह एप पूरी तरह से एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित है। इसे न केवल छात्रों के लिए बल्कि शिक्षकों और अभिभावकों के लिए भी उपयोगी बनाया गया है ताकि वे बच्चों को सही दिशा दिखा सकें। यह एप राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप तैयार किया गया है।
पर्सनलाइज्ड करियर गाइडेंस की सुविधा
इस मोबाइल एप की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें छात्र अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार करियर का चुनाव कर सकते हैं। एप में एप्टीट्यूड और इंटरेस्ट टेस्ट की सुविधा दी गई है जिसके जरिए छात्र अपना सेल्फ रिव्यू कर सकते हैं। एप के माध्यम से छात्रों को उनकी स्किल्स के आधार पर पर्सनलाइज्ड करियर सुझाव मिलेंगे। इसमें कॉलेज डिग्री वाले पारंपरिक कोर्सेज के साथ बिना डिग्री वाले जॉब विकल्पों को भी शामिल किया गया है। इससे छात्रों को अपनी प्रतिभा पहचानने में मदद मिलेगी।
अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका
माय करियर एडवाइजर एप में अभिभावकों और काउंसलर्स के लिए भी विशेष मॉड्यूल दिए गए हैं। अक्सर माता-पिता को इस बात की जानकारी नहीं होती कि उनके बच्चे की असली रुचि किस क्षेत्र में है। यह एप डेटा और विश्लेषण के माध्यम से माता-पिता को यह समझने में मदद करेगा कि उनके बच्चे के लिए कौन सा क्षेत्र सबसे बेहतर है। शिक्षकों के लिए भी यह एक टूल की तरह काम करेगा जिससे वे कक्षा में छात्रों को बेहतर सलाह दे पाएंगे।
भविष्य की संभावनाओं का भंडार
माय करियर एडवाइजर एप पर 1500 से अधिक करियर विकल्पों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई गई है। इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों को भी वैश्विक स्तर के करियर अवसरों की जानकारी मिल सकेगी। शिक्षा विभाग का यह प्रयास राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उन लक्ष्यों को पूरा करता है जिसमें बाल केंद्रित शिक्षा और समग्र विकास पर जोर दिया गया है। इन बदलावों से राजस्थान के सरकारी स्कूलों में एक नया और सकारात्मक शैक्षिक वातावरण तैयार होगा जो भविष्य की चुनौतियों के लिए छात्रों को तैयार करेगा।
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