Highlights
- सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत चुनाव पूरे कराने का आदेश दिया है।
- पंचायत परिसीमन की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से अदालत ने साफ इनकार किया।
- वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट 29 जनवरी को जारी होगा और 25 फरवरी को फाइनल होगी।
- परिसीमन प्रक्रिया को दोबारा नहीं खोला जाएगा ताकि चुनावी कार्यक्रम प्रभावित न हो।
जयपुर | राजस्थान में पंचायत चुनाव की उल्टी गिनती अब आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में पंचायत चुनाव संपन्न कराने के लिए 15 अप्रैल 2026 की समय सीमा निर्धारित कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत परिसीमन के एक मामले में दायर विशेष अनुमति याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में राजस्थान हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसमें परिसीमन को सही माना गया था।
परिसीमन प्रक्रिया को दोबारा नहीं खोला जाएगा
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि राज्य में परिसीमन की प्रक्रिया को अब दोबारा नहीं खोला जाएगा। कोर्ट का मानना है कि ऐसा करने से पूरे प्रदेश का चुनावी कार्यक्रम बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
याचिकाकर्ताओं ने शिकायत की थी कि उनके गांवों को काफी दूरी पर स्थित अन्य पंचायतों से जोड़ा गया है। उन्होंने दुर्गम भौगोलिक स्थिति और सड़क संपर्क के अभाव का हवाला देते हुए हाईकोर्ट के निर्णय को चुनौती दी थी।
ग्राम पंचायतों के लिए विशेष राहत
शीर्ष अदालत ने ग्राम पंचायतों को एक छोटी राहत देते हुए कहा कि वे मुख्यालय के स्थान पर आपत्ति जता सकते हैं। यदि किसी को पंचायत मुख्यालय के स्थान से शिकायत है तो वे सक्षम प्राधिकारी को आवेदन दे सकते हैं।
हालांकि अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि इस आवेदन प्रक्रिया से चुनाव या परिसीमन पर कोई रोक नहीं लगेगी। सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि परिसीमन प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के तहत की गई है।
मतदाता सूचियों का शेड्यूल हुआ तय
अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने कोर्ट को जानकारी दी कि परिसीमन का कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा हो चुका है। अब राज्य में मतदाता सूचियां तैयार करने के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।
निर्वाचन विभाग के अनुसार ड्राफ्ट मतदाता सूचियां 29 जनवरी को जारी की जाएंगी। इन पर प्राप्त होने वाली आपत्तियों के निस्तारण के बाद 25 फरवरी को मतदाता सूचियों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
कैबिनेट की मंजूरी और आगामी कदम
सरकार की ओर से बताया गया कि परिसीमन केवल दूरी के आधार पर नहीं बल्कि जनसंख्या के आधार पर किया जाता है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद ही इस पूरी प्रक्रिया को कानूनी रूप दिया गया है।
इस फैसले के बाद अब राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक हलचल तेज होने वाली है। प्रशासन अब 15 अप्रैल 2026 तक सभी चुनावी प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से पूरा करने की तैयारी में जुट गया है।
स्थानीय निकायों और पंचायतों के सशक्तिकरण के लिए यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। ग्रामीण जनता अब अपनी नई पंचायतों के गठन और विकास कार्यों के लिए मतदान का इंतजार कर रही है।
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