Highlights
- पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने झालावाड़ में सांसद दुष्यंत सिंह की पदयात्रा को भगवा झंडी दिखाई।
- यह यात्रा चारों विधानसभा क्षेत्रों में जाएगी और करीब 90 दिनों तक अलग-अलग चरणों में चलेगी।
- वसुंधरा राजे ने अगले 15 वर्षों के लिए क्षेत्र के विकास का नया रोडमैप तैयार करने पर जोर दिया।
- पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य पंचायत स्तर पर आमजन से सीधा संवाद करना और युवाओं को जोड़ना है।
झालावाड़ | झालावाड़ की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल और उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। सांसद दुष्यंत सिंह ने अपनी तीन दिवसीय पदयात्रा का औपचारिक आगाज कर दिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस यात्रा को भगवा झंडी दिखाकर रवाना किया। जिले के राजनीतिक हलकों में इस जन संवाद यात्रा की काफी चर्चा हो रही है।
इस यात्रा को केवल एक जनसंपर्क कार्यक्रम के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसके पीछे छिपे गहरे सियासी संदेशों को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है।
पदयात्रा की शुरुआत से पहले वसुंधरा राजे और दुष्यंत सिंह ने विशेष पूजा की। उन्होंने नागेश्वर भगवान के दरबार में मत्था टेका और आशीर्वाद प्राप्त किया।
इसके बाद उन्होंने जैन संतों से मुलाकात की और उनका मार्गदर्शन लिया। इस धार्मिक शुरुआत ने यात्रा को एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रंग भी दिया है।
विकास का नया रोडमैप और यात्रा का स्वरूप
वसुंधरा राजे ने मीडिया से बात करते हुए इस यात्रा के लक्ष्यों को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यह पदयात्रा जिले के चारों विधानसभा क्षेत्रों को कवर करेगी।
यह पूरी यात्रा आने वाले समय में लगभग 90 दिनों तक अलग-अलग चरणों में चलेगी। वर्तमान में इसका पहला चरण तीन दिनों के लिए शुरू हुआ है।
सांसद दुष्यंत सिंह इस दौरान गांव-गांव जाकर आम जनता से सीधा संवाद करेंगे। वह लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं को सुनेंगे और उनके त्वरित समाधान खोजेंगे।
राजे ने इस दौरान युवाओं को नेतृत्व की भूमिका में आगे लाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना बहुत जरूरी है।
उन्होंने अगले 15 वर्षों के लिए झालावाड़ के विकास का एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया है। इस विजन के जरिए क्षेत्र की तस्वीर बदलने की योजना बनाई गई है।
राजनीतिक गलियारों में यात्रा के मायने
यह महत्वपूर्ण यात्रा चौमहला और उन्हेल नागेश्वर मंडल के क्षेत्रों से शुरू हुई है। यात्रा का मुख्य संकेत यही है कि राजे परिवार का प्रभाव आज भी बरकरार है।
राजस्थान की राजनीति में वसुंधरा राजे की भूमिका को लेकर कई तरह की अटकलें थीं। इस पदयात्रा ने उन सभी अटकलों पर विराम लगाने का प्रयास किया है।
जमीनी स्तर पर राजे परिवार की सक्रियता ने विरोधियों को भी सोचने पर मजबूर किया है। दुष्यंत सिंह के साथ उनका सार्वजनिक मंच साझा करना भी बहुत अहम है।
इस आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने हिस्सा लिया। लोगों का यह हुजूम क्षेत्र में राजे परिवार की लोकप्रियता का प्रमाण है।
प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इसके महत्व को और बढ़ा दिया। यह यात्रा भविष्य की राजनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।
पंचायत चुनाव की तैयारी और जनसंवाद
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस यात्रा का लक्ष्य आगामी स्थानीय चुनाव हैं। पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों के लिए जमीन तैयार की जा रही है।
दुष्यंत सिंह पंचायत स्तर पर संवाद करके अपनी पकड़ को और मजबूत कर रहे हैं। वह गांव के अंतिम व्यक्ति तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश में जुटे हैं।
वसुंधरा राजे ने जनसभा को संबोधित करते हुए इसे एक भावनात्मक यात्रा बताया। उन्होंने कहा कि यह राजनीति से ऊपर उठकर अपनों से मिलने का एक माध्यम है।
उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि संघर्ष के दिनों में भी वह कभी पीछे नहीं हटी थीं।
जनता का अटूट विश्वास और आशीर्वाद ही किसी नेता की असली ताकत होती है। राजे ने इसी ताकत के दम पर झालावाड़ को अपना मजबूत गढ़ बनाया है।
सांसद दुष्यंत सिंह का संकल्प
सांसद दुष्यंत सिंह ने इस यात्रा को लेकर अपना विजन सबके सामने रखा है। उन्होंने कहा कि पंचायतों से जुड़ने का यह अवसर उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
बुजुर्गों का आशीर्वाद और युवाओं का साथ ही इस यात्रा की सबसे बड़ी सफलता है। वह सभी 36 कौमों को साथ लेकर चलने की विचारधारा पर काम कर रहे हैं।
क्षेत्र के चहुंमुखी विकास के लिए वह हर संभव प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। युवाओं को पार्टी की नीतियों से जोड़ना उनका एक प्रमुख उद्देश्य है।
इस यात्रा के माध्यम से वह क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं का जमीनी स्तर पर अध्ययन करेंगे। इससे आने वाले समय में विकास योजनाओं को लागू करना आसान होगा।
झालावाड़ की जनता ने जिस तरह इस यात्रा का स्वागत किया है वह सराहनीय है। आने वाले दिनों में यह पदयात्रा जिले के अन्य हिस्सों में भी पहुंचेगी।
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