महेन्द्रजीत सिंह मालवीया : राजस्थान में भाजपा को बड़ा झटका: आदिवासी नेता महेन्द्रजीत सिंह मालवीया की कांग्रेस में घर वापसी

राजस्थान में भाजपा को बड़ा झटका: आदिवासी नेता महेन्द्रजीत सिंह मालवीया की कांग्रेस में घर वापसी
महेन्द्रजीत सिंह मालवीया
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Highlights

  • महेन्द्रजीत सिंह मालवीया ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस में वापसी की घोषणा की है।
  • मालवीया ने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं से दिल्ली में मुलाकात की।
  • गोविंद सिंह डोटासरा ने मालवीया की वापसी को पार्टी के लिए सुखद बताया है।
  • मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने मालवीया के इस फैसले को उनका व्यक्तिगत निर्णय बताया।

जयपुर | राजस्थान की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। वागड़ क्षेत्र के कद्दावर आदिवासी नेता महेन्द्रजीत सिंह मालवीया ने भाजपा का साथ छोड़कर फिर से कांग्रेस में लौटने का फैसला किया है।

मालवीया करीब 23 महीने पहले कांग्रेस और विधायक पद छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। रविवार को उन्होंने दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की और घर वापसी की घोषणा की।

नेताओं से की मुलाकात

इस मुलाकात के दौरान प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा और प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा मुख्य रूप से मौजूद रहे। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी इस बैठक में हिस्सा लिया और मालवीया का गर्मजोशी से स्वागत किया।

गोविंद सिंह डोटासरा ने बताया कि मालवीया ने कांग्रेस छोड़ना अपनी एक बड़ी ऐतिहासिक भूल स्वीकार की है। अब वे फिर से पार्टी की विचारधारा के साथ जुड़कर संगठन की मजबूती के लिए काम करने को तैयार हैं।

भाजपा की प्रतिक्रिया

मालवीया के इस कदम पर राजस्थान सरकार के मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि दल बदलना किसी भी नेता का व्यक्तिगत मामला होता है।

खर्रा ने तंज कसते हुए कहा कि पहले मालवीया का कांग्रेस में दम घुट रहा था इसलिए वे भाजपा में आए थे। उन्होंने आगे कहा कि अब शायद भाजपा में उनका दम घुट रहा होगा इसलिए वे वापस चले गए।

राजनीतिक सफर और प्रभाव

महेन्द्रजीत सिंह मालवीया कांग्रेस सरकार में दो बार मंत्री और चार बार विधायक रह चुके हैं। इसके अलावा वे एक बार सांसद के रूप में भी क्षेत्र की जनता का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

उनकी वापसी से वागड़ क्षेत्र में कांग्रेस को फिर से अपनी जमीन मजबूत करने का मौका मिलेगा। राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को भाजपा के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है।

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